नसीरुद्दीन शाह ने नहीं कहा 'मुझे डर लगता है'
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फोटो - thelallantop
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नसीरुद्दीन शाह का बयान वायरल हो गया है. जितने मुंह उतनी बातें हैं. कोई कह रहा है कि यहीं कमाया खाया और अब यहीं की बुराई कर रहे हैं. जब तक हम ये क्लियर करेंगे कि देश में किसी बुरी चीज को बुरा कहना देश को बुरा कहना नहीं होता है. उसी तरह जैसे डॉक्टर आपके घाव की तरफ उंगली उठाकर आपके शरीर को बुरा नहीं कहता है. फिलहाल ये सब फिलासफी समझाने का टाइम नहीं है. नसीरुद्दीन शाह के बयान पर गौर करने का वक्त है. जो बहुत सारी जगहों पर एक ही कैप्शन के साथ वायरल किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि 'नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि उन्हें डर लगता है.' ये फेसबुक पोस्ट देखिए. इसके 10 हजार से ज्यादा शेयर हैं.

फ़ेक न्यूज के 10 हजार से ज्यादा शेयर
ये मध्य प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. इनका ट्विटर कोई प्रोफेशनल ट्रोल हैंडल कर रहा है. कौवा कान लेकर उड़ा वाली कहावत सुनी हो तो उदाहरण देख लो.
इनके अलावा लाखों की ट्रोल सेना टूट पड़ी है. कुछ संयत भाषा में तो कुछ मां बहन की गालियां देते हुए नसीरुद्दीन को सही साबित करने में लगे हैं. खैर, फैक्ट्स पर आते हैं. नसीरुद्दीन शाह ने कहीं भी नहीं कहा कि उन्हें डर लगता है. हां, फिक्र शब्द का इस्तेमाल दो बार किया. फिक्र और डर में फर्क होता है. अगर कनफ्यूज भी हो रहे हो तो बयान लास्ट तक सुनो. लास्ट में वो कहते हैं जोर देकर, कि डर नहीं लगता गुस्सा आता है. हमने पूरी बात सुनकर टेक्स्ट में बदला है. पढ़िए. इसमें साफ साफ मिलेगा कि डर नहीं लगता, गुस्सा आता है.
नसीरुद्दीन ने गलत क्या कहा
नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि कई इलाकों में हम देख रहे हैं कि एक गाय की मौत को ज्यादा अहमियत दी जाती है, एक पुलिस ऑफिसर के की मौत के बनिस्बत. बुलंदशहर केस में सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्टेप बाई स्टेप यही किया. जब यहां बवाल हो रहा था, वो राजस्थान में चुनाव प्रचार कर रहे थे. जब सब काम निपटाकर लौटकर लखनऊ आए, तो इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के परिवार से मिलने जाना जरूरी नहीं समझा, बल्कि उनको लखनऊ बुलाया. 4 दिसंबर को पहली समीक्षा बैठक की जिसमें पूरा फोकस गोकशी पर रहा, इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या पर एक शब्द नहीं बोले. मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह, अपर पुलिस महानिदेशक इंटेलिजेंस के साथ ये बैठक हुई थी. बैठक में घटना की समीक्षा कर निर्देश दिए, 'इसकी गंभीरता से जांच की जाए और गोकशी में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह घटना एक बड़ा साजिश का हिस्सा है, इसलिए गोकशी के मामले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी लोगों को समय पर गिरफ्तार किया जाए.'
इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या 3 दिसंबर को हुई थी. 18 दिसंबर को बुलंदशहर पुलिस ने उन चार अरेस्ट किए गए लोगों को निर्दोष बताया जिन पर गोकशी का आरोप था. गोकशी का आरोप लगाने वाला और खुद इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या का मुख्य आरोपी योगेश राज, जो बजरंग दल का सदस्य है, वो अब भी पुलिस की पहुंच से दूर है. इतना सब देखने के बाद विचार कीजिए कि नसीरुद्दीन ने कहां गलत बोला. इधर एक नई पैदा हुई पार्टी उत्तर प्रदेश नव निर्माण सेना ने नसीरुद्दीन शाह का कराची के लिए टिकट भी करा दिया है. सस्ती पब्लिसिटी का इससे अच्छा तरीका ही नहीं है. नसीरुद्दीन शाह ने स्पष्ट बोला है कि उनको कहीं जाना नहीं है. जिन एक्टर्स को जाना था उन्होंने कनाडा की नागरिकता ले ली है. खैर, कहां रहना है ये पर्सनल मैटर है लेकिन किसी को यहां से निकालने का अधिकार किसी स्वघोषित देशभक्त को नहीं है.

कराची का टिकट
अच्छा ये वही उत्तर प्रदेश नव निर्माण सेना है जिसके मुखिया भूमिगत हो गए थे कुछ दिन पहले. नीचे जो पोस्टर लगा है उसकी शिकायत मिलने के बाद पुलिस इनके अड्डे पर पहुंची थी. पीएम मोदी को जुमलेबाज बताने वाले अमित जानी.

विवादित पोस्टर
सारा मैटर आपके सामने है. कौन सही, कौन गलत खुद फैसला कीजिए.

फ़ेक न्यूज के 10 हजार से ज्यादा शेयर
ये मध्य प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. इनका ट्विटर कोई प्रोफेशनल ट्रोल हैंडल कर रहा है. कौवा कान लेकर उड़ा वाली कहावत सुनी हो तो उदाहरण देख लो.
गौरव भाटिया बीजेपी के प्रवक्ता हैं. उनका ट्वीट भी देखिए.#नसीरुद्दीनशाह
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) December 21, 2018
को अगर इतना ही डर लग रहा है तो उन्हे #महागठबंधन
में चले जाना चाहिए, आजकल सारे डरे हुए वहीं जा रहे हैं.😄
जब 1993 मुम्बई बम ब्लास्ट हुए तो #नसीरुद्दीनशाह
को डर नहीं लगा 26/11 का मुम्बई आतंकी हमला हुआ तो #NaseeruddinShah
को डर नहीं लगा यह डर तो आपको 1984 के सिख दंगो के बाद लगना चाहीये था यह डर आपको जब कश्मीरी पंडित मारे गए तब क्यों नहीं लगा? कुछ भी कहो ड्रामा अच्छा कर लेते हैं — Gaurav Bhatia 🇮🇳 (@gauravbh) December 21, 2018
इनके अलावा लाखों की ट्रोल सेना टूट पड़ी है. कुछ संयत भाषा में तो कुछ मां बहन की गालियां देते हुए नसीरुद्दीन को सही साबित करने में लगे हैं. खैर, फैक्ट्स पर आते हैं. नसीरुद्दीन शाह ने कहीं भी नहीं कहा कि उन्हें डर लगता है. हां, फिक्र शब्द का इस्तेमाल दो बार किया. फिक्र और डर में फर्क होता है. अगर कनफ्यूज भी हो रहे हो तो बयान लास्ट तक सुनो. लास्ट में वो कहते हैं जोर देकर, कि डर नहीं लगता गुस्सा आता है. हमने पूरी बात सुनकर टेक्स्ट में बदला है. पढ़िए. इसमें साफ साफ मिलेगा कि डर नहीं लगता, गुस्सा आता है.
”ये जहर फैल चुका है और दोबारा इस जिन्न को बोतल में बंद करना बड़ा मुश्किल होगा खुली छूट मिल गई है कानून को अपने हाथों में लेने की. कई इलाकों में हम लोग देख रहे हैं कि एक गाय की मौत को ज़्यादा अहमियत दी जाती है, एक पुलिस ऑफिसर की मौत के बनिस्बत. मुझे फिक्र होती है अपनी औलाद के बारे में सोचकर. क्योंकि उनका मजहब ही नहीं है. मजहबी तालीम मुझे मिली थी, रत्ना (रत्ना पाठक शाह-अभिनेत्री और नसीर की पत्नी) को बिलकुल नहीं मिली थी, वो एक लिबरल परिवार से आती हैं. हमने अपने बच्चों को मजहबी तालीम बिलकुल नहीं दी. क्योंकि मेरा ये मानना है कि अच्छाई और बुराई का मजहब से कुछ लेना-देना नहीं है. अच्छाई और बुराई के बारे में जरूर उनको सिखाया. हमारे जो बिलीफ हैं, दुनिया के बारे में वो हमने उन्हें सिखाए. कुरान-शरीफ की एक-आध आयत याद ज़रूर करवाई क्योंकि मेरा मानना है उससे तलफ्फुज़ सुधरता है. उसके रियाज़ से. जिस तरह हिंदी का तलफ्फुज़ सुधरता है रामायण या महाभारत पढ़के. खुशकिस्मती से मैंने बचपन में अरबी पढ़ी थी इसलिए कुछ आयतें अब भी याद हैं. उसकी वजह से मेरे खयाल से मेरा तलफ्फुज़ है. तो फिक्र मुझे होती है अपने बच्चों के बारे में कि कल को उनको अगर भीड़ ने घेर लिया कि तुम हिंदू हो या मुसलमान, तो उनके पास तो कोई जवाब ही नहीं होगा. इस बात की फिक्र होती है कि हालात जल्दी सुधरते तो मुझे नज़र नहीं आ रहे. इन बातों से मुझे डर नहीं लगता गुस्सा आता है. और मैं चाहता हूं कि राइट थिंकिंग इंसान को गुस्सा आना चाहिए डर नहीं लगना चाहिए हमें. हमारा घर है हमें कौन निकाल सकता है यहां से.”
नसीरुद्दीन ने गलत क्या कहा
नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि कई इलाकों में हम देख रहे हैं कि एक गाय की मौत को ज्यादा अहमियत दी जाती है, एक पुलिस ऑफिसर के की मौत के बनिस्बत. बुलंदशहर केस में सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्टेप बाई स्टेप यही किया. जब यहां बवाल हो रहा था, वो राजस्थान में चुनाव प्रचार कर रहे थे. जब सब काम निपटाकर लौटकर लखनऊ आए, तो इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के परिवार से मिलने जाना जरूरी नहीं समझा, बल्कि उनको लखनऊ बुलाया. 4 दिसंबर को पहली समीक्षा बैठक की जिसमें पूरा फोकस गोकशी पर रहा, इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या पर एक शब्द नहीं बोले. मुख्य सचिव, डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह, अपर पुलिस महानिदेशक इंटेलिजेंस के साथ ये बैठक हुई थी. बैठक में घटना की समीक्षा कर निर्देश दिए, 'इसकी गंभीरता से जांच की जाए और गोकशी में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. यह घटना एक बड़ा साजिश का हिस्सा है, इसलिए गोकशी के मामले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी लोगों को समय पर गिरफ्तार किया जाए.'
इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या 3 दिसंबर को हुई थी. 18 दिसंबर को बुलंदशहर पुलिस ने उन चार अरेस्ट किए गए लोगों को निर्दोष बताया जिन पर गोकशी का आरोप था. गोकशी का आरोप लगाने वाला और खुद इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या का मुख्य आरोपी योगेश राज, जो बजरंग दल का सदस्य है, वो अब भी पुलिस की पहुंच से दूर है. इतना सब देखने के बाद विचार कीजिए कि नसीरुद्दीन ने कहां गलत बोला. इधर एक नई पैदा हुई पार्टी उत्तर प्रदेश नव निर्माण सेना ने नसीरुद्दीन शाह का कराची के लिए टिकट भी करा दिया है. सस्ती पब्लिसिटी का इससे अच्छा तरीका ही नहीं है. नसीरुद्दीन शाह ने स्पष्ट बोला है कि उनको कहीं जाना नहीं है. जिन एक्टर्स को जाना था उन्होंने कनाडा की नागरिकता ले ली है. खैर, कहां रहना है ये पर्सनल मैटर है लेकिन किसी को यहां से निकालने का अधिकार किसी स्वघोषित देशभक्त को नहीं है.

कराची का टिकट
अच्छा ये वही उत्तर प्रदेश नव निर्माण सेना है जिसके मुखिया भूमिगत हो गए थे कुछ दिन पहले. नीचे जो पोस्टर लगा है उसकी शिकायत मिलने के बाद पुलिस इनके अड्डे पर पहुंची थी. पीएम मोदी को जुमलेबाज बताने वाले अमित जानी.

विवादित पोस्टर
सारा मैटर आपके सामने है. कौन सही, कौन गलत खुद फैसला कीजिए.

