कहानी 'बैरण' गाने की, जिसे दो लड़कों ने सरकारी नौकरी की तैयारी छोड़ डेढ़ साल में बनाया
एक साल तक इस गाने के लिरिक्स में फेरबदल होता रहा. 16 बार इसका म्यूज़िक चेंज हुआ. तब जाकर ये गाना बना. 'बैरण' इंडियन बिलबोर्ड पर हफ्तों तक नंबर 1 पर रहा.

Bairan. पहली परत में ये धुनों से सजी एक शिकायत है. मगर जब शिकायत में इतनी सादगी हो, तो वो किसी प्रेम पत्र से कम नहीं लगती. ये सादगी ही 'बैरण' की असली पहचान है. लेकिन ये पहचान बनी कैसे? ये गाना कैसे बना? और इसके वायरल होने के पीछे क्या कहानी है, आइए जानते हैं.
हरियाणा का ज़िक्र होते ही लोग मन में एक खास तरह की इमेज बना लेते हैं. एक रफ-टफ इमेज. मगर 'बैरण' जैसा गाना, उस छवि को तोड़ने का काम करता है. इसने लोगों को बताया कि यदि दिल इज़हार करने पर उतरे, तो भाषा, क्षेत्र और समुदाय से कुछ खास फ़र्क नहीं पड़ता. 'बैरण' को फरवरी 2026 में यूट्यूब पर रिलीज़ किया गया था. इसे बनाया है सुमित और अनुज नाम के दो लड़कों ने. रिश्ते में एक-दूसरे के चचेरे भाई हैं. गाने में आप जो आवाज़ सुन रहे हैं, वो अनुज की है. वहीं इसका पॉप-इंस्पायर्ड फील गुड म्यूजिक सुमित ने तैयार किया है. वैसे, तो दोनों भाई बचपन से ही गाने गाते आए हैं. मगर कोविड लॉकडाउन के वक्त उन्होंने इसे अपना पेशा बनाने को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू किया. इस काम में उनके पैरेंट्स ने भी साथ दिया. जैसा कि अक्सर होता है, आसपास के लोगों ने उन्हें टोकना शुरू कर दिया. लोग उन्हें स्टेबल करियर ऑप्शंस देखने को कहते, जो उनके हिसाब से म्यूजिक में तो बिल्कुल नहीं था.
सुमित का जन्म 20 अप्रैल 1998 को हुआ है. पिता टीचर हैं. उन्होंने हिसार एग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई की है. दूसरी तरफ अनुज 30 अगस्त, 2002 को पैदा हुए थे. उनके पिता भी टीचर हैं. अनुज वैसे तो शुरू से ही सिंगर बनना चाहते थे. मगर घर के माहौल के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ बैलेंस बनाकर चलना पड़ा. उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स किया है. साथ ही नेट का एग्जाम भी क्लियर कर चुके हैं. एक वक्त पर वो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे. मगर जब वहां बात नहीं बनी, तो उन्होंने म्यूजिक का रुख कर लिया.
कोविड के दौरान, जब पूरी दुनिया घरों में बंद थी, सुमित और अनुज ने अपने म्यूजिक का काम चालू किया. उन्हें कोई गाइड करने वाला नहीं था. उन्होंने संगीत की कोई ट्रेनिंग भी नहीं ली है. इसलिए वो जो करते, आपसी समझ से ही करते. अब जब दोनों प्रोफेशनली म्यूजिक की तरफ बढ़ने का मन बना चुके थे, तो उन्होंने एक कंप्यूटर और हारमोनियम खरीदा. हारमोनियम सुनकर आपको लगा होगा कि दोनों बड़े तोप रहे होंगे. मगर ऐसा नहीं था. उन्हें तो बजाना तक नहीं आता था. बड़ी मशक्कत के बाद उन्होंने यूट्यूब पर हारमोनियम बजाना सीखने की कोशिश की. चूंकी उनके “अब्बा हारमोनियम नहीं बजाते थे”, इसलिए तमाम कोशिशों के बावजूद इनका हाथ उस पर नहीं बैठ सका.

'बैरण' आज इंटरनेट पर खूब वायरल है. लाखों रील्स बन चुके हैं. हर किसी की ज़ुबान पर यही गाना है. कई लोग इसे रातों-रात मिला सक्सेस मानते हैं. मगर इसकी नींव सालों पहले पड़ी थी. हुआ ये कि 2019 में कोविड के दौरान सुमित ने एक गाना लिखा था. वो उसका प्रोफेशनल प्रोडक्शन करवाना चाहते थे. मगर तब वो खुद नए-नवेले थे. इसलिए उन्होंने फैसला किया कि वो किसी म्यूजिक कम्पोज़र से ये काम करवाएंगे. थोड़ी पड़ताल के बाद उन्हें हिसार का एक कम्पोज़र मिल गया. अब किसी दूसरे से काम करवाना है, तो पैसे लगेंगे! उस कम्पोज़र ने सुमित से 40 हजार रुपयों की डिमांड की. सुमित ने कुछ सोच-विचार किया और अपने घर वालों से पैसे मांग लिए. घर वाले सपोर्ट तो करते ही थे, इसलिए पैसे भी मिल गए. मगर दिक्कत तब हुई, जब उन्होंने कम्पोज़र का काम देखा.
उन्हें उस कम्पोज़र का तैयार किया गाना पसंद ही नहीं आया. इसलिए उन्होंने फैसला किया कि अब वो खुद ही म्यूजिक बनाया करेंगे. इसके बाद उन्होंने पांच गाने खुद बनाए. मगर वो गाने भी कुछ खास नहीं चले. कट टु 2024. दोनों भाइयों ने मिलकर एक यूट्यूब चैनल बनाया. नाम रखा- 'बंजारा'. सुमित और अनुज का मानना है कि उनके गानों में एक कहानी छिपी होती है. ऐसी कहानी, जो चलती जाती है. एक जगह से दूसरी जगह. बिल्कुल वैसे ही, जैसे बंजारे चलते हैं.

खैर, नए चैनल पर उन्होंने 28 नवंबर, 2024 को पहला गाना रिलीज़ किया. नाम रखा-'सूट्स विद मी'. व्यूज़- 1 लाख 59 हजार. उन्होंने कुल पांच गाने रिलीज़ किए, जिन पर उन्हें ठीक-ठाक व्यूज़ आने लगे थे. फिर आया उनका छठा गाना. नाम? 'बैरण'. व्यूज़? 80 मिलियन. इस खबर के लिखे जाने तक इस गाने को 8 करोड़ 48 लाख बार देखा-सुना जा चुका है.
ये केवल वो व्यूज़ हैं, जो इस गाने को यूट्यूब पर मिले हैं. दूसरे म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर भी इसे करोड़ों बार सुना गया है. यूट्यूब पर इस गाने के डिस्क्रिप्शन में लिखा है- "Bairan was never meant to be a hit." मगर ये गाना हिट नहीं, सुपर हिट हो गया. इंडियन बिलबोर्ड पर ये हफ्तों तक नंबर 1 पर रहा. ‘बैरण’ ऐसा करने वाला पहला हरियाणवी गाना है. बाकी, इंस्टाग्राम-यूट्यूब पर इस पर लाखों रील्स बन चुके हैं. मगर ये तुक्का नहीं था. इसके पीछे सालों की मेहनत थी.
'बैरण' की शुरुआत काफी साधारण तरीके से हुई थी. एक रात अनुज ने सुमित को एक गाना गुनगुनाकर भेजा. अनुज का सुझाव था कि उन्हें रॉक बीट पर कोई गाना बनाना चाहिए. सुमित को ये आइडिया पसंद आया. वो भी इतना पसंद कि उन्होंने 15 मिनट के अंदर गाने का फर्स्ट ड्राफ्ट लिख दिया. अगली सुबह दोनों ने उसे कम्पोज़ किया. मगर ये वो वर्जन नहीं था, जो हम आज सुन रहे हैं. उन्होंने अगले एक साल तक इसके लिरिक्स कई बार लिखे और मिटाए. 16 बार इसके म्यूजिक में फेर-बदल किया. इतना सब कुछ करके उन्होंने चंडीगढ़ में गाने का एक वीडियो भी शूट कर लिया था. मगर सुमित को चाहिए था परफेक्शन. उन्हें वो वीडियो जमा नहीं. नतीजतन, उन्होंने उसे रिजेक्ट कर दिया.
23 जनवरी, 2026 को उन्होंने ‘बैरण’ का ऑडियो वर्जन रिलीज़ किया था. पब्लिक को गाना पसंद आने लगा. इससे उन्हें एक बात तो समझ आ गई. वो ये कि उनका म्यूजिक अच्छा है. कमी है तो बस वीडियो में. सोच-विचार करके उन्होंने गाने में एक एनिमेशन जोड़ने का प्लान किया. उनका ये प्लान आज ‘बैरण’ की सबसे बड़ी हाइलाइट है. इसके ज़रिए उन्होंने ढाई मिनट में अपनी पूरी कहानी कह दी. इस गाने को बनाने में उन्हें 50 हजार रुपये का खर्च आया. तमाम ताम-झाम से निपटने के बाद उन्होंने 13 फरवरी, 2026 को ऑफिशियली ‘बैरण’ गाना यूट्यूब पर रिलीज़ कर दिया.

'बैरण' के फर्स्ट ड्राफ्ट को लिखने और इसके म्यूजिक वीडियो को रिलीज़ करने के बीच डेढ़ साल का फासला था. यानी जिस गाने को आज लोग ओवरनाइट सक्सेस समझ रहे हैं, उसे बनाने में इन दो भाइयों ने कई रातों की नींद खपाई है. 'बैरण' आज हर तरफ वायरल हो चुका है. सुमित और अनुज को मुंबई से ऑफर आ रहे हैं. हरियाणवी और पंजाबी इंडस्ट्री भी उन्हें काफी सपोर्ट कर रही है. मगर ये 'बंजारे' किसी हड़बड़ी में नहीं. न ही वो वायरल सेंसेशन बनकर रह जाना चाहते हैं. दोनों बस अपने क्राफ्ट पर काम कर रहे. लगातार उसे मांज रहे हैं. ताकि फिर से कुछ रच सकें.
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