राजामौली ने 'वाराणसी' प्रमोशन में 'रामायण' को मायथोलॉजी बताया, लोग ने ऐसी-तैसी फेर दी
पब्लिक का कहना है कि एक तरफ़ राजामौली खुद को नास्तिक बताते हैं. दूसरी तरफ़ वो ये भी स्वीकारते हैं कि उनकी सभी फिल्में 'रामायण' से प्रेरित है.
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SS Rajamouli की Varanasi शुरुआत से ही लगातार विवादों में रही है. पहले, भगवान हनुमान पर कमेंट करने की वजह से राजामौली के खिलाफ़ FIR हुई थी. और अब, वो Ramayana को मायथोलॉजी कहने की वजह से ट्रोल किए जा रहे हैं. लोगों का कहना है कि राजामौली अपनी फिल्में तो राम कथा के इर्द-गिर्द बनाते हैं. मगर देर-सवेर वो इसका अपमान करने से भी नहीं चूकते.
'वाराणसी' की कहानी कई अलग-अलग टाइमलाइन्स में घटेगी. इसका एक बड़ा हिस्सा त्रेतायुग पर केंद्रित होगा. त्रेतायुग उसी समयकाल को कहा जाता है, जिसमें 'रामायण' घटी थी. फिल्म के टाइटल टीज़र में मेकर्स उसकी एक झलक भी दिखा चुके हैं. इन दिनों राजामौली कई इंटरनेशनल पब्लिकेशंस के साथ इंटरव्यू में अपनी फिल्म प्रमोट कर रहे हैं. इसी दौरान पॉलिगन के साथ हुए इंटरव्यू में उन्होंने कहा,
"वाराणसी में कितनी मायथोलॉजी दिखाई जाएगी, इसका जवाब मैं बहुत संभलकर दूंगा. ताकि मैं कोई स्पॉयलर न दे दूं. फिल्म में लगभग 25 मिनट का सीक्वेंस मायथोलॉजिकल पीरियड में सेट है. फिलहाल मैं आपको बस इतना ही बता सकता हूं. इस सीक्वेंस में मुझे रामायण के एक हिस्से को अलग ढंग से पेश करने का मौका मिला है."
राजामौली खुद को नास्तिक बताते हैं. दूसरी तरफ़ वो ये भी स्वीकारते हैं कि उनकी सभी फिल्में 'रामायण' से प्रेरित हैं. ऐसे में उनके बयान ने इंटरनेट पर कई लोगों को नाराज़ कर दिया है. वो सवाल कर रहे हैं कि आखिर राजामौली बार-बार 'रामायण' को हिस्ट्री की जगह मायथोलॉजी क्यों बताते हैं. एक यूजर ने लिखा,
"क्या रामायण कोई मायथोलॉजी है? कई बार ऐसा लगता है कि राजामौली ये सब जानबूझकर करते हैं. वो पब्लिक प्लेटफॉर्म्स पर हिंदू देवी-देवताओं का मज़ाक उड़ाते हैं. गर्व से कहते हैं कि उन्हें इन पर विश्वास नहीं है. मगर फिर वो इन्हीं बातों का इस्तेमाल पैसे कमाने के लिए करते हैं. अगर कोई इंसान सच में किसी बात पर विश्वास नहीं करता, तो वो उसका इस्तेमाल भी नहीं करेगा. मगर राजामौली ऐसा करते हैं क्योंकि इससे बिक्री होती है और पैसा भी आता है. ये कन्विक्शन नहीं, कैलकुलेशन है."

दूसरी तरफ़ कई यूजर्स ऐसे भी हैं, जो राजामौली के समर्थन में आ गए हैं. एक ने कहा,
"हमारे इतिहास में कई मायथोलॉजिकल कहानियां मौजूद हैं. हो सकता है वो उसी बारे में बात कर रहे हों. वैसे भी राजामौली पर ज्यादा सवाल इसलिए नहीं उठाया जाता, क्योंकि उनकी फिल्में भारत को गलत ढंग से पेश नहीं करती हैं."

इस बहस का एक तीसरा पक्ष भी है. उसका ये कहना है कि राजामौली जानबूझकर इस तरह के बयान देते हैं. ऐसा इसलिए ताकि उनकी मूवी को लेकर लगातार बज़ बना रहे. एक यूजर ने लिखा,
"राजामौली ने ये जानबूझकर किया है. वो इसलिए ताकि हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर बज़ बने और पैसा कमाया जा सके. उन्हें पता है कि अगर फिल्म में रामायण से जुड़े हिस्से नहीं होंगे, तो ये हज़ार करोड़ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाएगी. महेश बाबू में इतनी क्षमता नहीं है. वो एक रीजनल स्टार हैं और उनकी पिछली सबसे बड़ी कमाई करीब 180 करोड़ की ही रही है."

वैसे ये पहला मौका नहीं है राजामौली ने इस तरह का विवादित बयान दिया हो. 'वाराणसी' के टीज़र लॉन्च इवेंट में भी कुछ ऐसा ही हुआ था. दरअसल, राजामौली तब फिल्म के टीज़र को काफ़ी बड़ी स्क्रीन पर प्ले कर रहे थे. मगर उस दौरान उन्हें काफ़ी तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. इस बात से काफ़ी झुंझला गए और मंच से बोले-
"मैं भगवान पर ज्यादा विश्वास नहीं करता. पिताजी कहा करते थे कि जब भी मैं किसी परेशानी में रहूं, हनुमान मेरे पीछे खड़े होकर मुझे मार्ग दिखाएंगे. लेकिन जैसे ही ये गड़बड़ी हुई, मुझे बहुत गुस्सा आया. क्या भगवान ऐसे मदद करते हैं?"
उनकी इस बात ने तब भी काफ़ी लोगों को नाराज़ कर दिया था. यही नहीं, उनके खिलाफ़ पुलिस FIR भी करवा दी गई थी.
‘वाराणसी’ एक साइंस-फिक्शन फिल्म बताई जा रही है. इसमें महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन लीड रोल्स कर रहे हैं. ये फिल्म 7 अप्रैल, 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी.
वीडियो: महेश बाबू की ‘वाराणसी’ फिल्म ने विदेश में कौन-सा इतिहास रच दिया?

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