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"मेरे गानों पर 3700 करोड़ व्यूज़ हैं मगर उसका कोई पैसा नहीं मिलता"

'सैयारा' के म्यूजिक कम्पोजर ने इंडस्ट्री की पोल खोल दी!

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26 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 04:54 PM IST)
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तनिष्क बागची को अक्सर पुराने गानों का रीमेक बनाने के लिए ट्रोल किया जाता है.
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बॉलीवुड से अक्सर ये कंप्लेन आती है कि सिंगर्स और म्यूजिक कम्पोजर्स को उनके हक़ का पैसा नहीं मिलता. Arijit Singh और Sonu Nigam इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठा चुके हैं. पिछले दिनों म्यूजिक कम्पोजर Tanishk Bagchi ने भी कुछ ऐसी ही शिकायत की है. तनिष्क को Saiyaara, Dilbar और Vaaste जैसे पॉपुलर गानों के लिए जाना जाता है. वो बताते हैं कि उनके गानों पर 3700 करोड़ से ज्यादा व्यूज़ हैं. मगर भारत में रॉयल्टी कल्चर न होने के कारण वो उनके लिए उन्हें कुछ पैसे नहीं मिलते. क्योंकि इंडिया में वन टाइम पेमेंट का सिस्टम है.  

म्यूज़िक इंडस्ट्री में रॉयल्टी उस पैसे को कहा जाता है, जो गाने के कहीं इस्तेमाल होने पर सिंगर्स, कम्पोजर्स और म्यूजिक कंपनियों को मिलता है. जब कोई गाना स्पॉटिफाई-यूट्यूब पर स्ट्रीम होता है या रेडियो और टीवी पर चलाया जाता है, तो उससे होने वाली कमाई का एक हिस्सा उसे बनाने वालों को भी मिलता है. इसे रॉयल्टी कहते हैं. मगर तनिष्क बताते हैं कि ये सिस्टम विदेशों में फॉलो होता है, भारत में नहीं. फरीदून शहरयार से हुई बातचीत में वो कहते हैं,

"वेस्टर्न देशों में गाने पर काम करने वाले हर व्यक्ति- चाहे साउंड इंजीनियर हो या सॉन्ग राइटर- सबको रॉयल्टी मिलती है. अगर पांच लोगों की टीम है, तब भी सबको गाने की कमाई में हिस्सा मिलता रहता है. इसलिए वो पैसों के मामले में काफ़ी स्टेबल हैं. लेकिन भारत में ऐसा नहीं है. यहां एक बार काम का पैसा मिला और फिर बात वहीं खत्म हो जाती है."

भारत और वेस्टर्न म्यूजिक इंडस्ट्री का फ़र्क बताते हुए तनिष्क अपनी बात में आगे जोड़ते हैं,

"मेरे ख्याल से यूट्यूब पर मेरे गानों पर 37 बिलियन यानी 3700 करोड़ व्यूज़ होंगे. बाकी म्यूज़िक ऐप्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी शायद इतने ही व्यूज़ होंगे. मुझे सटीक आंकड़ों का पता नहीं है. अगर मैं ये नंबर भारत के बाहर बताऊं, तो लोग डर जाएंगे. उन्हें लगता है कि मेरे पास प्राइवेट जेट होगा. मुझे वेस्टर्न देशों की ये बात बहुत पसंद है. वहां का सिस्टम अनफेयर नहीं है. जिसने जितनी मेहनत की, उसे उसका उतना हक़ मिलता है. लेकिन यहां हमें बार-बार खुद को साबित करना पड़ता है. आपने एक सैयारा कर लिया और उसके बाद सब खत्म. हमें फिर से शुरुआत करनी पड़ती है. कुछ महीनों के लिए आप मशहूर हो सकते हैं. लेकिन लोग जल्द आपको भूल भी जाते हैं. पर हम देश छोड़कर जा भी तो नहीं सकते.”

तनिष्क कहते हैं कि इन तमाम दिक्कतों के बावजूद लोगों को बग़ैर किसी बुरे ख्याल के काम करना पड़ता है. हालांकि वो ये बताना नहीं भूलते कि अब हालात पहले से थोड़े बेहतर हुए हैं. इसका श्रेय उन्होंने IPRS यानी इंडियन परफॉर्मिंग राइट सोसाइटी को दिया है. इस ऑर्गनाइजेशन की वजह से कलाकारों को रॉयल्टी देने के सिस्टम में सुधार आया है. मगर तनिष्क का कहना है कि अभी और बदलाव की ज़रूरत है. उन्हें उम्मीद है कि आगे चलकर सिस्टम और बेहतर होगा. साथ ही कलाकारों को उनका पूरा हक़ भी मिलेगा. 

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