एक निबंध सोनम गुप्ता की बेवफाई पर
बेवफाई बड़ा ही इंटरेस्टिंग कॉन्सेप्ट है. बताते हैं क्यों.
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Source: Twitter
शुक्रिया शुक्रिया, दर्द जो तुमने दिया ये खता हमसे हुई, दिल जो बस तुमको दिया
ना कोई शिकवा गिला, तुमसे ओ बेवफा
बेवफा से सोनम गुप्ता याद आ गई. पता नहीं देश के किस कोने में कौन सी सोनम गुप्ता रहती थी. जिसने जाने किस राहुल, सोनू, मोनू, पप्पू, रोहित, अजय, संतोस, सादाब, साहिद, अकरम के साथ बेवफाई कर दी. और जाने किस आशिक ने उसका नाम करेंसी पर लिखकर अमर कर दिया. अमर ही नहीं, पॉपुलर कर दिया. इतना कि कहानियां लिखी जा रही हैं, ट्विटर ट्रेंड चल पड़े हैं, फेक प्रोफाइल बनाई जा रही है सोनम गुप्ता की. और तो और किसी ने एक फेसबुक इवेंट भी बना दिया है सोनम गुप्ता की बेवफाई के खिलाफ आवाज उठाने के लिए.
https://twitter.com/kushagraasthana/status/798072100833533952
नोटबंदी के इस दौर में, नोटों ने खूब रुलाया है जनता को. लेकिन ये एक नोट है, जो हंसा रहा है. एटीएम, बैंकों की लाइन में घंटों खड़े होने पर जब कुछ नहीं मिलता, तो लोग फेसबुक देखकर ही हंस लेते हैं. जिस पर सोनम गुप्ता की बेवफाई ने कमबैक किया है. और ऐसा कमबैक किया है कि सबकी टाइमलाइन और ट्विटर पर दो ही नाम हैं. मोदी या सोनम गुप्ता.
बेवफाई बड़ा ही इंटरेस्टिंग कॉन्सेप्ट है. दो वजहों से. एक तो 10 में से 9 बेवफा होने वाले लड़कियां होती हैं. दूसरा ये कि आप बेवफा हैं या नहीं, ये तय करने का हक आपको नहीं होता. कोई आपको बेवफा कह जाता है और आप हो जाते हैं.
चलो मान लें कि सोनम के आशिक का नाम संतोस. यानी सोनम को बेवफा कहने वाला संतोस था. संतोस, जिसका नाम संतोष रखा गया होगा, लेकिन हर कोई उसे संतोस ही कहता है. सोनम संतोस के साथ 4 साल से थी. उसकी गर्लफ्रेंड के तौर पर. या बीवी के तौर पर. संतोस सोनम को हर घंटे फ़ोन करके पूछता था, कहां हो बेबी. पूछता था क्या खाया और कितनी रोटियां खाईं. लड़के दोस्तों के साथ बाहर क्यों जाती हो. सोनम गुप्ता तंग आ गई. उसने संतोस को छोड़ दिया.ऐसे में आप कैसे तय करेंगे, कि सोनम गुप्ता बेवफा है या नहीं? अगर आपकी सबसे अच्छी दोस्त अपने बॉयफ्रेंड से त्रस्त होकर उसे छोड़ दे, तो आप उसे बेवफा कहेंगे? या कहेंगे कि अच्छा हुआ छोड़ दिया? और ऐसे में अगर पूरी दुनिया आपकी दोस्त के खिलाफ हो जाए, तो आप कैसा महसूस करेंगे? जरा इसपर सोचिएगा.
या फिर संतोस सोनम को बहुत पीटता था. पांव की जूती की तरह रखता था. चीखता-चिल्लाता, गाली देता था. शक करता था. इश्क और केयर के नाम पर हमेशा उसे डॉमिनेट करने की कोशिश करता था. एक दिन सोनम तंग आ गई. और संतोस को छोड़ दिया.
या फिर सोनम को किसी और से प्रेम हो गया. वो डर के मारे संतोस से बता न सकी.
या फिर सोनम गुप्ता को कभी संतोस से प्यार था ही नहीं. संतोस स्टॉकर था. दिन भर पीछा करता था सोनम का. सोनम ने एक दिन शिकायत कर दी. उस दिन संतोस को लगा कि सोनम गुप्ता बेवफा है.
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एक चीज़ होती है इश्क. दूसरी होती है उसकी अदायगी. और हमारे पॉपुलर कल्चर, जो काफी हद तक बॉलीवुड का आईना है, में इश्क लड़कों की जागीर रही है. इश्क पहले लड़के को हो जाता है. फिर वो लड़की को पटाता है. लड़की मान जाती है. फिर बीच में बेवफा हो जाती है. और अंत में सब कुछ ठीक हो जाता है. लड़की को पटाने के फेज़ में कई गाने हो जाते थे. कलाइयां कट जाती थीं. रुमाल गिर जाते थे. दुपट्टे उड़ जाते थे. हिरोइन छिड़ जाती थी. गुंडे पिट जाते थे. और ज्यों ही गुंडे पिटते थे, हिरोइन पट जाती थी.
लड़का यूं तो मुस्टंडा होता था. लेकिन इश्क की अदायगी में कमज़ोर पड़ जाता है. यानी एक बार में 10 गुंडों से लड़ लेगा. लेकिन एक लड़की के प्यार के लिए बिलख-बिलख के रोएगा. लड़की जालिम होगी, इसलिए इश्क जालिम होगा. फिल्म की बनावट ऐसी रहेगी कि आपकी सिम्पथी हीरो के साथ हो. आप ये सोचते रहें कि हाय कैसी जालिम लड़की है, मानती ही नहीं. देखो तो बेचारा कितना प्यार करता है. और सिनेमा हॉल में बैठी पब्लिक हीरो की साइड हो जाती है.

a scene from 'hum tumhaare hain sanam' love triangle
हीरो की साइड होना हमारी फिल्मों की नहीं, समाज की खामी है. या यूं कहें कि बनावट है, क्योंकि खामी तो उसमें दिखती ही नहीं. और इसी बनावट का आईना है सोनम गुप्ता की कथित बेवफाई. यहां से सोनम गुप्ता की बेवफाई 'कथित' हो जाती है, इसके पीछे की वजह आप ऊपर पढ़ चुके हैं.
सोनम गुप्ता में लोग हर लड़की को देख रहे हैं. कहीं मैंने ये भी पढ़ा कि लड़कियां तो होती ही बेवफा हैं, सोनम गुप्ता क्या अलग होगी. सोनम गुप्ता की बेवफाई मानों देश के मर्दों को एक ऐसी कॉमन बेवफाई के प्रति एकजुट कर रही हो, जो लड़कियां करती ही करती हैं. लड़कों को सोनम गुप्ता में या तो अपनी एक्स नजर आ रही है, या वो लड़की जिसने कभी उनकी प्यार भरी कोशिशों का जवाब नहीं दिया. और इसीलिए उसकी बेवफाई के खिलाफ जुलूस निकालना, इंडिया गेट या जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट करने जैसे चुटकुले हास्य नहीं, सोच के विषय हैं.
मुझे दुःख जरूर होगा, पर यकीन मानिए, हैरत नहीं होगी अगर कल न्यूज़ में सुनने को मिले कि फलां शहर में रहने वाली सोनम गुप्ता नाम की लड़की ने सुसाइड कर लिया है, क्योंकि सब उसे बेवफा-बेवफा कहकर परेशान करते थे.
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