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भारतीय दूतावास विवेक अग्निहोत्री की फ़िल्म का प्रचार कर रहा है?

विवेक ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें बच्चे कह रहे हैं कि उन्हें फ़िल्म पसंद आई है. लेकिन एक पत्रकार ने लिखा कि ये बच्चे फिल्म की “फ्री स्क्रीनिंग” में गए थे. आरोप लगाया कि लंदन में भारत की एंबेसी फ़िल्म का प्रचार कर रही है.

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1 अक्तूबर 2023 (अपडेटेड: 1 अक्तूबर 2023, 07:24 PM IST)
Vivek Agnihotri Vaccine War promotion.,
तस्वीर में विवेक अग्निहोत्री, उनकी पिक्चर का पोस्टर और पत्रकार का ट्वीट (इंडिया टुडे/सोशल मीडिया)
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विवेक रंजन अग्निहोत्री की फ़िल्म 'दी वैक्सीन वॉर' (The Vaccine War) सिनेमाघरों में आ चुकी है. देखी जा रही है. कुछ हल्कों में पसंद की जा रही है, कुछ में आलोचना हो रही है. इस बीच विवेक ने फ़िल्म के पोस्ट-प्रमोशन के सिलसिले में एक वीडियो पोस्ट किया. फ़िल्म देख कर निकले बच्चों का वीडियो. बच्चे कह रहे हैं कि उन्हें फ़िल्म पसंद आई है. नारे लगा रहे हैं. मगर इस जश्न के बीच एक पत्रकार ने लिखा कि ये बच्चे फिल्म की “फ्री स्क्रीनिंग” में गए थे. आरोप लगाया कि लंदन में भारत की एंबेसी फ़िल्म का प्रचार कर रही है.

ये भी पढ़ें - 'वैक्सीन वॉर' की तीसरे दिन की कमाई कितनी?

दी लल्लनटॉप के लिए हमारे साथी अनुभव ने इस फ़िल्म का रिव्यू किया था, वो आप यहां पढ़ सकते हैं - मूवी रिव्यू: द वैक्सीन वॉर.

रिव्यू करने वाले तो पेशेवर हैं. उनका काम ही फ़िल्मों-सिरीज़ों की विवेचना करना है. लेकिन आम जनता के रिव्यू से ही फ़िल्म हिट, फ़्लॉप या यादगार बनती है. सो विवेक ने 1 अक्टूबर को X (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें बच्चे फ़िल्म के बारे में बता रहे हैं. वीडियो के साथ विवेक ने लिखा,

"बच्चे #TheVaccineWar #ATrueStory को पसंद कर रहे हैं. इसे अपने परिवार को दिखाएं और प्रेरित महसूस करें."

अब इस पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए पत्रकार पूनम जोशी ने बताया कि बच्चे ख़ुद-ब-ख़ुद पिक्चर नहीं देख रहे. बल्कि उन्हें जुटाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाते हुए लिखा,

“अब तो सच बोल दीजिए, विवेक. ये बच्चे रिलीज़ के बाद आपकी फिल्म देखने नहीं गए. अमेरिका और ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोगों और डिस्ट्रीब्यूटर्स की मदद से मुफ़्त स्क्रीनिंग में गए थे. मैं ये देखकर हैरान रह गई कि लंदन में भारतीय उच्चायोग ने इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग रखी. उन्हें आलाकमान से निर्देश दिए गए होंगे, इसलिए सत्ताधारी पार्टी भाजपा का प्रचार कर रहे हैं. भाजपा के समूहों को न्योता मिला था और वही कैमरे पर तारीफ़ कर रहे हैं.”

आगे पूनम ने फ़िल्म को झूठ से भरपूर बताते हुए लिखा कि जो लोग दावा रहे हैं कि अगर भारत ने वैक्सीन नहीं बनाई होती, तो वे जीवित नहीं होते. इससे पता चलता है कि उन्होंने शायद फ़िल्म भी नहीं देखी क्योंकि भारत की वैक्सीन को बहुत सारे कारणों से मंज़ूरी नहीं मिली थी.

इन आरोपों पर विवेक अग्निहोत्री का जवाब नहीं आया है. जवाब आते ही हम आपको वो भी बताएंगे.

फ़िल्म है किस बारे में? फ़िल्म ICMR (Indian Council of Medical Research) के डायरेक्टर जनरल रहे बलराम भार्गव की किताब 'गोइंग वायरल' पर आधारित है. बलराम भार्गव का किरदार ही प्रमुख किरदार है. कुछ भारतीय डॉक्टर और वैज्ञानिक हैं, जो हमारे देश में वैक्सीन बना रहे हैं. उनके सामने कई तरह की मुश्किलें हैं. उनसे कहा जाता है कि वो वैक्सीन नहीं बना पाएंगे. लेकिन उनका प्रण है कि प्रभावी वैक्सीन बनाएंगे, वो भी कम समय में. मगर फ़िल्म का मुख्य विलेन वायरस नहीं है, बल्कि वो न्यूज़ चैनल या पोर्टल हैं, जो भारतीय वैज्ञानिकों की क़ाबिलियत पर शक करते हैं. नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करते हैं.

ये भी पढ़ें - द वैक्सीन वॉर के ट्रेलर में ही दिख गया था असली ‘मक़सद’? 

अगर आपने फ़िल्म देख ली है, तो बताइए कैसी लगी.

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