थलपति विजय की 'जन नायगन' की रिलीज फंसाने की असली वजह अब सामने आई!
ये थलपति विजय के करियर की आखिरी फिल्म है. इसके बाद वो राजनीति में उतरने वाले हैं. मगर उससे पहले ही उनके साथ तगड़ी पॉलिटिक्स हो गई.

Thalapathy Vijay की Jana Nayagan, 09 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली थी. मगर सेंसर बोर्ड और मद्रास हाई कोर्ट ने अब तक इसे हरी झंडी ही नहीं दी है. सेंसर बोर्ड का कहना है कि मूवी में धार्मिक उन्माद बढ़ाने वाले एलीमेंट्स हैं. साथ ही इसमें इंडियन आर्मी को गलत ढंग से दिखाया गया है. मगर ताज़ा रिपोर्ट में ‘जन नायगन’ की रिलीज़ रोकने के पीछे एक दूसरी वजह सामने आई है.
'जन नायगन' विजय के करियर की अंतिम फिल्म है. इसके बाद वो फुलटाइम राजनीति में उतरने वाले हैं. उन्होंने 2024 में अपनी पॉलिटिकल पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) लॉन्च की. इसके वो अध्यक्ष भी हैं. उनकी पार्टी ने तमिलनाडु में सरकार चला रही DMK पर खूब हमलावर रही. साथ ही विजय ने केंद्र की भाजपा सरकार की भरपूर आलोचना भी की. इस वजह से उन्हें कम समय में ही काफ़ी पॉलिटिकल हेडलाइन्स मिल गईं.
ऐसे में लोग 'जन नायगन' को विजय के पॉलिटिकल लॉन्चपैड की तरह देख रहे हैं. जबसे इसका ट्रेलर आया है, तबसे इस मामले ने और तूल पकड़ लिया है. दावा किया जा रहा है कि विजय ने इस फिल्म में खुद की ऐसी इमेज प्रेजेंट की है, जिसका सीधा फायदा उन्हें राजनीति में मिले. द प्रिन्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 'जन नायगन' में वो गरीबों के मसीहा बने हैं. उनका किरदार तमिलनाडु में करप्शन के खिलाफ़ आम लोगों का साथ देता दिखाई देता है. बताया जा रहा है कि फिल्म में उनका किरदार भविष्य में तमिलनाडु का मुख्यमंत्री भी बन जाता है. यही बात फिल्म पर रोक लगाने के पीछे सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है.
'जन नायगन' के ट्रेलर में विजय को थलपति वेत्री कोंडन बताया जा रहा है. थलपति टाइटल उन्हें रियल लाइफ में भी दिया गया है. साथ ही वेत्री शब्द उनकी पॉलिटिकल पार्टी के नाम में इस्तेमाल हुआ है. इंटरनेट पर लोग ये आरोप लगा रहे हैं विजय इस फिल्म के ज़रिए खुद को जयप्रकाश नारायण और अन्ना हज़ारे जैसी इमेज में ढालना चाहते हैं. फिल्म के पॉलिटिकल डायलॉग भी रियल लाइफ़ का रेफरेंस देते दिखाई देते हैं. जैसे- "मेरा वापस मुड़ने का कोई इरादा नहीं है. मैं आ रहा हूं." इस बात को उनका पॉलिटिकल एजेंडा बताया जा रहा है.
कुछ लोगों का मानना है कि ‘जन नायगन’ का ये विवाद सेंसर बोर्ड से कहीं ज्यादा तमिल फिल्म इंडस्ट्री की इंटरनल पॉलिटिक्स जुड़ा है. इस विवाद को तमिलनाडु के डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन और DMK से जुड़ी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी रेड जायंट मूवीज़ से जोड़कर भी देखा जा रहा है. रेड जायंट उदयनिधि स्टालिन की ही कंपनी है. विजय ने तमिलनाडु में अपनी मूवी को रेड जायंट के बजाए 4 अन्य डिस्ट्रीब्यूटर्स के ज़रिए रिलीज़ करने का फ़ैसला किया है. इनमें सेवेन स्क्रीन स्टूडियो और रोमियो पिक्चर्स शामिल हैं. बताया जा रहा है कि उनके इस फ़ैसले से तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी DMK नाराज़ हो गई है.
'जन नायगन' इस पोंगल पर तमिलनाडु में 'पराशक्ति' से टकराने वाली थी. शिवकार्तिकेयन की ये फिल्म राज्य के भाषा विवाद के इर्द-गिर्द बुनी गई है. ये DMK की राजनीति का भी सबसे बड़ा मुद्दा रहा है. रोचक बात ये है कि 'पराशक्ति' को डिस्ट्रिब्यूट करने वाली कंपनी कोई और नहीं, बल्कि रेड जायंट मूवीज़ है. वही कंपनी, जिसका नाता DMK से है. पार्टी खुलेआम इस फिल्म को सपोर्ट भी कर रही है.
हालांकि जबसे विजय की फिल्म अटकी है, DMK प्रेसीडेंट और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ‘जन नायगन’ का सपोर्ट करने लगे हैं. उन्होंने भाजपा और केंद्र सरकार पर 'जन नायगन' को रोकने के आरोप लगाए हैं. सच क्या है, ये तो वक्त ही बताएगा. लेटेस्ट रिपोर्ट ये है कि मद्रास हाईकोर्ट ने 09 जनवरी को 'जन नायगन' के पक्ष में फ़ैसला दिया था. मगर फिर सेंसर बोर्ड ने इस नतीजे पर आपत्ति जताई. इस वजह से कोर्ट ने मामला फिर से खोला, जिसकी सुनवाई अब 21 जनवरी को होगी. दूसरे शब्दों में कहें तो विजय की फिल्म अब शायद 21 जनवरी तक रिलीज़ न हो पाए. ऐसे में 'जन नायगन' बनाने वाली KVN प्रोडक्शंस सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है. वहां हुई सुनवाई के बाद ही ये तय किया जा सकेगा कि इस फिल्म का भविष्य क्या होने वाला है.
वीडियो: थलपति विजय की फिल्म 'जन नायगन' के ट्रेलर ने कौन-सा रिकॉर्ड तोड़ दिया?

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