मदर इंडिया: राधा ने नहीं रामू ने ऑनर किलिंग की थी बिरजू की
जमीनें हथियाती थी राधा, पति ने किया था घोटाला, और बेटे को दी इश्क करने की सजा.
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फोटो - thelallantop
गांव में नहर का उद्घाटन हो रहा है. उद्घाटन के लिए एक बूढ़ी औरत सामने आती है, जो गांव के सरपंच की बीवी है और इस बार सुरक्षित सीट होने के कारण सरपंची का चुनाव लड़ने वाली है. ये नहर उसी के बेटे रामू ने बनाई है, जिसका ठेका पाने के लिए उसने एसडीओ के साथ बड़ी धांधली की थी. मेट के साथ मिलकर फर्जी मस्टर रोल बनवाए थे. लेकिन इनके घर में हमेशा से इतनी खुशहाली नही थी. एक वो भी दौर था जब इस औरत राधा के घर खाने को एक दाना नही था.
हुआ ये कि शादी के वक़्त राधा के पति शामू ने सुक्खीलाला से पैसे उधार लिए थे. और बदले में अपना बीपीएल वाला कार्ड रखवा दिया था. वो अपने खेतों में खुद ही हल बनकर जुताई करते शामू को एक दिन कपिलधारा योजना के बारे में पता चला. उसने उस स्कीम से पैसा तो निकाला पर वो पैसा लेकर इलाहाबाद भाग गया और वहीं रहकर रिक्शा चलाने लगा.
घर पर राधा के दो बच्चे रह गए. रामू और बिरजू. जिनने फ़िल्म देखी है उन्हें पता होगा कि राधा का एक और बेटा होता है जो जल्द ही मर जाता है. दरअसल वो लड़की थी, जिसे राधा तम्बाकू की पोटली सुंघा के मार देती है. ताकि उसके दहेज का बोझ राधा के सिर न आए. सुक्खीलाला राधा की गरीबी दूर करने के लिए शादी का प्रस्ताव देता है.
पर राधा मनाकर देती है क्योंकि पड़ोस की सुगनिया उसे बताती है कि सुक्खी बड़ा किंकी है और BDSM में उसका कर्रा इंटरेस्ट है.
राधा के दोनों लौंडे बड़े हो जाते हैं. रामू शातिर निकलता है पर भोला बना रहता है. उसका चक्कर गांव के पटवारी की बिटिया से चल जाता है. पटवारी के साथ मिलकर वो गांव की जमीन के खूब वारे-न्यारे करता है. एक बार गांव में तूफ़ान आता है. फसलें नष्ट हो जाती हैं. सब गांव छोड़ के चले जाते हैं. लौटते हैं तो पाते हैं हर जगह फ्लैट्स और रो हाउसेज के होर्डिंग लगे हैं. रामू ने सारी जमीन पटवारी से अपनी मां के नाम करा ली होती है. खसरा-खतौनी सब राधा के नाम होती है. और गांव वालों के खेतों में हाउसिंग कॉलोनी की नींव पड़ी होती है. अब आधी टाउनशिप का रूप ले चुके गांव का सबसे बड़ा ठेकेदार रामू होता है,गांव वाले उसी के जरिए मनरेगा में काम पाते हैं और उसका उपकार मानते हैं.
राधा का बिरजू अब भी सुक्खीलाला के दिए कष्ट याद करता है. उससे बदला लेने के लिए उसकी बेटी की स्कूल के आगे खड़ा हो लौंडियाबाजी करता है. जब वो कोचिंग जाती है तो रजनीगंधा तुलसी खाकर उसका पीछा करता है. सुक्खीलाला तूफ़ान के पहले ही गांव छोड़ चुका होता है और कस्बे में ऑनलाइन एक्जाम के फॉर्म और रेलवे टिकिट बुक करने की फ्रेंचाइजी ले लेता है.
कहानी में मोड़ तब आता है जब राधा का पति लौट आता है. पहले वो इलाहाबाद में बड़ा यूनियन लीडर बनता है. और बाद में कामगार यूनियन का बड़ा नेता. अभी चंदे का पैसा गबन करने के आरोप में छीछालेदर होने पर मुंह छुपाकर गांव आ जाता है और सरपंची का चुनाव लड़ता है. वही चुनाव सुक्खीलाला भी लड़ रहा होता है.
सुक्खीलाला गांव भर में कम्बल और दारु भिजवाना शुरू करता है. राधा, रामू और शामू को लगता है कि ऐसे में वो चुनाव हार जाएंगे. वो बिरजू की मदद मांगते हैं. बिरजू लाला की लड़की को किडनैप कर लाता है. इसके पहले की बिरजू लड़की को लेकर बेगूसराय भाग जाए. पटवारी की लड़की के जरिए राधा को पता चल जाता है कि कोचिंग में पीछा करते-करते बिरजू का लाला की बेटी से टांका भिड़ गया है. राधा को अब समझ आता है कि बिरजू अपनी कौन सी अम्मां से रात को दो-दो बजे तक फोन पर लगा रहता है.
इससे पहले कि बिरजू बोलेरो में लाला की बेटी और बाप के गबन के पैसे लेकर भाग जाए. रामू उसे गोली मार देता है. वजह पैसा नही था, ऑनर किलिंग थी. बिन्दू महानसभा का ग्रामीण प्रमुख रामू ये कभी बर्दाश्त नही कर पाता कि उसका भाई अपने से छोटी जाति की लड़की से प्यार करे. बंदूक राधा छुड़ा लेती है. और हल्ला मच जाता है कि गांव की इज्जत बचाने को मां ने बेटे को मार दिया. जनता ये भी भूल जाती है कि इन्हीं मां-बेटे ने उनकी जमीनें खाई हैं. प्राउड हिंदूज यू नो. सहानुभूति की लहर में शामू को वोट दे देती है. शामू सरपंच बन जाता है और राधा मदर इंडिया.
Source- twitter
हुआ ये कि शादी के वक़्त राधा के पति शामू ने सुक्खीलाला से पैसे उधार लिए थे. और बदले में अपना बीपीएल वाला कार्ड रखवा दिया था. वो अपने खेतों में खुद ही हल बनकर जुताई करते शामू को एक दिन कपिलधारा योजना के बारे में पता चला. उसने उस स्कीम से पैसा तो निकाला पर वो पैसा लेकर इलाहाबाद भाग गया और वहीं रहकर रिक्शा चलाने लगा.
घर पर राधा के दो बच्चे रह गए. रामू और बिरजू. जिनने फ़िल्म देखी है उन्हें पता होगा कि राधा का एक और बेटा होता है जो जल्द ही मर जाता है. दरअसल वो लड़की थी, जिसे राधा तम्बाकू की पोटली सुंघा के मार देती है. ताकि उसके दहेज का बोझ राधा के सिर न आए. सुक्खीलाला राधा की गरीबी दूर करने के लिए शादी का प्रस्ताव देता है.
पर राधा मनाकर देती है क्योंकि पड़ोस की सुगनिया उसे बताती है कि सुक्खी बड़ा किंकी है और BDSM में उसका कर्रा इंटरेस्ट है.
राधा के दोनों लौंडे बड़े हो जाते हैं. रामू शातिर निकलता है पर भोला बना रहता है. उसका चक्कर गांव के पटवारी की बिटिया से चल जाता है. पटवारी के साथ मिलकर वो गांव की जमीन के खूब वारे-न्यारे करता है. एक बार गांव में तूफ़ान आता है. फसलें नष्ट हो जाती हैं. सब गांव छोड़ के चले जाते हैं. लौटते हैं तो पाते हैं हर जगह फ्लैट्स और रो हाउसेज के होर्डिंग लगे हैं. रामू ने सारी जमीन पटवारी से अपनी मां के नाम करा ली होती है. खसरा-खतौनी सब राधा के नाम होती है. और गांव वालों के खेतों में हाउसिंग कॉलोनी की नींव पड़ी होती है. अब आधी टाउनशिप का रूप ले चुके गांव का सबसे बड़ा ठेकेदार रामू होता है,गांव वाले उसी के जरिए मनरेगा में काम पाते हैं और उसका उपकार मानते हैं.
राधा का बिरजू अब भी सुक्खीलाला के दिए कष्ट याद करता है. उससे बदला लेने के लिए उसकी बेटी की स्कूल के आगे खड़ा हो लौंडियाबाजी करता है. जब वो कोचिंग जाती है तो रजनीगंधा तुलसी खाकर उसका पीछा करता है. सुक्खीलाला तूफ़ान के पहले ही गांव छोड़ चुका होता है और कस्बे में ऑनलाइन एक्जाम के फॉर्म और रेलवे टिकिट बुक करने की फ्रेंचाइजी ले लेता है.
कहानी में मोड़ तब आता है जब राधा का पति लौट आता है. पहले वो इलाहाबाद में बड़ा यूनियन लीडर बनता है. और बाद में कामगार यूनियन का बड़ा नेता. अभी चंदे का पैसा गबन करने के आरोप में छीछालेदर होने पर मुंह छुपाकर गांव आ जाता है और सरपंची का चुनाव लड़ता है. वही चुनाव सुक्खीलाला भी लड़ रहा होता है.
सुक्खीलाला गांव भर में कम्बल और दारु भिजवाना शुरू करता है. राधा, रामू और शामू को लगता है कि ऐसे में वो चुनाव हार जाएंगे. वो बिरजू की मदद मांगते हैं. बिरजू लाला की लड़की को किडनैप कर लाता है. इसके पहले की बिरजू लड़की को लेकर बेगूसराय भाग जाए. पटवारी की लड़की के जरिए राधा को पता चल जाता है कि कोचिंग में पीछा करते-करते बिरजू का लाला की बेटी से टांका भिड़ गया है. राधा को अब समझ आता है कि बिरजू अपनी कौन सी अम्मां से रात को दो-दो बजे तक फोन पर लगा रहता है.
इससे पहले कि बिरजू बोलेरो में लाला की बेटी और बाप के गबन के पैसे लेकर भाग जाए. रामू उसे गोली मार देता है. वजह पैसा नही था, ऑनर किलिंग थी. बिन्दू महानसभा का ग्रामीण प्रमुख रामू ये कभी बर्दाश्त नही कर पाता कि उसका भाई अपने से छोटी जाति की लड़की से प्यार करे. बंदूक राधा छुड़ा लेती है. और हल्ला मच जाता है कि गांव की इज्जत बचाने को मां ने बेटे को मार दिया. जनता ये भी भूल जाती है कि इन्हीं मां-बेटे ने उनकी जमीनें खाई हैं. प्राउड हिंदूज यू नो. सहानुभूति की लहर में शामू को वोट दे देती है. शामू सरपंच बन जाता है और राधा मदर इंडिया.
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