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5G स्पेक्ट्रम की नीलामी में घोटाले का दावा करते अखबार के स्क्रीनशॉट का सच कुछ और निकला!

सोशल मीडिया पर अखबार की कटिंग वायरल है.

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4 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 4 अगस्त 2022, 12:45 PM IST)
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सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर.
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दावा

28 के पीछे 14 जीरो. एक बार गिनने बैठो तो गिनते ही रह जाओ. फिलहाल आप दिमाग पर ज्यादा जोर मत लगाइए, हम आपकी मुश्किल आसान कर देते हैं. आसान भाषा में इसे कहेंगे 28 लाख अरब. इस संख्या का जिक्र इसलिए क्योंकि एक अखबार की कटिंग में ये संख्या लिखी है और सोशल मीडिया पर वायरल है. दावा है कि 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी में 2.8 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है.

DMK विधायक Dr. T R B Rajaa ने वायरल कटिंग ट्वीट कर इसे भाजपा का 5G स्कैम बताया. (आर्काइव)

लेखक अशोक कुमार पांडेय ने अखबार की वायरल कटिंग ट्वीट कर लिखा, (आर्काइव)

ज़ीरो गिनिए और बताइए टाइम्स पर ED का छापा कितने दिनों में पड़ जाएगा?

अशोक कुमार पांडेय के ट्वीट का स्क्रीनशॉट.

इनके अलावा गुजरात में भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायक छोटूभाई  वसावा, यूपी कांग्रेस और कई और सोशल मीडिया यूज़र्स ने अखबार की कटिंग को शेयर कर ऐसे ही दावे किए हैं.

पड़ताल

'दी लल्लनटॉप' ने वायरल दावे का सच जानने के लिए पड़ताल की. हमारी पड़ताल में वायरल दावा गलत निकला. जिस अखबार की कटिंग को शेयर किया जा रहा है वो असल में एडिटेड है.

कुछ कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें अखबार की वायरल कटिंग की असली कॉपी मिली. ई-पेपर की असली कॉपी में अखबार की हेडलाइन है- 

5G spectrum auctions earn Centre record Rs 1.5 lakh crore

अखबार की असली कटिंग.

वायरल कटिंग और असली कॉपी की तुलना करने पर दोनों में अंतर साफ देखा जा सकता है.

अखबार की वायरल कटिंग.
अखबार की असली कटिंग.

गौर से देखने पर हमें ख़बर में Pankaj Doval की बाइलान दिखाई देती हैं. इसके बाद सर्च से हमें ट्विटर पर पंकज डोभाल का अकाउंट मिला. पंकज ने अपने ट्विटर अकाउंट पर 2 अगस्त, 2022 को वायरल कटिंग की असली ई-कॉपी ट्वीट की है. 

ज्यादा जानकारी के लिए हमने पंकज से संपर्क किया. उन्होंने बताया, 

'वायरल स्क्रीनशॉट फेक है. मैंने 2 अगस्त, 2022 को टाइम्स ऑफ इंडिया के बिजनेस पेज पर 5G की नीलामी पर रिपोर्ट लिखी थी. अगले दिन यानी 3 अगस्त को मुझे पता चला कि कुछ लोगों ने इसके एडिडेट वर्जन को शेयर किया है जो कि गलत है.'

इसके अलावा 2 अगस्त, 2022 को टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर भी इस रिपोर्ट को पब्लिश किया गया था. 

'5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी सात दिन बाद सोमवार को बंद हो गई. इसने सरकारी खजाने के लिए रिकॉर्ड 1. 5 लाख करोड़ रुपये प्राप्त किए क्योंकि सरकार अब इस साल अक्टूबर से महानगरों और बड़े शहरों में हाई-स्पीड दूरसंचार सेवाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है. मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो सबसे बड़ी खरीदार थी, जिसने 88,078 करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम का अधिग्रहण किया. Jio के बाद सुनील मित्तल की Airtel ने 43,084 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम खरीदा, जबकि Vodafone Idea ने 18,799 करोड़ रुपये खर्च किए. गौतम अडानी के अडानी डेटा नेटवर्क्स ने गुजरात, मुंबई, कर्नाटक, तमिलनाडु, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में एयरवेव खरीदने के लिए 212 करोड़ रुपये खर्च किए.'

नतीजा 

हमारी पड़ताल में वायरल दावा गलत साबित हुआ. अखबार की वायरल कटिंग फर्जी है जिसे असली कटिंग के साथ छेड़छाड़ कर बनाया गया है. वायरल कटिंग की हेडिंग में  2.8 लाख करोड़ रुपए के नुकसान होने के बात की जा रही है जबकि अखबार की असली कटिंग में 1.5 लाख करोड़ की कमाई होने की बात लिखी गई है. 

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