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  • Why Are Shah Rukh Khan and Christopher Nolan Obsessed With IMAX and These Top 5 Cinema Screen Formats?

क्या है IMAX स्क्रीन्स, जिसके चक्कर में 'एवेंजर्स: डूम्सडे' और 'ड्यून 3' वाले भिड़ गए?

क्रिस्टोफर नोलन तोे अपनी फिल्म ही IMAX के लिए बनाते हैं. मगर ये है क्या बला?

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8 मई 2026 (पब्लिश्ड: 09:55 PM IST)
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भारत में केवल 34 IMAX थिएटर्स हैं.
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एक इंटरव्यू के दौरान किसी ने क्रिसट्रोफर नोलन से पूछा- "क्या थिएटर के लिए बनी फिल्मों को फोन में देखना जायज़ है?" नोलन ने एक पल गंवाए बिना कहा- "बिल्कुल जायज़ है." इस बयान के कुछ सालों बाद उन्होंने होमर के महाकाव्य से प्रेरित 'द ओडिसी' फिल्म पर काम शुरू किया. ये दुनिया की ऐसी पहली फीचर फिल्म है, जिसे पूरी तरह IMAX के लिए शूट किया गया है. IMAX यानी बड़ी स्क्रीन. इमर्सिव एक्सपीरियंस. उसमें फिल्म देखते हुए आप दर्शक नहीं रहते, खुद एक किरदार बन जाते हैं. 

चार डंडों के बायस्कोप से शुरू हुआ सिनेमा का ये सैकड़ों साल पुराना सफ़र, यहां तक आने के दौरान कई बदलावों से गुज़रा. इस दौरान थिएटर्स बदले. स्क्रीन्स भी बदले. आज हम सिनेमाघरों के ऐसे ही कुछ सबसे पॉपुलर स्क्रीन फॉर्मेट्स के बारे में आपको बताएंगे. इन्हें आप टिकट बुक करते वक्त तो देखते हैं, मगर उनकी खासियत को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं.

# 2D फॉर्मेट

थिएटर्स में फिल्में देखने का सबसे पॉपुलर वर्जन 2D ही है. जबसे सिनेमा का उदय हुआ, ये तबसे चला आ रहा. इसमें मूवी आपके सामने एक फ्लैट स्क्रीन पर चलती है. इसके लिए आपको अलग से चश्मा लेने या दूसरे तामझाम की ज़रूरत नहीं पड़ती. यहां स्क्रीन का साइज़ 30 से 50 फीट तक हो सकता है. साथ ही इसकी टिकट का दाम बाकी प्रीमियम फॉर्मेट्स की तुलना में कम होता है. ज्यादातर 2D फिल्में 1.85:1 या 2.39:1 एस्पेक्ट रेशियो में दिखाई जाती हैं. ये सिनेमा स्क्रीन के दो सबसे कॉमन एस्पेक्ट रेशियो हैं. इसके ज़रिए आपको ये पता चलता है कि मूवी कितनी चौड़ी और कितनी ऊंची दिखाई देगी.

1.85:1 का मतलब ये है कि फिल्म की चौड़ाई, उसकी ऊंचाई से 1.85 गुना ज्यादा है. ये फॉर्मेट देखने में नैचुरल लगता है. इसलिए कॉमेडी, ड्रामा और फैमिली मूवीज़ में इसका ज्यादा इस्तेमाल होता है. अक्सर आप फिल्मों के ऊपर-नीचे जो काली पट्टियां देखते हैं, वो इसमें बहुत कम दिखती है. वहीं 2.39:1 का मतलब ये है कि फिल्म की चौड़ाई, उसकी ऊंचाई से लगभग ढाई गुना ज्यादा है. ये फॉर्मेट बहुत चौड़ा नज़र आता है. इसे एक्शन, वॉर और सुपरहीरो फिल्मों में इस्तेमाल किया जाता है.

# 3D फॉर्मेट

3D को सिनेमा का दूसरा सबसे पॉपुलर फॉर्मेट कहा जा सकता है. इसमें फिल्में 2D की तरह स्क्रीन पर सपाट नहीं दिखतीं, बल्कि उनका एक थर्ड डायमेंशन भी नज़र आता है. दूसरे शब्दों में कहें तो इसमें फिल्में देखते समय स्क्रीन में गहराई महसूस होती है. मगर उसे देखने के लिए आपको खास 3D चश्मा पहनना पड़ता है. उसके बिना यदि आप स्क्रीन देखने की कोशिश करेंगे तो आपको वीडियो धुंधली नज़र आएगी. सिर दर्द होगा, सो अलग. 3D वर्जन पर 1890s के दौर से प्रयोग चल रहे थे. मगर साल 1922 में 'द पॉवर ऑफ लव' वो पहली फीचर मूवी थी, जो आम दर्शकों के सामने 3D में रिलीज़ हुई. ये अलग बात है कि बाद में इसके 3D और 2D वर्जन, दोनों खो गए.

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‘द पॉवर ऑफ लव’ पहली 3D फीचर फिल्म थी.

3D में जब कोई चीज कैमरे की तरफ आती है, तो ऐसा लगता है जैसे वो स्क्रीन के बाहर आ गई हो. आपकी आंखों के बिल्कुल सामने. मसलन, अगर सनी देओल अपने कंधों पर रखा बाज़ूका चलाएं, तो उसका गोला पकिस्तानियों के साथ-साथ आपकी तरफ़ आता भी महसूस होता है. यही वजह है कि सुपरहीरो, साइंस-फिक्शन, एनिमेशन और लार्ज-स्केल एक्शन फिल्मों में 3D का खूब इस्तेमाल होता है. इसमें दर्शक मूवी को सिर्फ देखते नहीं, बल्कि उसके अंदर होने जैसा महसूस करते हैं. 3D फिल्में आमतौर पर 1.85:1 या 2.39:1 जैसे रेशियो में ही दिखाई जाती हैं. लेकिन उनमें डेप्थ यानी गहराई भी जोड़ दी जाती है.  

# 4DX फॉर्मेट

यदि आपको थिएटर्स में फिल्में देखते हुए पॉपकॉर्न खाने का शौक है, तो 4DX वर्जन से दूर ही रहिए. इसे सिनेमा स्क्रीन का सबसे ड्रमैटिक फॉर्मेट माना जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस फॉरमेट में आप फिल्में देखते हुए उसे फिजिकली महसूस भी करते हैं. इसमें स्क्रीन के साथ-साथ वो चेयर भी हिलती है, जिस पर आप बैठे होते हैं. मज़ेदार बात ये है कि 4DX में फिल्म के हिसाब से हवा, पानी की बूंदें, धुआं, बिजली की चमक, खुशबू और वायब्रेशन जैसे इफेक्ट्स आते हैं. किसी वॉर या हॉरर फिल्म में मामला और भी डरावना हो जाता है.  

4DX फॉर्मेट को साल 2009 में साउथ कोरिया में डेवलप किया गया था. ऐसा करने के पीछे थिएटर चेन CJ CGV का सबसे बड़ा हाथ था. अगले कुछ सालों में ये अमेरिका समेत वेस्टर्न देशों में काफी तेज़ी से फैला. 4DX में इस्तेमाल होने वाली स्क्रीन 2D या 3D की तरह अक्सर 1.85:1 या 2.39:1 रेशियो में दिखाई जाती हैं. लेकिन इसकी असल खासियत स्क्रीन नहीं, बल्कि थिएटर का पूरा एक्सपीरियन्स है. हालांकि ये एक्सपीरियन्स हर किसी के लिए आरामदायक नहीं होता. ऊपर से टिकटें काफी महंगी होती हैं. इसलिए ये बाकी फॉर्मेट्स जितना पॉपुलर नहीं है.

# डॉल्बी सिनेमा फॉर्मेट

डॉल्बी सिनेमा की शुरुआत 2014 में नीदरलैंड्स में हुई थी. ये एक प्रीमियम सिनेमा फॉर्मेट है. इसमें दो तरह की वर्ल्ड क्लास टेक्निक का इस्तेमाल होता है. पहली है- डॉल्बी विज़न. वहीं दूसरी- डॉल्बी एटमॉस. डॉल्बी विज़न में कलर्स ज़्यादा चमकदार नज़र आते हैं. ब्लैक कलर और गहरा महसूस होता है. साथ ही हर एक डिटेल साफ़ दिखाई देती है. दूसरी तरफ़, डॉल्बी एटमॉस साउंड सिस्टम में आवाज़ सिर्फ सामने से नहीं, बल्कि चारों तरफ़ से सुनाई देती हैं. इसलिए जब फिल्म में गोलीबारी या धूम-धड़ाके का सीन आता है, तो दर्शकों को लगता है जैसे वो आवाज थिएटर के अंदर सच में घूम रही हो.

इसमें भी मूवीज़ आमतौर पर 1.85:1 या 2.39:1 रेशियो में ही जाती हैं. चूंकि इसकी स्क्रीन नॉर्मल थिएटर से ज्यादा साफ और हाई-कॉन्ट्रास्ट वाली होती है, इसलिए उसमें अंधेरे वाले सीन भी अच्छी तरह नजर आते हैं. डॉल्बी की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये सिर्फ वीडियो और साउंड क्वालिटी के दम पर ही दर्शकों को बेहद इमर्सिव एक्सपीरियंस दे जाती है. भारत में डॉल्बी साउंड सिस्टम तो कई थिएटर्स में है. लेकिन देश में डॉल्बी सिनेमा केवल चार ही हैं.    

# IMAX

IMAX दुनिया के सबसे बड़े और सबसे इमर्सिव सिनेमा फॉर्मेट्स में से एक है. इसका फुलफॉर्म है Image Maximum और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. वैसे तो IMAX पर 1960s से ही काम चल रहा था. लेकिन 1970 में आई 'टाइगर चाइल्ड' वो पहली मूवी थी, जिसे इस वर्जन में दिखाया गया. उसकी स्क्रीनिंग ओसाका, जापान में एक्सपो '70 के दौरान हुई थी. बाद में इसके मॉडर्न वर्जन विकसित हुए. IMAX में स्क्रीन्स नॉर्मल थिएटर्स से कहीं ज्यादा बड़ी और ऊंची होती हैं. इसलिए फिल्म देखते समय ऐसा लगता है जैसे सामने पूरी दीवार पर ही फिल्म चल रही हो. IMAX में इस्तेमाल होने वाले स्पेशल कैमरे और प्रोजेक्टर्स मूवी को क्रिस्टल क्लियर बनाते हैं. साथ ही इसका साउंड सिस्टम भी इतना जबरदस्त होता है कि हल्क से हल्की आवाज़ भी साफ सुनाई देती है. यही वजह है कि सुपरहीरो, स्पेस, वॉर और बड़े एक्शन वाली फिल्मों को देखने का सबसे अधिक मजा IMAX में ही आता है.

IMAX के कई बड़े वर्जन होते हैं. इनमें 1.43:1 वाला 70mm वर्जन सबसे प्रीमियम और हाई-क्वालिटी फॉर्मेट माना जाता है. इनमें चौड़ाई से ज्यादा ऊंचाई होती है, इसलिए स्क्रीन की वजह से कुछ भी क्रॉप नहीं होता. हालांकि सबसे ज्यादा पॉपुलर IMAX Digital वर्जन है. भारत के सिनेमाघरों में अधिकतर IMAX का यही वर्जन मिलता है. इसमें 1.90:1 रेशियो स्क्रीन का इस्तेमाल होता है. ये नॉर्मल स्क्रीन्स से तो बड़ी है मगर 70mm वर्जन से काफी छोटी. भले ही क्रिस्ट्रोफर नोलन को दर्शकों द्वारा फोन में मूवी देखने से कोई समस्या नहीं. मगर उनकी मूवीज़ को अक्सर IMAX वर्जन में ही देखने की सलाह दी जाती है. भारत में केवल 34 IMAX थिएटर्स हैं.

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IMAX और एक नॉर्मल स्क्रीन का अंतर.

हाल ही में 'एवेंजर्स: डूम्सडे' और 'ड्यून 3' के बीच IMAX स्क्रीन्स को लेकर मारामारी मच गई थी. दरअसल, ये दोनों फिल्में 18 दिसंबर, 2026 को रिलीज़ हो रही हैं. चूंकि दोनों ही अपने विजुअल एक्सपीरियन्स के लिए जानी जाती हैं, इसलिए मेकर्स अभी से ज्यादा-से-ज्यादा IMAX स्क्रीन छेंकने में लगे हुए. 'ड्यून 3' ने तो 8 महीने पहले ही IMAX वर्जन की अडवांस बुकिंग शुरू कर दी है. भारत में केवल 34 IMAX थिएटर्स हैं, जिनको लेकर जंग छिड़ना तय है. जाने-अनजाने शाहरुख खान भी इस लड़ाई का हिस्सा बन जाएंगे. उनकी फिल्म 'किंग' इन दोनों फिल्मों से हफ्ते भर बाद यानी 24 दिसंबर 2026 को रिलीज़ हो रही हैं. वो IMAX सेंट्रिक मूवी नहीं है. फिर भी शाहरुख चाहेंगे कि उन्हें 'ड्यून 3' और 'डूम्सडे' से ज़्यादा स्क्रीन्स मिलें. ऐसा इसलिए क्योंकि IMAX स्क्रीन्स कम होने के बावजूद बड़ा कलेक्शन दे जाते हैं. क्योेंकि इनकी टिकटों की कीमत स्टैंडर्ड मूवी थिएटर्स की तुलना में ऑलमोस्ट डबल होती हैं.

वैसे, IMAX को लेकर पिछले दिनों हॉलीवुड और बॉलीवुड में एक और लड़ाई हुई थी. तब रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' ने भारत के सभी 34 IMAX थिएटर्स पर कब्जा जमा लिया था. इस कारण हॉलीवुड की साय-फाय मूवी 'प्रोजेक्ट हेल मैरी' को एक भी स्क्रीन नहीं दिया जा रहा था. ये तो बाद में लोगों ने सोशल मीडिया पर हो-हल्ला किया, तब जाकर उस मूवी के स्क्रीन्स बढ़ पाए. ऐसे में 2026 के अंत में यदि 'एवेंजर्स: डूम्सडे', 'ड्यून 3' और 'किंग' में भी ऐसी तीन तरफा भिड़ंत होती दिख जाए, तो चौंकिएगा नहीं.

कुल मिलाकर, ये थिएटर के वो पांच टॉप स्क्रीन फॉर्मेट हैं, जो भारत समेत दुनियाभर में पॉपुलर हैं. इनके अलावा ICE (Immersive Cinema Experience), स्क्रीन X, ONYX, 70mm नॉन-IMAX, LieMAX और Regal RPX जैसे कई दूसरे फॉर्मेट्स भी देश-दुनिया के थिएटर्स में चल रहे. मगर उनमें से ज्यादातर या तो भारत में हैं नहीं और अगर हैं भी, तो उन्हें नाममात्र के दर्शक मिलते हैं.

वीडियो: 'रामायण' बनेगी भारत की पहली IMAX फिल्म, ओडिसी जैसी होगी एडवांस बुकिंग?

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