"मो. रफ़ी साहब की माइक पर जो आवाज़ थी, अरे बाप रे...!"
सुरेश वाडकर ने रफ़ी को याद करते हुए कहा- "आज भी हम लोग जो जीते हैं ना, उन्हीं के गानों को सुनते-सुनते जीते हैं.”
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सुरेश वाडकर ने बताया कि जब मोहम्मद रफ़ी गााते थे, तो लगता था जैसे पूरा वातावरण गा रहा है.
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