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साल 2018 के वो 5 विज्ञापन, जिनको टीवी पर बार-बार देखने का मन करता है

जानिए उन एड के बारे में, जिनको इस साल बहुत पसंद किया गया.

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31 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 31 दिसंबर 2018, 01:08 PM IST)
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गूगल डुओ का विज्ञापन (बाएं). परजान दस्तूर (दाएं). जो अब बढ़ चुके हैं. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
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सिर्फ 60, 45 या 30 सेकेंड. कभी-कभी तो 15 सेंकेड ही. इन्हीं 15 सेंकेड में पूरा लम्हा जी लेते हैं लोग. या यूं कहें की एक पूरी लाइफ टीवी स्क्रीन पर लाइव हो जाती है. बचपन की छोटी-छोटी शरारतें हों या कॉलेज कैंटीन का कोई किस्सा या फिर आम दिनों का कोई खास इंसीडेंट. टीवी विज्ञापन आम जिंदगी के इन खास पलों को 15 सेंकेड में ही कह जाते हैं. और हम-आप पल भर के लिए उसमें डूब जाते हैं. और यही इनका मकसद भी होता है. स्टोरी टेलिंग के इस फॉरमेट में जबरदस्त अपील है. 15 सेंकेड के टीवी एड ही आपको एक नई-नवेली दुनिया की सैर कराते हैं. उनकी छाप हमारे जेहन में सालों के लिए पड़ जाती है. साल 2018 में भी ऐसे कई विज्ञापन आए, जो अपना असर छोड़ने में कामयाब रहे. जानिए साल के पांच विज्ञापनों के बारे में जो चर्चित रहे.
1- बिरला एयरोकोन पाइप्स एंड फिटिंग्स का 'नाम'
बिरला एयरोकोन पाइप्स एंड फिटिंग्स का विज्ञापन 'नाम'. स्क्रीनशॉट एड.
बिरला एयरोकोन पाइप्स एंड फिटिंग्स का विज्ञापन 'नाम'. स्क्रीनशॉट एड.

खास क्या है इसमेंः एड में शुरुआत में एक सस्पेंस क्रिएट होता है. मेल कैरेक्टर सुखी प्रसाद शर्मा जो एक प्लंबर है. घर से काम पर निकलने की तैयारी में है. तभी उसकी मां पीछे से आवाज लगाती है, ऐ सुखी..? सुखी मन ही मन बुदबुदाता है, आज सुखी नहीं मुखी. फिर वो काम के लिए निकल जाता है. बच्चे को साइकिल में बिठाए शाम को घर वापस आता है. उसकी मां फिर पूछती है, आ गया बेटा मुखी? इस पर फिर सुखी जवाब देता है, मुखी नहीं बिरजू. अगले सीन में सुखी अपने बेटे को साइकिल में बिठाकर स्कूल छोड़ने जा रहा है. पड़ोस की दुकान में उसका बेटा कुछ सामान लेने के लिए रुकता है. इस पर दुकानदार उसके बेटे से पूछता है, बेटा आज पापा का नाम बताओ? इस पर बच्चा बताता है नत्थू. साथ ही सुखी भी बोल पड़ता है, घनश्याम. इस तरह सुखी के नाम को लेकर कन्फ्यूजन क्रिएट होता है. आखिर में पता चलता है कि ऐसा क्यों चल रहा होता है. क्रक्स ये है कि सुखी उस कहावत को फॉलो करता है, जिसमें हम-आप कहते हैं- "नाम बदल लेंगे." मतलब ये कि अगर मैं किया गया वादा पूरा न कर पाया तो नाम अपना नाम बदल लूंगा. प्लंबर सुखी पाइप रिपेयर करने जाता है. सुखी प्लंबर है. वो पाइप की मरम्मत करता है, मगर उसका लीकेज बंद नहीं होता है. इस पर उसे रोज़-रोज़ अपना नाम बदलना पड़ता है. आखिर में उसे मिलते हैं, बिरला एयरोकोन पाइप्स एंड फिटिंग्स.
इस लिस्ट में क्यों है? जिस भोलेपन से सुखी अपना नाम बदलता रहता है, उससे दर्शकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ती जाती है. ये एड बहुत ही एक्सप्रेसिव है. कॉपी राइटर ने कहावत 'नाम बदल देना' को बड़ी चालाकी से यूज किया है. आखिर में आपको पता चलता है कि वो नाम क्यों बदल रहा था.
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2-व्हाट्स इन अ नेम? यानी नाम में क्या रखा है?
स्विगी का विज्ञापन व्हाट्स इन अ नेम? यानी नाम में क्या रखा है?. स्क्रीनशॉट.
स्विगी का विज्ञापन व्हाट्स इन अ नेम? यानी नाम में क्या रखा है?. स्क्रीनशॉट.

खास क्या है इसमेंः स्विगी के इस एड ने 2018 में खूब सुर्खियां बटोरीं. इसमें भी नाम की इंपॉर्टेंस बताई गई है. एड की शुरुआत ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के ऑफिस से होती है. एक रूम में सरकारी बाबू जैसा कर्मचारी बैठा है. उसके पास एक प्यून है. उसके रूम के बाहर लाइसेंस बनवाने वालों की भीड़ है. प्यून नाम पुकारता है-स्विगी? स्विगी कौन है? स्विगी कौन है? इस पर भीड़ में से एक लड़का हाथ खड़ा करता है. डरते-डरते सामने आता है. इस पर लाइसेंस बना रहा क्लर्क पूछता है- लाइसेंस नहीं चाहिए आपको, आइए? इसके साथ ही बैकग्राउंड से आवाज आती है. अपना ही नाम सुनकर पीछे हटने वाले इन जनाब का किस्सा 23 साल पहले शुरू हुआ. जब वे पैदा हुए थे. उसी वक्त इनके माता-पिता ने इनका नाम स्विगी रख दिया था. थोड़ा समझदार होने पर स्विगी को अपने ही नाम से चिढ़ होने लगती है. विज्ञापन के अंत में दिखता है स्विगी फूड की डिलीवरी लेकर एक घर पहुंचता है. एक लेडी घर का दरवाजा खोलती हैं. दरवाजा खोलते ही वो सवालिया अंदाज में पूछती हैं- स्विगी? डिलीवरी ब्वॉय ये सवाल सुनकर फिर से दुखी हो जाता है. इसी बीच डिलीवरी ब्वॉय उन महिला से नाम पूछ लेता. महिला अपना नाम बताती हैं. फिर बैकग्राउंड में अवाज गूंजती है. हमारे डिलीवरी पार्टनर के भी नाम होते हैं. अब से जब आपके पास आएं तो उनको नाम लेकर बुलाएं. और फिर स्विगी के बारे में बताया जाता है.
इस लिस्ट में क्यों है? आमतौर पर इस तरह की सप्लाई आदि करने वालों को उनके काम से बुलाया जाता है. जैसे दूधवाला, सब्जीवाला, प्लंबर, बिजली मिस्त्री. इस एड में ये बताते हैं कि हर किसी का कोई न कोई नाम है. उसे उसके नाम से पुकारें तो सामने वाले को अच्छा लगता है.
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3-उबर ईट्स, द फ्लैटमेट्स. बैक टु द नाइंटीज
उबर ईट्स, द फ्लैटमेट्स. बैक टु द नाइंटीज का विज्ञापन.
उबर ईट्स, द फ्लैटमेट्स. बैक टु द नाइंटीज का विज्ञापन.

खास क्या है इसमेंः ये एड आपको नाइंटीज के दिनों में लेकर जाता है. और इसका जरिया बने हैं एक्टर परजान दस्तूर. परजान को सालों पहले 'धारा' के विज्ञापन में देखा गया था. उसके बाद करन जौहर की फिल्म 'कुछ-कुछ होता है' में मूक बच्चे का रोल प्ले किया था. वो बच्चा अब बड़ा हो गया है. इसी के जरिेए उबर ने उस दौर से कनेक्ट करने की कोशिश की है. एड की शुरुआत में परजान बिल्डिंग से निकलते दिखते हैं. तभी सिक्योरिटी गार्ड उनसे पूछता है. सर, कहां जा रहे हैं आप? इस पर परजान कहते हैं मैं घर छोड़कर जा रहा हूं. मेरी फ्लैटमेट्स यानी उनके साथ में फ्लैट में रहने वाले दोस्तों से उनकी पट नहीं रही है. गार्ड उनको बताता है कि ऊपर तुम्हारे दोस्तों ने ऊबर ईट्स से बिरयानी ऑर्डर की है. इस बात पर परजान लौटकर फ्लैट पहुंच जाते हैं. और दोस्तों की बिरयानी पार्टी में शरीक हो जाते हैं. और फिर घर छोड़कर जाने का इरादा बदल देते हैं.
इस लिस्ट में क्यों है? परजान को देखना बहुत सारे लोगों की आंखों को सुकून देता है. जिन लोगों ने उनको चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर देखा है. वे उनसे तुरंत कनेक्ट करते हैं.
ये विज्ञापन यहां देखें: 4-"सही बोलो!" बी देयर फ्रॉम एनीवेयर, विद डुओ
गूगल डुओ का एड"सही बोलो!" बी देयर फ्रॉम एनीवेयर, विद डुओ. स्क्रीनशॉट.
गूगल डुओ का एड"सही बोलो!" बी देयर फ्रॉम एनीवेयर, विद डुओ. स्क्रीनशॉट.

खास क्या है इसमेंः गूगल डुओ के इस विज्ञापन की शुरुआत एक लेडी के एक डायलॉग से होती है. वो सब्जी विक्रेता को डांटती नजर आती हैं. ठीक वैसे ही जैसे आम भारतीय महिलाएं दुकानदारों से मोल-भाव करती हैं. उनका बेटा सब्जी वाले के ठेले के पास खड़ा है. और ये लेडी उस दुकानदार को फटकारते हुए कहती हैं, लूट मची है क्या? बच्चा समझ के कुछ भी रेट लगाओगे. सही बोलो. सब्जी वाला कहता है, चलो 35, तो महिला कहती हैं 30. फिर सब्जीवाला कहता है अच्छा ले लो. और कुछ चाहिए? महिला 'नहीं-नहीं' कहते हुए इनकार करती हैं. इसी बीच में सब्जी वाला डरते हुए अपने तराजू में जल्दी-जल्दी टमाटर रखता है. अगले सीन में वो लड़का मोबाइल दिखाता है. इसमें वो लेडी 'लाइव' दिखती हैं, मोलभाव करती हुई. मतलब ये कि ये सारा मोलभाव मोबाइल की वीडियो कॉलिंग के जरिए चल रहा था. फिर गूगल अपने डुओ के बारे में बात करता है.
क्यों है इस लिस्ट में? टिपिकल मिडिल क्लास फैमिली वाली फीलिंग आती है, इस एड को देखकर. जिस तरह से महिलाएं एक-एक रुपए के लिए दुकानदारों से झगड़ा करती हैं. बस वैसा ही लगता है.
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5-"जब भी दिल करे"
जोमैटो के विज्ञापन ने भी लोगों को खूब लुभाया. फोटो. सक्रीनशॉट एड.
जोमैटो के विज्ञापन ने भी लोगों को खूब लुभाया. फोटो. सक्रीनशॉट एड.

 
खास क्या है इसमेंः इस सीरीज में पांचवें नंबर पर है जोमैटो का एड 'जब भी दिल करे'. ऑफिस में सेल्स और टारगेट पर प्रेजेंटेशन चल रहा है. प्रोजेक्टर के जरिए एक सीनियर अपने जूनियर्स को सेल्स बढ़ाने के फॉर्मूले बता रहे हैं. वो कहते हैं, तो इस बार का टारगेट हमें मिस नहीं करना है. होप, यू ऑल रिमेंबर योर रोल. रोल का नाम सुनते ही एक इंप्लाई के मुंह में पानी आज जाता है. फिर बैकग्राउंड में गाना चलने लगता है. जब भी तेरा नाम लिया...दिल ने तुझे याद किया...तूने बेकरार किया...ये क्या किया. इसी दौरान बैठे-बैठे अपने स्मार्टफोन से जोमैटो को कुछ ऑर्डर करता है. अगले ही पल एक डिलीवरी मैन चिकन टिक्का रोल लेकर हाजिर हो जाता है. फिर सब मिलकर ऑफिस में ही पार्टी शुरू कर देते हैं.
क्यों है इस लिस्ट में? बहुत ही सिंपल तरीके से मैसेज दिया गया है. पूरे एड में सिर्फ एक सॉन्ग है, जो आपको अपने साथ अलग ही दुनिया में ले जाता है. सिर्फ एक ही लाइन में मैसेज पूरा हो जाता है.
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