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ममता बनर्जी की पार्टी में 'गयाराम' बढ़ते जा रहे हैं; कौन-कौन हैं ये, जान लीजिए

बंगाल चुनाव से पहले बीजेपी की सेंधमारी?

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बंगाल विधानसभा के इलेक्शन मई 2021 से पहले हो सकते हैं. लेकिन इससे पहले ही पार्टी के कई बड़े नेताओं की पार्टी से रवानगी हो रही है. हालांकि ये सिलसिला पिछले कई महीनों से चल रहा है.
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अमित
17 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 18 दिसंबर 2020, 11:01 AM IST)
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पश्चिम बंगाल सरकार के साथ वहां की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी इन दिनों भारी उथलपुथल से गुजर रही है. ममता बनर्जी सरकार का लगातार केंद्र की मोदी सरकार से टकराव चल रहा है. वहीं, पार्टी के लिए महत्वपूर्ण सांसद-विधायक पार्टी छोड़कर जा रहे हैं. और ये सब अगले कुछ ही महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हो रहा है. बंगाल में भगवा फहराने की जोरशोर से कोशिश कर रही बीजेपी इसे बड़े मौके की तरह देख रही है. आइए जानते हैं, कौन हैं वो बड़े नेता, जो टीएमसी छोड़कर जा चुके हैं, या जाने की तैयारी कर रहे हैं.
जितेंद्र तिवारी
ममता बनर्जी की पार्टी छोड़ने वालोंं में सबसे नया नाम यही है. आसनसोल से विधायक जितेंद्र तिवारी को तृणमूल कांग्रेस का फायरब्रांड नेता माना जाता है. वह आसनसोल के पूर्व मेयर भी रहे हैं. अपने गर्म मिजाज की वजह से चर्चा में रहते हैं. पिछले साल उनका पुलिसवालों को धमकाते हुए का एक वीडियो सामने आया था. इनका अपने क्षेत्र में काफी प्रभाव माना जाता है. उन्होंने 17 दिसंबर  गुरुवार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने की घोषणा कर दी.
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सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के काफी पॉपुलर नेता हैं. कभी ममता बनर्जी के काफी करीबी माने जाते थे. सुवेंदु मनमोहन सिंह की पूर्व सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे शिशिर अधिकारी के बेटे हैं. सुवेंदु अधिकारी कोंटाई से विधायक रहे हैं. उन्होंने सीपीआईएम के बड़े नेता लक्ष्मण सेठ को चुनाव में हराया था. बुधवार को सुवेंदु ने विधायक पद और गुरुवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया.
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Suvendu Adhikari

शीलभद्र दत्ता
ममता बनर्जी के एक और एमएलए शीलभद्र दत्ता ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया. उन्होने शुक्रवार को इस्तीफा दिया. यह इस्तीफा सुवेंदु अधिकारी और जितेंद्र तिवारी के बाद पार्टी के लिए बड़ा झटका है. शीलभद्र दत्ता बैरकपुर से त्रणमूल के टिकट पर विधायक चुने गए थे.
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Silbhadra Datta

 
मुकुल रॉय एक वक्त में ममता बनर्जी के राइट हैंड माने जाते थे. पिछली मनमोहन सिंह सरकार में रेल मंत्री का पद छोड़कर जब ममता बनर्जी वेस्ट बंगाल की सीएम बनीं, तब उन्होंने मुकुल रॉय को रेल मंत्री बनवाया. 2015 में उनका नाम सारदा स्कैम में आने के बाद ममता बनर्जी से उनके रिश्ते खट्टे होने शुरू हुए. मुकुल ने जब बीजेपी नेता अरुण जेटली और कैलाश विजयवर्गीय से मीटिंग की, तो ममता ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया. उन्होंने 2017 में पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए.
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Mukul Roy

शुभ्रांशु रॉय वेस्ट बंगाल के युवा नेता हैं शुभ्रांशु रॉय. दो बार एमएलए रह चुके हैं. 24 मई 2019 को शुभ्रांशु रॉय ने भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली. टीएमसी ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया. फिलहाल शुभ्रांशु बीजपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं.
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Shubhranshu roy

 
सब्यसाची दत्ता
सब्यसाची दत्ता 2015 से 2019 तक बिधाननगर के पहले मेयर रहे. वह फिलहाल राजरहाट न्यू टाउन विधानसभा सीट से विधायक हैं. उन्होंने 1 अक्टूबर 2019 को ममता की पार्टी छोड़कर तत्त्कालीन बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी जॉइन कर ली. 1 जून 2020 को बीजेपी ने इन्हें बंगाल का सचिव भी बना दिया.
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Sabyasachi Dutta

सुनील सिंह सुनील सिंह वेस्ट बंगाल की नोआपारा सीट से विधायक हैं. यह सीट उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीती थी. जून 2019 में इन्होंने बीजेपी जॉइन कर ली. तृणमूल कांग्रेस में आने से पहले वह कांग्रेस में थे.
 
इनके अलावा और कई नाम भी हैं सिर्फ यही नहीं ननीरुल इस्लाम, गदाधर हाजरा, अनुपम हाजरा, सौमित्र खान जैसे कई नेता हैं, जिन्होंने पिछले एक-दो सालों में तृणमूल कांग्रेस से किनारा करके बीजेपी का दामन थाम लिया है. इतना ही नहीं पार्टी में अभी कई और असंतुष्टों के पार्टी छोड़ने की चर्चा चल रही है, जिनमें दीप्तांशु चौधरी और राजीव बनर्जी जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं.

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