20 महीनों के लंबे इंतज़ार के बाद रोहित शेट्टी की 'सूर्यवंशी' फाइनली सिनेमाघरोंमें लग चुकी है. रोहित शेट्टी का ट्रैक रिकॉर्ड आपको पता है. वो पुलिसवालों के ऊपरफिल्में बनाते हैं. गाड़ियां, लॉजिक और फिज़िक्स की धज्जियां उड़ाते हैं. जिसेशास्त्रों में मसाला सिनेमा कहा गया है. हालांकि इस टर्म का जिस तरह से दुरुपयोगहुआ है कि उस पर शास्त्रार्थ हो सकता है. खैर, हम सूर्यवंशी पर फोकस करते है.'सूर्यवंशी' ओरिजिनली मार्च 2020 में रिलीज़ होने वाली थी.फिल्म की कहानी वीर सूर्यवंशी नाम के एक पुलिसवाले की है, जो एंटी-टेररिज़्म स्कॉडमें DCP है. जैसा कि ट्रेलर देखकर अपने को पता चल गया था कि 1993 में एक टन यानीहज़ार किलो RDX मुंबई में आया था. मगर 93 ब्लास्ट में सिर्फ चार सौ किलो हीइस्तेमाल हो पाया था. बाकी 600 किलो RDX अब भी कहीं मुंबई में ही छुपा हुआ है. ऐसेमें हमारे जुड़वा मुल्क के कुछ साथी एक और बड़ा हमला करने की प्लानिंग में लगे हैं.इससे ये आइडिया लगा पाना मुश्किल नहीं है कि इस हमले को सिर्फ एक आदमी रोक सकता है.अपना हीरो वीर सूर्यवंशी. मगर ये सबकुछ जैसे घटता है, वो प्रोसेस बड़ा रेपीटिटीवहै. फिल्म के क्लाइमैक्स को स्क्रीन पर पैन आउट होते देखकर अनायास ही मुंह से फूटपड़ता है- Holiday रियल आईडी से आओ.ये हुई अपने हीरो की स्वैग से भरपूर एंट्री.इस फिल्म में इतने विलन हैं कि एक मिनट को 'चाइना गेट' शर्मा जाए. अरे वो 'छम्माछम्मा' वाली फिल्म की बात कर रहे हैं. जब ये फिल्म अपने विलंस को गंभीरता से नहींलेती, तो वीर सूर्यवंशी क्या खाक सीरियसली लेगा! कुल मिलाकर बात ये है किक्वॉन्टिटी के चक्कर में क्वॉलिटी से समझौता हुआ है. मगर इस समझौते से किसी का कोईफायदा नहीं होता. फिल्म का तो बिल्कुल नहीं. सूर्यवंशी फर्स्ट हाफ मेंअन-कंविन्सिंग मगर बड़े कन्विनिएंट तरीके से फिल्म की कहानी को एस्टैब्लिश करने कीकोशिश करती है. इस दौरान आपकी मुलाकात फिल्म के तमाम विलन लोगों से करवा दी जातीहै. वीर सूर्यवंशी की एक बैकस्टोरी सामने रख दी जाती है. कुछ एक फनी सीन्स,छोटे-मोटे एक्शन सीक्वेंस दिखाकर सेकंड हाफ की भरपूर तैयारी कर ली जाती है.फिल्म के तीन विलन जिसमें से रियाज़ बने अभिमन्यु सिंह को सबसे ज़्यादास्क्रीनस्पेस मिलता है. बाकियों को इस फिल्म में होने भर के भाव से संतुष्ट होनापड़ता है.असली एक्शन सेकंड हाफ में शुरू होता है. फैशनेबल और बड़े लेवल पर प्लैन किए गएएक्शन सीक्वेंस का एग्ज़ीक्यूशन शुरू होता है. उन सीन्स को स्क्रीन पर घटता देखकरलगता है कि इन पर बहुत पैसे, एनर्जी और दिमाग खर्च किया गया है. सबकुछ बड़े फैंसीतरीके से हो जाता है. अपीलिंग विज़ुअल्स से आपको लुभाने की कोशिश की जाती है. फिरभी ऐसा लगता है कि कुछ कमी लग रही है. तभी आपका ध्यान जाता है फिल्म की कहानी पर.तब जाकर आपको बात समझ आती है कि ये एक्शन सीक्वेंस कहानी के इर्द-गिर्द नहीं, इनएक्शन पीसेज़ के इर्द-गिर्द कहानी बुनी गई है. और वहां आप तगड़े तरीके का लेट डाउनफील करते हैं.शानदार दिखने वाले एक्शन सीक्वेंस, जिसमें अक्षय कुमार हेलिकॉप्टर से लटक जाते हैं.और उनके साथ-साथ फिल्म की कहानी भी.मगर रोहित शेट्टी से आप स्मार्ट और सेंसिबल कॉप मूवी एक्सपेक्ट नहीं करते, तो आपकोलगता है चलो ठीक है. फिर हिंदू-मुस्लिम वाला मसला शुरू होता है. बॉम्ब स्केयर केबीच कुछ मुस्लिम लोग गणेश जी की मूर्ति उठवाने में हिंदू भाइयों की मदद करते हैं.बैकग्राउंड में पुराने हिंदू-मुस्लिम एकता से जुड़े देशभक्ति गाने का रिहैश्डवर्ज़न बजता है. एक और टची टॉपिक पर लेक्चर देकर फिल्म आगे बढ़ जाती है.अपनी हीरोइन कटरीना कैफ. इन्होंने फिल्म के गाने टिप-टिप बरसा पानी पे गज़ब का पानीफेरा है.फिर डायरेक्टर को रियलाइज़ होता है कि यार वुमन एंपावरमेंट वाला मसला तो रह ही गया.ऐसे सीन में आती हैं कटरीना कैफ, जिन्होंने वीर सूर्यवंशी की पत्नी रिया का रोलकिया है. सूर्यवंशी बाबू फिल्म में एक से ज़्यादा बार अपनी पत्नी का नाम भूल जातेहैं. जैसे 'गोलमाल' सीरीज़ में जॉनी लीवर का 'भूला' वाला कैरेक्टर है. खैर, एकखतरनाक इंसिडेंट के बाद रिया अपने बेटे के साथ इंडिया छोड़कर जाने की प्लानिंग करतीहै. क्योंकि वो सूर्यवंशी की लापरवाही से आजिज़ आ चुकी है. मगर तमाम खामियों केबावजूद फिल्म के फाइनल एक्ट में रिया, सूर्यवंशी से माफी मांगकर अपना प्लैन कैंसिलकर लेती है. इस सबके बीच आपको नैरेटिव में जबरदस्ती का ठूंसा हुआ 'टिप टिप बरसा' कारीमिक्स्ड वर्ज़न भी देखने-सुनने को मिलता है. जिसमें रत्तीभर की सेंसुअसनेस आपकोमहसूस नहीं होती.वीर सूर्यवंशी का छोटा और सुखी परिवार. जो सूर्यवंशी साहेब की वजह से दुखी परिवारमें तब्दील हो जाता है. मगर वो फिल्म के हीरो हैं, इसलिए डायरेक्टर और हीरोइन दोनोंही ये बात उन्हें बता नहीं पाते. हमने आपको बता दिया, आप किसी को मत बताइएगा.तमाम पहलूओं पर बात करने के बावजूद हमें एक चीज़ का ध्यान रखना होगा कि हम इस फिल्मको पूरी तरह खारिज़ नहीं कर सकते. क्योंकि आपको पता था कि आप क्या देखने जा रहेहैं. इसलिए 'सूर्यवंशी' को एक ब्रेनलेस कॉप एक्शन ड्रामा की तरह ही देखा जानाचाहिए. इस फिल्म को हमें लॉजिक नहीं, फन ढूंढने के मक़सद से देखना चाहिए.सिनेमाघरों की धुंआधार वापसी के लिए देखना चाहिए. ढेर सारे लोगों के बीच सीटियों औरतालियों की गड़गड़ाहट से आने वाले गूज़बंप्स के लिए देखना चाहिए. अक्षय कुमार औररोहित शेट्टी के पहले कोलैबरेशन को एंजॉय करने के लिए देखना चाहिए. हमें ये सारीबातें फिल्म देखने से पहले और फिल्म देखने के बाद समझ आईं. मगर दिल और दिमाग की इसलड़ाई का क्या करें, जिसमें हर बार दिमाग जीत जाता है.पिक्चर का मेन विलन, जो 'सूर्यवंशी' में 'सिंघम' सीरीज़ की अगली फिल्म की तैयारी केलिए है.