"मेरे गानों पर 3700 करोड़ व्यूज़ हैं मगर उसका कोई पैसा नहीं मिलता"
'सैयारा' के म्यूजिक कम्पोजर ने इंडस्ट्री की पोल खोल दी!
.webp?width=210)
बॉलीवुड से अक्सर ये कंप्लेन आती है कि सिंगर्स और म्यूजिक कम्पोजर्स को उनके हक़ का पैसा नहीं मिलता. Arijit Singh और Sonu Nigam इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठा चुके हैं. पिछले दिनों म्यूजिक कम्पोजर Tanishk Bagchi ने भी कुछ ऐसी ही शिकायत की है. तनिष्क को Saiyaara, Dilbar और Vaaste जैसे पॉपुलर गानों के लिए जाना जाता है. वो बताते हैं कि उनके गानों पर 3700 करोड़ से ज्यादा व्यूज़ हैं. मगर भारत में रॉयल्टी कल्चर न होने के कारण वो उनके लिए उन्हें कुछ पैसे नहीं मिलते. क्योंकि इंडिया में वन टाइम पेमेंट का सिस्टम है.
म्यूज़िक इंडस्ट्री में रॉयल्टी उस पैसे को कहा जाता है, जो गाने के कहीं इस्तेमाल होने पर सिंगर्स, कम्पोजर्स और म्यूजिक कंपनियों को मिलता है. जब कोई गाना स्पॉटिफाई-यूट्यूब पर स्ट्रीम होता है या रेडियो और टीवी पर चलाया जाता है, तो उससे होने वाली कमाई का एक हिस्सा उसे बनाने वालों को भी मिलता है. इसे रॉयल्टी कहते हैं. मगर तनिष्क बताते हैं कि ये सिस्टम विदेशों में फॉलो होता है, भारत में नहीं. फरीदून शहरयार से हुई बातचीत में वो कहते हैं,
भारत और वेस्टर्न म्यूजिक इंडस्ट्री का फ़र्क बताते हुए तनिष्क अपनी बात में आगे जोड़ते हैं,
तनिष्क कहते हैं कि इन तमाम दिक्कतों के बावजूद लोगों को बग़ैर किसी बुरे ख्याल के काम करना पड़ता है. हालांकि वो ये बताना नहीं भूलते कि अब हालात पहले से थोड़े बेहतर हुए हैं. इसका श्रेय उन्होंने IPRS यानी इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी को दिया है. इस ऑर्गनाइजेशन की वजह से कलाकारों को रॉयल्टी देने के सिस्टम में सुधार आया है. मगर तनिष्क का कहना है कि अभी और बदलाव की ज़रूरत है. उन्हें उम्मीद है कि आगे चलकर सिस्टम और बेहतर होगा. साथ ही कलाकारों को उनका पूरा हक़ भी मिलेगा.
वीडियो: एआर रहमान ने की हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भेदभाव की बात, अभिजीत भट्टाचार्य ने क्या कहा?

.webp?width=60)

