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साल 2018 के 5 बड़े नाम जिनके इस्तीफे ने चौंका दिया सबको

साल 2018 के दौरान ऐसे कौन से लोग रहे जिनके पद छोड़ने पर बवंडर मच गया.

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31 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 30 दिसंबर 2018, 04:28 AM IST)
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साल 2018 के दौरान आईसीआईसी बैंक की सीईओ चंदा कोचर, विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर और आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल के इस्तीफे चर्चा में रहे. सांकेतिक तस्वीर.
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भाई रे गंगा और जमुना की गहरी है धार आगे या पीछे, सबको जाना है पार... धरती कहे पुकार के, बीज बिछा ले प्यार के मौसम बीता जाए, मौसम बीता जाए... अपनी कहानी छोड़ जा कुछ तो निशानी छोड़ जा... कौन कहे इस ओर तू फिर आए न आए...



वक्त की शिला पर कुछ लोग निशान छोड़ ही जाते हैं. चाहे-अनचाहे उनके काम-कारनामे दुनिया को भौंचक कर जाते हैं. तमाम लोग हमें-आपको एक उम्मीद-एक दिशा दिखाते हैं, तो कई ऐसे भी होते हैं, जिनको हम भूल जाना चाहते हैं. हमारी आपकी यादों से ऐसे लोग भले ओझल हो जाएं, लेकिन तारीख पर दर्ज तहरीर को मिटाना आसान नहीं होता. साल-2018 में भी कुछ ऐसे लोग हुए, जिन्होंने जाने-अनजाने अपने नाम समय की दीवारों पर दर्ज करा दिए. इन लोगों को अपने पद छोड़ने पड़े. इस्तीफे देने पड़े. मगर इबारत अभी धुंधली पड़ी है, मिटी नहीं. आइए जानते हैं कौन थे वो पांच लोग, जिनके इस्तीफों पर अक्सर बहसें होती हैं.

चंदा कोचर
आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ रहीं चंदा कोचर. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ रहीं चंदा कोचर. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.

साल 2018 में आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ और प्रबंध निदेशक चंदा कोचर को इस्तीफा देना पड़ा. उन पर मार्च 2018 में एक आरोप लगा. इसमें कहा गया कि उन्होंने अपने पति दीपक कोचर को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया. आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन समूह की पांच कंपनियों को अप्रैल 2012 में 3,250 करोड़ रुपए का लोन दिया. वी़डियोकॉन समूह ने इस लोन में से 86% यानी 2,810 करोड़ रुपए नहीं चुकाए. साल 2017 में ये लोन एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग असेट्स हो गया. आरोप लगे कि वीडियोकॉन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के साथ व्यापारिक संबंध थे. वीडियोकॉन ग्रुप की मदद से बनी एक कंपनी बाद में चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की अगुवाई वाली पिनैकल एनर्जी ट्रस्ट के नाम कर दी गई. धूत ने दीपक कोचर की सह स्वामित्व वाली इसी कंपनी के ज़रिए लोन का एक बड़ा हिस्सा स्थानांतरित किया था. 94.99 फ़ीसदी होल्डिंग वाले ये शेयर्स महज 9 लाख रुपए में ट्रांसफ़र कर दिए गए. विवाद सामने आने के बाद पहले उन्हें काम करने से रोक दिया गया. बाद में अक्टूबर 2018 में उन्होंने अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. चंदा कोचर का नाम भले गलत वजहों से चर्चा में हो. मगर का एक मैनेजमेंट ट्रेनी से बैंक के सीईओ बनने तक का सफर शानदार रहा. चंदा कोचर की मेहनत और लगन की मिसाल दी जाती है. उन्होंने भारत के बैंकिंग सेक्टर में पुरुषों के रसूख को तोड़ा. फोर्ब्स मैग्जीन ने 'दुनिया की सबसे ताकतवर महिलाओं' की सूची में शुमार किया. उर्जित पटेल
रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे उर्जित पटेल. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे उर्जित पटेल. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.

मोदी सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के बीच टकराव की वजह से 10 दिसंबर को बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया. नोटबंदी से ठीक दो महीने पहले 4 सितंबर, 2016 को पटेल ने रिजर्व बैंक की कमान संभाली थी. उनका कार्यकाल सितंबर, 2019 तक था. रिज़र्व बैंक की स्वायत्तता को लेकर उनका सरकार से टकराव शुरू हुआ. पटेल रिज़र्व बैंक में ज्यादा सरकारी दखल के खिलाफ थे. एक रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार रिजर्व बैंक के खजाने से कुछ अंश मांग रही थी. सरकार और आरबीआई के बीच गैर बैंकिंग कंपनियों को लेकर भी टकराव था. गैर बैंकिंग कंपनियां भी लघु, मध्यम और छोटे कारोबारियों समेत आम आदमी को लोन देती हैं. मगर रिज़र्व बैंक की सख्ती की वजह से इन दिनों वे कैश के संकट से जूझ रही हैं. केंद्र सरकार का दबाव था कि आरबीआई इन कंपनियों पर ज्यादा सख्ती न करे. विवाद में आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 के इस्तेमाल की भी बात सामने आई थी. इस सेक्शन के तहत केंद्र सरकार जनहित में मुद्दों पर आरबीआई को फरमान देने का काम कर सकती है. पटेल इन सबका विरोध करते रहे. आखिर उनको पद छोड़ना पड़ा. बहरहाल पटेल आर्थिक मामलों के अच्छे जानकार माने जाते हैं. उनके दौर में देश में कई मील के पत्थर लगे. पटेल 6 साल डिप्टी गवर्नर थे. फिर गवर्नर के कार्यकाल के वक्त 6 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का ऐलान हुआ. साल 1998 से 2001 तक भारत सरकार के ऊर्जा और आर्थिक मामले विभाग में सलाहकार रहे. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में 1990 से 1995 तक रहे. साल 1990 में अर्थशास्त्र में येल युनिवर्सिटी से पीएचडी की. 1986 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एम फिल किया.
एमजे अकबर
एमजे अकबर. फाइल फोटो.
एमजे अकबर. फाइल फोटो.

अमेरिका से शुरू होकर भारत पहुंचे मी टू मूवमेंट ने विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर को अपनी चपेट में ले लिया. मी टू कैंपेन के तहत महिलाएं वर्कप्लेस पर अपने साथ हुए यौन शोषण का खुलासा करती रही हैं. इसी के तहत अकबर पर करीब 20 महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए. इस पर अकबर को इस्तीफा देना पड़ा. उन पर पहला आरोप प्रिया रमानी नाम की पत्रकार ने लगाया. फिर उन पर एक के बाद एक कई महिलाओं ने यौन शोषण करने के आरोप लगाए. ज्यादातर मामले 10 से 15 साल पुराने थे. उस वक्त अकबर पत्रकारिता जगत से जुड़े थे. अकबर 11 जनवरी 1951 को पैदा हुए थे. उनका पूरा नाम मुबशर जावेद अकबर है. एक रिपोर्ट के मुताबिक उनके दादा रहमतुल्‍ला धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने थे. वो हिंदू थे, लेकिन उनकी शादी मुस्लिम महिला से हुई थी. अकबर की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई कोलकाता बॉयज स्‍कूल में हुई. इसके बाद वे प्रेसीडेंसी कॉलेज में पढ़े. एमजे अकबर दुनिया के नामचीन पत्रकारों में शुमार रहे हैं. वो द टेलिग्राफ के संस्थापकों में शामिल रहे हैं. आज भले ही एमजे अकबर बीजेपी में हों, लेकिन कभी कांग्रेस में उनकी अच्छी-खासी पैठ थी. खासकर राजीव गांधी से अच्छी नजदीकी थी. वो उनके प्रवक्ता थे. साल 1989 में उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया से सियासत में कदम रखा और बिहार के किशनगंज से कांग्रेस के सांसद बने. राजीव गांधी की हत्या के बाद साल 1992 में वे कांग्रेस छोड़कर पत्रकारिता में फिर लौट आए. बाद में अकबर की बीजेपी के शीर्ष नेताओं से नजदीकी हो गई. इस पर उनको 5 जुलाई 2016 को मोदी सरकार में विदेश राज्यमंत्री बनाया गया. इससे पहले उन्हें झारखंड से राज्यसभा सदस्य बनाया गया. दोबारा मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बने. इंदिरा नूई
 
इंडिरा नूई. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
इंडिरा नूई. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.

इस साल पेप्सिको की सीईओ इंदिरा नूई ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया. दुनिया की ताकतवर महिलाओं में उनका नाम शामिल रहा है. साल 2015 की फॉर्चून मैग्जीन की लिस्ट में उनको दुनिया की दूसरी सबसे शक्तिशाली महिला का खिताब मिला था. भारतीय मूल की इंदिरा नूई 12 साल से पेप्सिको की चीफ थीं. इंदिरा नूई व्यापार जगत में शीर्ष पर पहुंचने वाली चुनिंदा महिलाओं में हैं. नूई 24 साल से पेप्सी के साथ थीं. साल 2006 में इंदिरा नूई के कमान संभालने के बाद से पेप्सिको के शेयर में 78 फ़ीसदी तक इजाफा हुआ. इंदिरा चेन्नई में पैदा हुईं. और उनकी पढ़ाई-लिखाई भी वहीं हुई. बाद में कोलकाता आईआईएम से मैनेजमेंट की पढ़ाई की. इंदिरा ने अपने करियर की शुरुआत भारत से ही की. कुछ साल काम करने के बाद वे अमेरिका चली गईं. फिर येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में पढ़ाई की. कई कंपनियों में काम करने के बाद 1994 में इंदिरा ने पेप्सिको ज्वाइन की. 38 साल की उम्र में उन्होंने पेप्सिको में अपनी शुरुआत हेड ऑफ लांग टर्म पॉलिसी यानी लंबी अवधि की नीतियां बनाने की प्रमुख के तौर पर की. साल 2004 में कंपनी ने उनको सीएफओ और साल 2006 में सीईओ बना दिया. इंदिरा पेप्सिको की अगुवाई करने वाली पहली महिला बनीं. साल 2007 में उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण सम्मान दिया. इंदिरा नूई शाकाहारी हैं और अपने दफ्तर में गणेश भगवान की मूर्ति रखती थीं. इंदिरा को संगीत का शौक है और दफ्तर में वो अक्सर ऊंची आवाज़ में गुनगुनाती हुई दिखाई देती हैं. उनके पसंदीदा संगीत में बीटल्स भी हैं. इंदिरा की बहन चंद्रिका टंडन को साल 2001 में ग्रैमी अवार्ड के लिए नामांकन मिल चुका है.
अरविंद सुब्रमण्यन
अरविंद सुब्रमण्यन. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
अरविंद सुब्रमण्यन. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यन ने जुलाई, 2018 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. सुब्रमण्यन ने इस्तीफे की वजह निजी कारण बताए थे. मगर माना जाता है कि मोदी सरकार के साथ टकराव के चलते ही उन्होंने अपना पद छो़ड़ा था. रिजर्व बैंक और सरकार के बीच टकराव को लेकर उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधा था. सरकार के जीएसटी लागू करने के फ़ैसले को उन्होंने सही नहीं ठहराया था. उन्होंने कहा था, जिस तरह से टैक्स रेट तय किए गए हैं, वो चलेंगे नहीं. आम आदमी के इस्तेमाल की वस्तुओं को 28 फ़ीसदी टैक्स रेट में रखने पर उन्होंने आपत्ति जताई थी. कुछ महीने बाद सरकार ने उनकी बात मानी और टैक्स रेट कम किए. नोटबंदी पर भी इनकी सहमति नहीं थी, पर वो खुलकर नहीं बोले. आर्थिक सर्वेक्षण में उन्होंने पिछले चार सालों में किसानों की आमदनी में कोई बढ़ोतरी नहीं होने की बात कही थी. उन्होंने निवेश पर भी नाखुशी जताई. अरविंद सुब्रमण्यन ने अक्टूबर, 2014 में मुख्य आर्थिटक सलाहकार का पद संभाला था. उनका कार्यकाल मई 2019 तक था. पर इससे पहले ही उनको जाना पड़ा. अरविंद आईआईएम अहमदाबाद के छात्र रह चुके हैं. सेंट स्टीफंस कालेज से ग्रेजुएट सुब्रमण्यन भारत सरकार को सलाह देते रहे हैं. वो जी-20 पर वित्त मंत्री के विशेषज्ञ समूह के सदस्य भी रहे हैं. सुब्रमण्यन ने कुछ समय अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) अर्थशास्त्री के पद पर भी काम किया है. मुख्य आर्थिक सलाहकार आम तौर पर फाइनेंस मिनिस्टर को मैक्रो इकोनॉमिक मामलों और छमाही विश्लेषण व इकोनॉमिक सर्वे सहित कई प्रमुख जिम्मेदारियों में सलाह देने का काम करते हैं.


 
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