क्या राजामौली BJP एजेंडा के लिए फिल्में बनाते हैं? उन्होंने खुद जवाब दिया है
राजामौली ने कहा कि वो कट्टरवाद से नफरत करते हैं. चाहे वो बीजेपी का हो या मुस्लिम लीग का.

एसएस राजामौली की आखिरी फिल्म RRR को लेकर दो पक्ष उभरते हैं. पहला जो फिल्म के लार्जर दैन लाइफ पक्ष को भरपूर सराहता है. दूसरा जो फिल्म की पॉलिटिक्स पर सवाल उठाता है. फिल्म के गाने ‘एतारा जेंडा’ में स्वतंत्रता वीरों को ट्रिब्यूट दिया गया. लेकिन वहां से महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू गायब थे. इसे लेकर राजामौली पर सवाल उठे कि वो बीजेपी पार्टी के एजेंडा में फिट होने की कोशिश कर रहे हैं. या उस विचारधारा वाले लोगों को अपनी ऑडियंस बनाना चाहते हैं. राजामौली ने इन सब बातों पर अब जवाब दिए हैं. अमेरिकी मैगजीन न्यूयॉर्कर ने उनका लंबा चौड़ा इंटरव्यू लिया. उनके नास्तिक होने से लेकर उनकी फिल्मों की पॉलिटिक्स पर बात की. राजामौली ने अपनी फिल्मों के बीजेपी एजेंडा से कनेक्शन पर कहा:
उन्होंने आगे कहा,
राजामौली ने अपने इंटरव्यू में कहा कि वो किसी भी हिन्दू या सूडो लिबरल प्रोपेगेंडा से दूर रहते हैं. वो इस बात से वाकिफ हैं कि उनकी ऑडियंस के बीच दोनों पक्षों के कट्टर लोग मौजूद हैं. उनका कहना है कि वो उन लोगों के लिए फिल्म नहीं बना रहे. बल्कि अपनी ऑडियंस की भावनात्मक ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए फिल्में बनाते हैं. RRR ने इसी इंटरव्यू में उनके पिता की आनेवाली फिल्म पर भी बात की. उन्होंने बताया कि उनके पिता केवी विजयेंद्र राष्ट्रीय स्वयं संघ (RSS) पर एक फिल्म लिख रहे हैं. राजामौली ने कहा कि उन्हें आरएसएस के बारे में ज़्यादा नहीं पता. ये संघ कब बना, उनकी विचारधारा क्या है, कैसे वो विकसित हुए, ऐसी बातों के बारे में उन्हें नहीं पता. लेकिन उन्होंने अपने पिता की स्क्रिप्ट पढ़ी. उन्होंने बताया कि स्क्रिप्ट पढ़कर वो इमोशनल हो गए थे. कई बार पढ़कर रोए भी. लेकिन उनका कहना है इस रिएक्शन का कहानी के इतिहास वाले हिस्से से कोई लेना-देना नहीं है.
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