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कहानी मूसेवाला के आइडल की, जिन्हें उन्हीं की तरह गोलियों से भून दिया गया था

इसे नियति कहें या इत्तेफाक. सिद्धू मूसेवाला ने जिसे बचपन से अपना गुरु माना, एकलव्य के जैसे जिसके नक्शे कदम पर चलकर उन्होंने सफलता की सीढ़ियां चढ़ी, उनके जीवन का अंत भी बिल्कुल अपने गुरु टुपैक की तरह हुआ.

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अनुभव बाजपेयी
31 मई 2022 (अपडेटेड: 31 मई 2022, 04:10 PM IST)
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