मु्क्काबाज की बड़ी तारीफ हो रही है. अनुराग कश्यप फिर मजेदार फिल्म लेकर आए हैं.अपने साथ ढेर सारी बातें भी, जो हमने आपको दिखाई हैं. वो शाहरुख खान का नाम सुनतेही इमोशनल हो पड़ते हैं. ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स में आया है. हम तब तक नहीं मानेंगेजब तक उनको अपने मुंह से कहते सुन न लें. ये भी कहा जा रहा है कि उनको कभी न कभीशाहरुख खान के साथ काम करना है. वो दिन जब आएगा तो हम हाथ में अक्षत फूल लेकर, कुशपवित्री पहन के फिल्म देखेंगे. लेकिन शाहरुख की अच्छी फिल्मों का डायरेक्शन अगरअनुराग ने किया होता तो ये बनकर आता.शव देसअमेरिका से आए फोरेंसिक एक्सपर्ट से अनजाने में हो जाता है कत्लमुख्य कलाकार- शाहरुख खान, गायत्री जोशी, किशोरी बल्ला निर्देशक- अनुराग कश्यपकहानी- फिल्म की कहानी एक एनआरआई मोहन(शाहरुख) के इर्द गिर्द घूमती है. वो अमेरिकामें बहुत बड़ा फोरेंसिक एक्सपर्ट रहता है. वो भारत आता है अपनी बची हुई प्रॉपर्टीठिकाने लगाने. यहां उससे कावेरी अम्मा का मर्डर हो जाता है. वो फोरेंसिक एक्सपर्टहोने की वजह से सारे सुबूत मिटा देता है. लाश को रसोई में चूल्हे के नीचे गाड़ देताहै. यहां उसका प्रॉपर्टी बेचने का प्लान फंस जाता है. वो जानता है कि अगर किसी कोबेचा तो वो पूरा घर गिरवाकर फिर से बनवाएगा. इसके लिए मोहन को ऐसा कस्टमर चाहिएजिसके पास जमीन खरीदने के बाद घर बनवाने का पैसा न बचे. इसी जुगाड़ में वो कोड़ीगांव जाता है. वहां हरिदास मिलता है. हरिदास की औकात इस समय तमाखू मांगकर खाने कीरह गई है. मोहन उसकी कनपटी पर कट्टा लगाकर अपनी प्रॉपर्टी उसके नाम कर देता है. इसशर्त पर कि उसके पास जैसे जैसे पैसा आता जाएगा, वो मोहन के पेटीएम में ट्रांसफरकरता जाएगा. इस तरह वो सारी उम्र सिर्फ घर के दाम चुकाएगा, कभी बनवा नहीं पाएगा.(होने को ये कहानी और लंबी हो सकती थी लेकिन अभी चार फिल्में और हैं.)फेमस सीन- जब मोहन हरिदास के घर में बैठ के रोटियां तोड़ रहा होता है तभी हरिदासबताता है कि पहले वो कॉन्ट्रैक्ट किलर का काम करता था. लेकिन एक मर्डर के बाद उसेपेमेंट में 1000 के नोट मिले. अगले ही दिन नोटबंदी हो गया और उसका पैसा कचरा होगया. फिर वो घर में बैठ के टाइम किल करने लगा. और कुछ करने को था नहीं तो घर केबर्तन बेचकर दारू पी गया. इसी वजह से आज उसके पास खाने को पैसे नहीं हैं. उस वक्तशाहरुख का गुस्से से लाल हुआ चेहरा देखने लायक है.कतल हो न होअमन कॉन्ट्रैक्ट किलर है और अपनी उम्र से ज्यादा मर्डर किए हैंमुख्य कलाकार- शाहरुख खान, प्रीति जिंटा, सिर्फ अली खान निर्देशक- अनुराग कश्यपकहानी- अमन माथुर(शाहरुख) एक कॉन्ट्रैक्ट किलर है. उसने अपनी उम्र से ज्यादा मर्डरकिए हुए हैं. इतने मर्डर करने के बाद उसे मर्डर करने की बीमारी हो जाती है. उसकेतरीके बड़े खतरनाक हैं. वो पहले अपने शिकार के करीब आता है. उसके लिए मार्केट सेसब्जी लाता है. शिकार के फ्लैट में जाकर चाय पिलाता है. फिर एक दिन चाय में साइनाइडमिला देता है. शिकार झाग छोड़ते हुए हाथ पैर पटक पटक कर जान दे देता है. कई बार जोझोला वो बाजार से सब्जी लाने के लिए इस्तेमाल करता है, उसी में किंग कोबरा भर केशिकार का मुंह झोले में बंद कर देता है. लेकिन उसका फेवरेट तरीका तो सब्जी लाने केबाद वाला होता है. सब्जी काटने के बाद उसी चाकू से खच खच करके शिकार को काट देताहै. फिल्म में अमन एक बुढ़िया(जया) के बगल में फ्लैट लेकर रहने आता है. उसका शिकारबुढ़िया की बेटी नैना(प्रीति जिंटा) है. लेकिन उसका कत्ल करने के लिए अमन को कईलोगों को ठिकाने लगाना पड़ता है. सबसे पहले वो बूढ़ी जेनिफर के रेस्टोरेंट जाता है.वहां गल्ले पर बैठे आदमी से झगड़ा करता है. फिर वहीं रखे फोर्क(त्रिशूल वाला चम्मच)उठाकर उसकी आंख में पेल देता है. आंख लप्प से बाहर आ जाती है. सारे कस्टमर सिर परपैर रखकर भाग जाते हैं. इस तरह जेनिफर बरबाद हो जाती है लेकिन अमन का टारगेट को उसेबरबाद करना नहीं, उसकी बेटी को खतम करना है. पूरी फिल्म इसी कॉनफ्लिक्ट पर है किउसका 'कतल हो कि न हो.'फेमस सीन- वो जब नैना फूल लेकर अमन के घर आती है. लाल गुलाब देखकर अमन का मूड मर्डरकरने का बन ही रहा होता है कि बाहर बारिश होने लगती है. नैना छत पर कपड़े फैले होनेका बहाना करके भाग जाती है. लेकिन अमन का मूड तो बन चुका होता है. इसलिए वो अपने हीघरकिसने बना दी हथोड़ीइस लव स्टोरी में लड़का-लड़की सीरियल किलर हैंमुख्य कलाकार- शाहरुख खान, अनुष्का शर्मा निर्देशक- अनुराग कश्यपकहानी- लव स्टोरी है साफ सुथरी. इसमें लड़का-लड़की दोनों सीरियल किलर हैं. दोनों एकदूसरे से प्यार करते हैं लेकिन तानी(अनुष्का) को सुरिंदर(शाहरुख) के मर्डर करने कास्टाइल पसंद नहीं है. तानी का तरीका बहुत साफ सुथरा है. लैपटॉप की केबल से गलाघोंटना उसका फेवरेट है. क्योंकि इसमें कोई खून खच्चर नहीं होता. लेकिन सुरिंदर कोहथोड़ी से सिर पर मार मारकर जान लेने की आदत है. जिसकी वजह से कई लीटर खून फर्श परफैल जाता है. कई बार जहां सुबूत मिटाने की रिक्वायरमेंट होती है वहां ब्लड साफ करनेमें तीन से चार घंटे लग जाते हैं. तानी का सवाल यही है- किसने बना दी हथोड़ी.सुरिंदर को ये बात पता लगती है तो वो एक प्रोफेशनल किलर बॉबी(विनय पाठक) सेट्रेनिंग लेने जाता है. वहां रुमाल से गला घोंटने, जहर का इंजेक्शन देने जैसे साफसुथरे तरीके सीखता है. फिर एक दिन वो तानी के सामने अपने शिकार का गला चमड़े कीबेल्ट से दबा रहा होता है, शिकार की आंखें और जीभ बाहर होती हैं लेकिन तानी कोअच्छा नहीं लगता. उसे लगता है कि सुरिंदर का ओरिजनल तरीका ही हॉट था. उसेसॉफिस्टिकेटेड सुरिंदर पसंद नहीं आता. वो उसकी हथोड़ी वापस लाकर देती है और वादालेती है कि अब वो हथोड़ी से ही मर्डर करेगा.फेमस सीन- जब सुरिंदर बॉबी के पास जाकर अपनी राम कहानी सुनाता है. दोनों दारू केनशे में टुन्न हो जाते हैं. बॉबी उसे एकदम सफाई से मर्डर करने वाला दांव सिखाता है.कि शिकार के बैठने से पहले सोफे पर एक इंजेक्शन इंस्टॉल करना है. जिसके अंदर ब्लैकमाम्बा का जहर रहेगा. सुरिंदर वहीं बॉबी की खोली पर ये ट्राई करता है. लेकिन शराबके नशे में सोफे पर बॉबी को ही धक्का दे देता है. इस तरह सबको मारने वाला बॉबी खुदमारा जाता है.ठोंक देदेशभक्त हॉकी कोच कबीर खान विरोधी टीम के खिलाड़ियों का गेम बजाता हैमुख्य कलाकार- शाहरुख खान और 16 लोग. हां पता है फील्ड पर 11 खिलाड़ी ही होते हैं.निर्देशक- अनुराग कश्यपकहानी- कबीर खान(शाहरुख) एक देशभक्त हॉकी कोच है. लेकिन उसके खेल का तरीका एकदम अलगहै. वो हॉकी के लिए ऐसी तैयारी कराता है जिसकी जानकारी दुनिया में किसी को नहीं है.वो दरअसल प्लेयर्स को गोल करना नहीं, विरोधी टीम के खिलाड़ी को गोली मारना सिखाताहै. अपने देश को जिताने का उसका यही प्लान है. उसके प्लेयर्स की हर हॉकी स्टिक मेंगन होती है. उस गन से जो गोली निकलती है वो सबसे कामयाब खिलाड़ी को निशाना बनातीहै. उधर माथे के बीच में टक्क से गोली लगती है. बाकी प्लेयर्स शोर मचाते हुए भगदड़कर देते हैं. जिसकी वजह से कभी पता नहीं लगता कि गोली कहां से लगी, कैसे लगी. कबीरखान खुद बहुत बड़ा निसांची है. वो हॉकी के खेल में एक बार हार गया था तो उसने हॉकीस्टिक का खेल ही बदल दिया. वो तमाम नेशनल टीम्स के बेहतरीन प्लेयर्स को टपका डालताहै. इस तरह फिल्म के क्लाइमेक्स में वो अपनी टीम को जीत दिलाने में कामयाब होता है.लेकिन लास्ट में वो पकड़ जाता है. फिर पता चलता है कि वो तो पाकिस्तानी एजेंट था.सिर्फ भारत को बदनाम करने के लिए कोच बना था. इन मर्डर्स के बाद इंडिया की टीमब्लैक लिस्ट हो जानी थी. लेकिन इस किलर के पकड़े जाने की वजह से पाकिस्तान का सपनाटूट जाता है. फेमस सीन- जब इंडियन वीमेन हॉकी टीम के कोच के तौर पर कबीर खान ज्वाइनकरता है. वहां होता है सारे प्लेयर्स का इंट्रोडक्शन. वहां कबीर खान सारे प्लेयर्ससे पूछता है कि विरोधी टीम को कैसे हराना है? कोई बताती है कि गोल करके, कोई बतातीहै कि ब्लॉक करके, कोई बताती है दौड़ाकर. कोच सबको निकाल बाहर करता है. इस चोंचलेसे इरीटेट एक विद्या नाम की प्लेयर अपनी हॉकी स्टिक से वहीं मैदान में झाड़ू माररहे आदमी का पीट पीटकर मर्डर कर देती है. कबीर खान चट से उसे टीम में ले लेता है.मिल वाले दुकनिया ले जाएंगेझारखंड के एक मोटर मेकेनिक की कहानीमुख्य कलाकार- शाहरुख खान, काजोल, अमरीश पुरी निर्देशक- अनुराग कश्यपकहानी- इस फिल्म की कहानी झारखंड की पृष्ठभूमि पर है. ई त नमवै से लउक रहा है. राजमल्होत्रा(शाहरुख) और सिमरन(काजोल) धनबाद में रहते हैं. सिमरन के पापा बलदेव(अमरीशपुरी) कोयला खदान में बाबू हैं. राज मल्होत्रा की धनबाद में ही मोटर साइकिल स्पेयरपार्ट्स की दुकान है. एक दिन एक बाइक रिपेयर करके राज उसकी टेस्टिंग करने फर्राटेसे रोड पर निकलता है. कस्टमर का पेट्रोल ज्यादा फूंकने की नीयत से कोयला खदानों तकनिकल जाता है. जिस कोयला खदान में सिमरन के पापा बाबू हैं, वहां एक मजदूर से उसकीलड़ाई हो जाती है. राज उस मजदूर को मार रिंच-मार पाना जान ले लेता है. बलदेव सिंहराज को फावड़ा लेकर दौड़ा लेता है, लेकिन पकड़ नहीं पाता. सिमरन को राज की ये अदाअंदर तक काट देती है. वो फैसला करती है कि शादी करेगी तो इसी मोटर मिस्त्री से,वरना नहीं करेगी. लेकिन बलदेव की आंख में वो रिंच पाने वाला खिलाड़ी चुभ गया है.उसे धनबाद से हटाने के लिए बलदेव रांची के नामी बिजनेसमैन को अपने घर बुलाता है.उसे धनबाद का वो एरिया दिखाता है जहां राज की स्पेयर पार्ट्स की दुकान है. और उसेवहां बड़ी सी सरिया मिल लगाने का ऑफर देता है. लोहा पिघलाने के लिए जितने कोयले कीजरूरत होगी, वो बलदेव की खान से आएगा. सस्ते में. बिजनेसमैन मान जाता है और बड़ी सीजेसीबी मशीन लाकर वहां की सारी दुकानें साफ कर देता है. वो स्पेयर पार्ट्स वाली भी.राज का बाप(अनुपम खेर) जेसीबी के आगे लेट जाता है तो मशीन वाला उसे काटकर दो टुकड़ेकर देता है. ये सब देखते हुए बलदेव सिंह राज को चिढ़ाता है "मिल वाले दुकनिया लेजाएंगे." फेमस सीन- इस फिल्म का क्लाइमेक्स सबसे खास है. जिसमें बलदेव सिंह सिमरनका हाथ पकड़कर जेसीबी की तरफ धकेलता है और कहता है "जा सिमरन जा, सीख ले फिरी मेंमशीन चलाना."--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:क्या अनुराग कश्यप खुद श्रवण सिंह उर्फ़ मुक्काबाज़ हैं?जिस 'मुक्काबाज़' को अनुराग की वापसी वाली फिल्म बताया गया, उसने कितना कमायामुक्काबाज़ के ऐक्टर विनीत सिंह ने इस इंटरव्यू में अपनी पूरी ज़िन्दगी उघाड़ कर रख दीफ़िल्म रिव्यू - मुक्काबाज़ : देशप्रेम में लोटती अनुराग कश्यप की फ़िल्मवीडियो: