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  • Fact Check: Cutting of a news paper viral on social media claiming government has imposed 18% GST on farm land renting or leasing is misleading

पड़ताल: अगर खेत बटाई या ठेके पर दिया तो 18% GST देना होगा?

एक अख़बार की कटिंग शेयर कर सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं यूज़र्स

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12 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 12 जनवरी 2021, 02:33 PM IST)
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दावा- केंद्र सरकार ने खेत बटाई पर लगाने के पर 18 फ़ीसदी GST लगा दिया है.
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दावा देश में दिल्ली समेत कई जगहों पर किसान आंदोलन चल रहा है. वहीं सरकार 1 फरवरी को बजट पेश करने की तैयारी कर रही है. इस बीच किसानों और बजट से जुड़ी अखबार की एक कटिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. वायरल कटिंग में दावा किया जा रहा है कि "अगर खेत बटाई पर दिया तो 18 फीसदी GST लगेगा"
वॉट्सऐप पर वायरल हो रही इस अख़बार की कटिंग में दावा किया गया है कि "सरकार ने खेत को बटाई या ठेके पर देने को कारोबार मान लिया है और इसे 18 प्रतिशत की GST स्लैब में शामिल कर लिया गया है."
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वॉट्सऐप पर वायरल अख़बार की कटिंग.

फेसबुक पेज आप कार्यकारिणी महोबा
जैसे कई यूज़र्स ने वायरल कटिंग शेयर कर लिखा है-
"खेत बटाई पर दिया तो 18 फीसदी जीएसटी"
खेत बटाई पर दिया तो 18 फीसदी जीएसटी
Posted by आप कार्यकारिणी महोबा
on Saturday, 26 December 2020
(आर्काइव लिंक
)
इसके अलावा ट्विटर
पर भी यही दावा किया जा रहा है. (आर्काइव लिंक
) पड़ताल 'दी लल्लनटॉप' ने वायरल दावे की पड़ताल की. हमारी पड़ताल में अखबार की कटिंग दिखाकर बटाई या ठेके पर दी गई ज़मीन पर 18 प्रतिशत GST लगने का दावा भ्रामक निकला. केंद्र सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है. और वायरल हो रही इस जानकारी पर वित्त मंत्रालय ने 2018 में भी स्पष्टीकरण दिया था.
"खेत बटाई पर GST" से जुड़े कुछ शब्द इंटरनेट पर सर्च किए तो हमें इसकी सच्चाई पता चल गई. हमें इंटरनेट पर सरकारी सूचनाओं की नोडल एजेंसी प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो ( PIB) की 28 मई 2018 को जारी की गई एक प्रेस रिलीज़ मिली. प्रेस रिलीज़ में वित्त मंत्रालय ने उस वक्त मीडिया में चल रही ऐसी खबरों का खंडन किया था. प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़-
" जुलाई, 2017 में GST (वस्‍तु एवं सेवा कर) को लागू करने के बाद से लेकर अब तक किसानों से संबंधित GST कानून और कराधान में कोई बदलाव नहीं किया गया है. कृषि, वानिकी, मत्‍स्‍य पालन अथवा पशुपालन से संबंधित सहायक सेवाओं को GST से मुक्‍त रखा गया है. इस तरह की छूट प्राप्‍त सहायक सेवाओं में रिक्‍त पड़ी भूमि को इसके उपयोग के लिए संलग्‍न संरचना के साथ अथवा इसके बगैर ही किराये या पट्टे पर देना भी शामिल है. अत: बटाई (पैदावार में हिस्‍सेदारी) या किसी अन्‍य व्‍यवस्‍था के आधार पर कृषि, वानिकी, मत्‍स्‍य पालन अथवा पशुपालन के लिए किसानों द्वारा अपनी भूमि को किराये अथवा पट्टे पर देना भी GST से मुक्‍त है. इसके अलावा, कृषकों को भी GST पंजीकरण कराने से मुक्‍त कर दिया गया है." Pib
PIB की 28 मई 2018 को जारी प्रेस रिलीज़
(आर्काइव लिंक
)
इंडिया टुडे
 पर 28 मई 2018 को पब्लिश ख़बर में वित्त मंत्रालय की ओर से दी गई यही जानकारी प्रकाशित है. PTI के हवाले से छपी ख़बर में लिखा है-
"वित्त मंत्रालय ने ये स्पष्ट किया है कि खेती, पशु पालन या मछली पालन के लिए खेत लीज या रेंट पर देने पर कोई GST नहीं लगेगा. मंत्रालय ने ये भी कहा कि जुलाई 2017 में GST लागू होने के बाद से किसानों के लिए इसमें कोई बदलाब नहीं किया गया है."
(आर्काइव लिंक
)
हमने वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग संपर्क किया. विभाग के अधिकृत अधिकारियों ने ( नाम ना छापने के आग्रह पर) हमें बताया कि सरकार ने खेती की ज़मीन पर GST लगाने का कोई भी फैसला हाल-फिलहाल में नहीं लिया है.
ये दावा पहली बार वायरल नहीं हुआ, 2018 में
भी वायरल
हो चुका है. (आर्काइव
) (आर्काइव
) नतीजा कुल मिलाकर साफ़ है, बजट सत्र के नज़दीक आते ही GST से जुड़ा ये भ्रामक दावा फिर वायरल होने लगा है. हमारी पड़ताल में खेत बटाई या ठेके पर देने पर 18 फ़ीसदी GST लगने का दावा भ्रामक निकला. जिस अख़बार की कटिंग शेयर कर ये दावा किया जा रहा है, वो साल 2018 की है. केंद्र सरकार 28 मई 2018 को ऐसे दावों का खंडन कर चुकी है. राजस्व विभाग ने भी बताया है कि खेती की ज़मीन पर GST लगाने का कोई फैसला सरकार ने हाल फिलहाल में नहीं लिया है.

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