Fact Check: क्या मीडिया पुलवामा में RDX पहुंचाने वाले आरोपियों का नाम छुपा रही है?
दावा है कि आरोपियों का धर्म देखकर उन्हें बचाया जा रहा है.
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सोशल मीडिया पर पुलवामा में RDX पहुंचाने वालों की पहचान की जा रही है
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भौगोलिक रूप से तो भारत को मैदानी, पहाड़ी या रेगिस्तान के इलाकों में बांटा गया है. लेकिन असल में भारत राजनीति, धर्म और जाति में बंटा हुआ है. कई लोग इस विभाजन को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहते हैं. पुलवामा हमले के बाद से, सोशल मीडिया पर हमले से जुड़ी अनेकों जानकारियों का अंबार लग गया है. फेसबुक पर ऐसी ही एक जानकारी फैलाई जा रही है. खबर में बताया जा रहा है कि पुलवामा हमले के लिए RDX पहुंचाने वाले आतंकियों की पहचान हो गई है. पोस्ट में इन कथित आतंकियों के धर्म की तरफ भी ध्यान आकर्षित किया जा रहा है.

वायरल पोस्ट को कई जगह शेयर किया गया
क्या है पोस्ट में? फेसबुक पर त्रिभुवन नारायण नाम के एक शख्स हैं. उन्होंने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें लिखा है -
त्रिभुवन नारायण की पोस्ट (बाएं) और उस पर किए गए कमेंट (दाएं).
इस पोस्ट को 7 हजार से ज्यादा बार शेयर किया गया है.
ऐसी ही एक और पोस्ट आम आदमी पार्टी की नेत्री अल्का लांबा के फैन पेज पर भी शेयर हुई. पोस्ट डाला है ललित शाह ने. ललित ने इसी पोस्ट के साथ न्यूज़-पेपर की एक तस्वीर भी डाली है. उसमें एक खबर है जिसकी हैडलाइन है -
पोस्ट के साथ अखबार की एक खबर भी शेयर की गई. इसी को शेयर करते हुए भद्दे पोस्ट भी लिखे गए.
साथ में कथित आतंकियों में से 6 की तस्वीरें भी हैं. साथ में नाम भी लिखे हैं. आशीष सारस्वत, रंजीत पासवान, कृष्णकुमार मुरीही, सुशीलकुमार यादव, पवनकुमार झा और मुकेश प्रसाद.
ऐसे ही कई पोस्ट शेयर हुए. इन पर कमेंट्स आए. कोई मीडिया को गरियाते हुए कह रहा है कि मीडिया हिंदू आतंकवादियों की खबर छुपाता है, तो कोई जवाब में मुसलमानों पर भद्दी बातें लिख कर पोस्ट को झूठी बता रहा है.
क्या है सच्चाई? सच तो बस ये है कि हम धर्म और राजनीति के नाम पर बंटने को तैयार बैठे हैं. और कुछ लोग उकसाने का धंधा खोल के बैठे हैं. यहां भी कुछ ऐसा ही है. थोड़ा झूठ है और थोड़ा सच. सच ये है कि अंकित गर्ग और आदिश जैन को टेरर फंडिंग के लिए पकड़ा गया था. झूठ ये है कि ये आतंकी पुलवामा हमले के लिए RDX पहुंचा रहे थे. दरअसल यह खबर पुलवामा हमला होने के बहुत पहले की है. एक साल पुरानी है. फरवरी 2018 की. जिस मीडिया को गरियाया जा रहा है, उसने इस खबर को खूब चलाया भी था.

फैलाई जा रही पोस्ट पुरानी है, इसे पिछले साल कवर किया गया था
चालबाजी इतनी है कि पोस्ट में पुलवामा तो नहीं लिखा है, पर जानबूझकर एक पुरानी खबर को इस समय पर इस तरह से फैलाया जा रहा है कि ये पुलवामा हमले से संबंधित है.
नकल करने वालों के पास अकल कम पड़ गई पुलवामा हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है. पोस्ट में जो खबर है उसमें लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकवादियों का ज़िक्र है. सिर्फ इतना ही पढ़कर ये साफ हो जाता है कि इस खबर को जबरदस्ती पुलवामा हमले से जोड़ने की घटिया कोशिश की गई है. बात सिर्फ इतनी सी नहीं है कि हेरा-फेरी करके पुरानी खबर को पुलावामा हमले से जोड़कर फैलाया गया. इसमें गंदगी बहुत है. अंकित गर्ग और आदिश जैन वाली खबर तो पुरानी है ही. साथ में जो अखबार की तस्वीर है वो भी कहीं और से ही जुटाई है. इतना ही नहीं, खबर में धर्म देखकर ही नाम दिखाए गए हैं. कुछ नामों को बदल भी दिया है. असली खबर 25 मार्च 2018 की है. पोस्ट वाली खबर में जो 6 नाम दिए हैं, उनमें से बस मुकेश प्रसाद का ही नाम असली खबर में मिलता है. पोस्ट में और भी नाम हैं. साहिल मसीह, नसीम अहमद, नईम अरशद जैसे नामों को नहीं लिखा गया.

टेरर फंडिंग में पकड़े गए 10 आतंकियों की सूची.
यह पोस्ट असली, मगर पुरानी खबरों को जोड़कर बनाई गई है. खबरों में फेरबदल भी की गई है. ऊपर से झूठे तरीके से पुलवामा हमले को इन खबरों से जोड़ा गया है. यह देश को धर्म के नाम पर बांटने और लोगों को भड़काने का एक प्रयास है. पोस्ट पर ऐसे कमेंट भी हैं जो बताने लायक नहीं हैं. इन्हें पढ़कर हिंदू-मुसलमान करने वालों की सोच साफ दिख भी जाती है.

वायरल पोस्ट को कई जगह शेयर किया गया
क्या है पोस्ट में? फेसबुक पर त्रिभुवन नारायण नाम के एक शख्स हैं. उन्होंने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें लिखा है -
RDX पहुंचाने वाले अंकित गर्ग, आदिश जैन और अरुण मारवाह गिरफ्तार. किसी चैनल पर कोई चर्चा नहीं.

त्रिभुवन नारायण की पोस्ट (बाएं) और उस पर किए गए कमेंट (दाएं).
इस पोस्ट को 7 हजार से ज्यादा बार शेयर किया गया है.
ऐसी ही एक और पोस्ट आम आदमी पार्टी की नेत्री अल्का लांबा के फैन पेज पर भी शेयर हुई. पोस्ट डाला है ललित शाह ने. ललित ने इसी पोस्ट के साथ न्यूज़-पेपर की एक तस्वीर भी डाली है. उसमें एक खबर है जिसकी हैडलाइन है -
लखनऊ में 10 आतंकी गिरफ्तार, लश्कर-ए-तैयबा के लिए करते थे 'टेरर फंडिंग'

पोस्ट के साथ अखबार की एक खबर भी शेयर की गई. इसी को शेयर करते हुए भद्दे पोस्ट भी लिखे गए.
साथ में कथित आतंकियों में से 6 की तस्वीरें भी हैं. साथ में नाम भी लिखे हैं. आशीष सारस्वत, रंजीत पासवान, कृष्णकुमार मुरीही, सुशीलकुमार यादव, पवनकुमार झा और मुकेश प्रसाद.
ऐसे ही कई पोस्ट शेयर हुए. इन पर कमेंट्स आए. कोई मीडिया को गरियाते हुए कह रहा है कि मीडिया हिंदू आतंकवादियों की खबर छुपाता है, तो कोई जवाब में मुसलमानों पर भद्दी बातें लिख कर पोस्ट को झूठी बता रहा है.
क्या है सच्चाई? सच तो बस ये है कि हम धर्म और राजनीति के नाम पर बंटने को तैयार बैठे हैं. और कुछ लोग उकसाने का धंधा खोल के बैठे हैं. यहां भी कुछ ऐसा ही है. थोड़ा झूठ है और थोड़ा सच. सच ये है कि अंकित गर्ग और आदिश जैन को टेरर फंडिंग के लिए पकड़ा गया था. झूठ ये है कि ये आतंकी पुलवामा हमले के लिए RDX पहुंचा रहे थे. दरअसल यह खबर पुलवामा हमला होने के बहुत पहले की है. एक साल पुरानी है. फरवरी 2018 की. जिस मीडिया को गरियाया जा रहा है, उसने इस खबर को खूब चलाया भी था.

फैलाई जा रही पोस्ट पुरानी है, इसे पिछले साल कवर किया गया था
चालबाजी इतनी है कि पोस्ट में पुलवामा तो नहीं लिखा है, पर जानबूझकर एक पुरानी खबर को इस समय पर इस तरह से फैलाया जा रहा है कि ये पुलवामा हमले से संबंधित है.
नकल करने वालों के पास अकल कम पड़ गई पुलवामा हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है. पोस्ट में जो खबर है उसमें लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकवादियों का ज़िक्र है. सिर्फ इतना ही पढ़कर ये साफ हो जाता है कि इस खबर को जबरदस्ती पुलवामा हमले से जोड़ने की घटिया कोशिश की गई है. बात सिर्फ इतनी सी नहीं है कि हेरा-फेरी करके पुरानी खबर को पुलावामा हमले से जोड़कर फैलाया गया. इसमें गंदगी बहुत है. अंकित गर्ग और आदिश जैन वाली खबर तो पुरानी है ही. साथ में जो अखबार की तस्वीर है वो भी कहीं और से ही जुटाई है. इतना ही नहीं, खबर में धर्म देखकर ही नाम दिखाए गए हैं. कुछ नामों को बदल भी दिया है. असली खबर 25 मार्च 2018 की है. पोस्ट वाली खबर में जो 6 नाम दिए हैं, उनमें से बस मुकेश प्रसाद का ही नाम असली खबर में मिलता है. पोस्ट में और भी नाम हैं. साहिल मसीह, नसीम अहमद, नईम अरशद जैसे नामों को नहीं लिखा गया.

टेरर फंडिंग में पकड़े गए 10 आतंकियों की सूची.
यह पोस्ट असली, मगर पुरानी खबरों को जोड़कर बनाई गई है. खबरों में फेरबदल भी की गई है. ऊपर से झूठे तरीके से पुलवामा हमले को इन खबरों से जोड़ा गया है. यह देश को धर्म के नाम पर बांटने और लोगों को भड़काने का एक प्रयास है. पोस्ट पर ऐसे कमेंट भी हैं जो बताने लायक नहीं हैं. इन्हें पढ़कर हिंदू-मुसलमान करने वालों की सोच साफ दिख भी जाती है.

