जावेद अख्तर की ये बात सुनकर फिल्में बॉयकॉट करने वाले बौखला जाएंगे
दिग्गज राइटर जावेद अख्तर ने बॉयकॉट और कैंसिल कल्चर को 'पासिंग फेज़' करार दिया है. यानी एक ऐसा दौर, जो जल्द ही गुज़र जाएगा.

फिल्म इंडस्ट्री के लिए बुरा समय चल रहा है. कई बड़ी फिल्में नहीं चल रही है. साउथ की फिल्में नॉर्थ इंडिया यानी हिंदी भाषी क्षेत्रों में बेहतर परफॉर्म कर रही हैं. हिंदी वाली फिल्मों को बॉयकॉट करने की मांग शुरू हो जा रही है. अलग-अलग वजहों से लोग फिल्म नहीं देख रहे हैं. नतीजतन कोई पिक्चर बॉक्स ऑफिस पर पैसे नहीं कमा पा रही. प्रोड्यूसर-डिस्ट्रिब्यूटर-एग्ज़ीबिटर चेन घाटे में चल रहे हैं. हालिया इंटरव्यू में दिग्गज राइटर जावेद अख्तर ने इस मसले पर बात की है. जावेद ने बॉयकॉट और कैंसिल कल्चर को 'पासिंग फेज़' करार दिया है. यानी एक ऐसा दौर, जो जल्द ही गुज़र जाएगा.
बॉयकॉट के ट्रेंड पर Etimes से बात करते हुए जावेद अख्तर कहते हैं-
जावेद अख्तर इकलौते व्यक्ति नहीं हैं, जिन्होंने बॉयकॉट करने की मांग के खिलाफ बात की है. या उसे गलत बताया है. टाइम्स से बात करते हुए साउथ इंडिया के चर्चित डिस्ट्रिब्यूटर वारंगल श्रीनु ने भी हालिया इंटरव्यू में इसे गलत बताया है. श्रीनु ने कहा-
वारंगल श्रीनु, 'कबाली', 'iस्मार्ट शंकर', 'नांधी' और 'क्रैक' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में डिस्ट्रिब्यूट कर चुके हैं. वही विजय देवरकोंडा की 'लाइगर' भी डिस्ट्रिब्यूट कर रहे थे. श्रीनु ने बताया कि 'लाइगर' पर उन्होंने जो पैसे इनवेस्ट किए थे, उस पर उन्हें 65 परसेंट नुकसान उठाना पड़ा है. फिल्म बिज़नेस के जानकारों का मानना है कि 'लाइगर' का लाइफटाइम कलेक्शन 40 करोड़ भी नहीं पहुंच पाएगा.
वीडियो देखें: फिल्म रिव्यू- लाइगर

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