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जावेद अख्तर की ये बात सुनकर फिल्में बॉयकॉट करने वाले बौखला जाएंगे

दिग्गज राइटर जावेद अख्तर ने बॉयकॉट और कैंसिल कल्चर को 'पासिंग फेज़' करार दिया है. यानी एक ऐसा दौर, जो जल्द ही गुज़र जाएगा.

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पहली तरफ 'लाल सिंह चड्ढा' का पोस्टर. बीच में जावेद अख्तर. और आखिरी तस्वीर फिल्म 'लाइगर' से.
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श्वेतांक
1 सितंबर 2022 (Updated: 1 सितंबर 2022, 07:58 PM IST)
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फिल्म इंडस्ट्री के लिए बुरा समय चल रहा है. कई बड़ी फिल्में नहीं चल रही है. साउथ की फिल्में नॉर्थ इंडिया यानी हिंदी भाषी क्षेत्रों में बेहतर परफॉर्म कर रही हैं. हिंदी वाली फिल्मों को बॉयकॉट करने की मांग शुरू हो जा रही है. अलग-अलग वजहों से लोग फिल्म नहीं देख रहे हैं. नतीजतन कोई पिक्चर बॉक्स ऑफिस पर पैसे नहीं कमा पा रही. प्रोड्यूसर-डिस्ट्रिब्यूटर-एग्ज़ीबिटर चेन घाटे में चल रहे हैं. हालिया इंटरव्यू में दिग्गज राइटर जावेद अख्तर ने इस मसले पर बात की है. जावेद ने बॉयकॉट और कैंसिल कल्चर को 'पासिंग फेज़' करार दिया है. यानी एक ऐसा दौर, जो जल्द ही गुज़र जाएगा.

बॉयकॉट के ट्रेंड पर Etimes से बात करते हुए जावेद अख्तर कहते हैं-

''ये एक ऐसा दौर है, जो गुज़र जाने वाला है. ये भी काफी हद तक ज़ाहिर है कि ये चीज़ें काम नहीं करतीं. अगर फिल्म अच्छी है, तो ऑडियंस उसे सराहेगी. पिक्चरें चलेंगी. अगर वो अच्छी नहीं हैं, तो उसे तारीफ नहीं मिलेगी. और फिल्म नहीं चलेगी. मुझे नहीं लगता कि ये कैंसिल कल्चर या बॉयकॉट जैसी चीज़ें काम करती हैं.''

जावेद अख्तर इकलौते व्यक्ति नहीं हैं, जिन्होंने बॉयकॉट करने की मांग के खिलाफ बात की है. या उसे गलत बताया है. टाइम्स से बात करते हुए साउथ इंडिया के चर्चित डिस्ट्रिब्यूटर वारंगल श्रीनु ने भी हालिया इंटरव्यू में इसे गलत बताया है. श्रीनु ने कहा-

''एक अच्छी फिल्म को नहीं देखने का क्या मतलब है? क्या हमें ये अहसास हो रहा है कि अपने पूर्वाग्रहों के आधार पर एक्टर्स और फिल्ममेकर्स को बैन करने के चक्कर में हम गरीब क्रू सदस्यों के गरीब परिवारों को बर्बाद कर रहे हैं? इससे फिल्में बननी कम हो जाएंगी. और इससे वो परिवार परेशानी में पड़ जाएंगे, जो रोजी-रोटी के लिए फिल्मों पर निर्भर हैं.

फिल्म इंडस्ट्री बहुत बुरे दौर से गुज़र रही है. और जो भी सोशल मीडिया यूज़र इस गैर-ज़रूरी बैन कल्चर के सदस्य हैं, वो हावी हो गए हैं. हमें उन्हें नज़रअंदाज़ करने की ज़रूरत है. ऐसा लगता है रोज़-रोज़ हमारे खिलाफ सुनियोजित तरीके से अभियान चलाया जा रहा है. जो कि बिल्कुल अनावश्यक है. आप फिल्म देखिए. अगर आपको पसंद नहीं आती, तो उनकी आलोचना करिए. मगर फिल्म की रिलीज़ से पहले उसे देखने बिना आप कैसे उसकी आलोचना कर सकते हैं?''

वारंगल श्रीनु, 'कबाली', 'iस्मार्ट शंकर', 'नांधी' और 'क्रैक' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में डिस्ट्रिब्यूट कर चुके हैं. वही विजय देवरकोंडा की 'लाइगर' भी डिस्ट्रिब्यूट कर रहे थे. श्रीनु ने बताया कि 'लाइगर' पर उन्होंने जो पैसे इनवेस्ट किए थे, उस पर उन्हें 65 परसेंट नुकसान उठाना पड़ा है. फिल्म बिज़नेस के जानकारों का मानना है कि 'लाइगर' का लाइफटाइम कलेक्शन 40 करोड़ भी नहीं पहुंच पाएगा.

वीडियो देखें: फिल्म रिव्यू- लाइगर

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