BHU के इन 10 विवादों को जानेंगे तो खुदहै कहेंगे- वीसी साहब, तुमसे न हो पाएगा
वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी नवंबर 2014 से वाइस चांसलर हैं.
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इससे पहले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में इकॉनमिक्स के प्रोफेसर थे.
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गिरीश चंद्र त्रिपाठी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, संक्षेप में कहें तो बीएचयू के कुलपति यानी वाइस चांसलर हैं. छेड़खानी के विरोध में जो छात्राएं दो दिनों से बीएचयू के गेट पर बैठी हैं, उनकी मांग बस इनसे मिलने और मिलकर अपनी बात रखने की है. लेकिन वो नहीं आ रहे हैं. शायद न भी आएं और लड़कियां मजबूर होकर अपना अनशन खत्म कर दें.

छेड़खानी के विरोध में लड़कियां दो दिनों से बीएचयू गेट पर बैठी हैं.
हम इस बात पर बस एक कयास लगा रहे हैं और ये कयास यूं ही नहीं हैं. गिरीश चंद्र त्रिपाठी के वीसी बनने के बाद से बीएचयू अक्सर विवादों में रहा है. हर बात पर प्रदर्शन होता है और वीसी खुद सामने न आकर प्रॉक्टर या किसी और को भेज देते हैं और विवाद खत्म हो जाता है. अब जबकि महामना की बगिया कहे जाने वाले बीएचयू की लड़कियां अपनी सुरक्षा के लिए प्रदर्शन कर रही हैं तो गिरीश चंद्र त्रिपाठी एक बार फिर मौके पर जाने की ज़हमत नहीं उठा रहे हैं. वीसी की नियुक्ति से लेकर उनके कार्यकाल में हुए विवादों पर एक नजर:
वीसी प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी की नियुक्ति नवंबर 2014 में हुई थी.
गिरीश चंद्र त्रिपाठी की बतौर वीसी नियुक्ति भी विवादों में रही है. वो आरएसएस के करीबी हैं और बीएचयू से जुड़ने से पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के साथ थे. नवंबर 2014 में उन्हें बीएचयू का वीसी नियुक्त किया गया. सेलेक्शन कमिटी के सामने उनके नाम के अलावा संघ से पुराना जुड़ाव रखने वाले और बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय के पौत्र रिटायर्ड जस्टिस गिरिधर मालवीय का भी नाम था.
एक मूर्ति को अश्लील बताकर उसे कपड़े पहना दिए गए थे. इसका खूब विरोध हुआ था.
यूनिवर्सिटी में मधुवन नाम की जगह पर दशहरा के दौरान दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है. यहां यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं का जमावड़ा लगा रहता है. इसी मधुवन के बीचो-बीच लगभग 20 फुट ऊंची महिला की कलात्मक मूर्ति लगी है, जिसे 40 साल पहले यूनिवर्सिटी के ही फाइन आर्ट्स के स्टूडेंट्स ने बनाया था. अक्टूबर 2015 में अचानक मूर्ति में अश्लीलता नज़र आने लगी और उसे स्कर्ट-टॉप पहना दिया गया. विरोध हुआ तो मूर्ति फिर पहले ही तरह हो गई. इस मामले में वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी की ओर से किसी तरह का बयान जारी नहीं किया गया था.
बीएचयू के छात्रों ने 24 घंटे लाइब्रेरी की सुविधाओं की मांग के लिए कई दिनों तक धरना दिया था.
23 मई 2016 को बीएचयू में साइबर लाइब्रेरी की मांग उठी थी. छात्रों के एक समूह ने मांग की थी कि बीएचयू में साइबर लाइब्रेरी बनाई जाए, जिससे कि स्टूडेंट्स को पढ़ाई का मौका मिल सके. बाद में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे. प्रदर्शन करने वाले छह छात्रों को यूनिवर्सिटी से सस्पेंड कर दिया गया था. इस मामले में वीसी ने कहा था कि जो लोग लाइब्रेरी की मांग कर रहे हैं, वो साल में एक बार भी लाइब्रेरी नहीं जाते हैं. अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ.
पटना यूनिवर्सिटी ने प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी को मानद उपाधि दी है.
27 अक्टूबर 2016 को बीएचयू वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी को पटना विश्वविद्यालय ने अपने शताब्दी समारोह में मानद उपाधि देने का ऐलान किया. इसके बाद विवाद पैदा हो गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मानद उपाधि यूनिवर्सिटी के एकेडमिक काउंसिल और सिंडिकेट के अप्रूवल के बिना ही दी गई थी. सिनेट, सिंडिकेट और एकेडमिक काउंसिल के सदस्य, जिनके पास मानद उपाधि देने वाले लोगों को चुनने का अधिकार होता है, उन्हें भी इस बात का पता तब चला, जब मंच से वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी को मानद उपाधि देने की घोषणा की गई.
संदीप पांडेय की बर्खास्तगी को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था.
पांच जनवरी 2017 को नक्सल समर्थक होने के आरोप में मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय को यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया. इसका पत्र खुद वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने जारी किया था. हालांकि इसमें वजह नहीं बताई गई थी. संदीप पांडेय यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर थे. इसके खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया था. 22 अप्रैल 2017 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संदीप पांडेय की बर्खास्तगी रद्द कर दी थी.
गलत इंजेक्शन लगने से सात मरीजों की आंख की रोशनी चली गई थी.
28 जनवरी को बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में आंखों का इलाज करवाने पहुंचे पांच लोगों का ऑपरेशन किया गया था. ऑपरेशन के बाद इन्हें आंखों से दिखना बंद हो गया था. वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने मामले की जांच के आदेश दिए थे. जांच में सामने आया कि खराब इंजेक्शन की वजह से सबकी आंखों को नुकसान पहुंचा था. हाई कोर्ट में मामला पहुंचा और कोर्ट ने मुआवजे के साथ ही मुफ्त में सभी का इलाज करवाने का आदेश दिया था.
बीएचयू में ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत का मामला सामने आया था.
6-7 जून 2017 को बीएचयू के ही सर सुंदर लाल अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से कई मरीजों की मौत का मामला सामने आया था. वीसी की ओर से कहा गया था कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है. इस मामले में भी हंगामा हुआ था. ये मामला भी इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था, जहां कोर्ट ने सभी कागजात तलब किए थे. इस मामले में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के पास लाइसेंस तक नहीं था. कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय है.
लड़के-लड़की में हो रहे भेदभाव के खिलाफ बीएचयू की लड़कियां सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं.
बीएचयू में छात्राओं के लिए बने हॉस्टल के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में इसी साल 29 अगस्त को एक याचिका दाखिल की गई है, जो अभी पेंडिंग है. कोर्ट इस मामले में सुनवाई के लिए तैयार है. याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि छात्राएं रात 8 बजे के बाद हॉस्टल नहीं छोड़ सकती हैं. वो लाइब्रेरी भी नहीं जा सकती हैं, जबकि छात्र रात 10 बजे तक लाइब्रेरी इस्तेमाल कर सकते हैं. छात्राओं को हॉस्टल के कमरे में वाई-फाई लगाने की इजाज़त नहीं है. कपड़ों पर भी तरह-तरह की पाबंदी लगाई गई है. लड़कियां हॉस्टल में मांसाहार नहीं खा सकती हैं. रात 10 बजे के बाद मोबाइल फोन पर बात भी करना मना है. वीसी ने इन नए नियमों का बचाव किया था.
वीसी प्रोफेसर त्रिपाठी के खिलाफ राष्ट्रपति के साथ ही प्रधानमंत्री से भी शिकायत की गई है.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बीएचयू के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी की शिकायत प्रधानमंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी के साथ ही राष्ट्रपति से भी की गई है. आजमगढ़ के रहने वाले शिकायतकर्ता हरिकेश बहादुर सिंह ने 22 फरवरी 2017 को राष्ट्रपति को संबोधित पत्र में कुलपति की शिकायत की थी. मामला एक निजी कॉलेज के निर्माण में आर्थिक सहायता से जुड़ा होना बताया जा रहा है. 23 अगस्त को राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से सेक्शन ऑफिसर प्रियंवदा रिथीश की ओर से जारी पत्र में मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मामले में विधिक कार्रवाई की बात कही गई है. हालांकि वीसी की ओर से कहा गया था कि यह शिकायत उन्हें और यूनिवर्सिटी को बदनाम करने के लिए की गई है.
बीएचयू में अक्सर तोड़फोड़, मारपीट और आगजनी की घटनाएं सामने आती हैं.
पिछले दो साल के दौरान बीएचयू में हंगामों की संख्या में इजाफा हुआ है. कभी सर सुंदर लाल अस्पताल में डॉक्टर और रेजिडेंट भिड़ जाते हैं तो कभी डॉक्टरों से तीमारदारों की मारपीट हो जाती है. छात्र आए दिन किसी न किसी बात पर हंगामा करते रहते हैं और यूनिवर्सिटी प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है. खुद डीएम विजय किरन आनंद इस बात को मान चुके हैं कि लंका थाने की पुलिस का ज्यादातर वक्त बीएचयू में हो रहे झगड़ों को निपटाने में ही निकल जाता है. विवाद के दौरान वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी बहुत कम मौकों पर घटनास्थल पर पहुंचते हैं, जिससे छात्रों में उनके खिलाफ आक्रोश रहता है.
दो दिनों से जो लड़कियां अपनी सुरक्षा और आजादी के लिए धरना दे रही हैं, उनकी सुरक्षा का वादा करना और उस पर अमल करना ही सबसे बेहतर समाधान है. मांग जितनी आसान है, उस पर अमल करना उससे भी आसान लेकिन पता नहीं क्यों वीसी अपने घर से 500 मीटर दूर बैठी इन लड़कियों के पास पहुंचकर उनसे मुलाकात नहीं कर रहे हैं.
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वीडियो में देखें बीएचयू में लड़कियों की हालत:

छेड़खानी के विरोध में लड़कियां दो दिनों से बीएचयू गेट पर बैठी हैं.
हम इस बात पर बस एक कयास लगा रहे हैं और ये कयास यूं ही नहीं हैं. गिरीश चंद्र त्रिपाठी के वीसी बनने के बाद से बीएचयू अक्सर विवादों में रहा है. हर बात पर प्रदर्शन होता है और वीसी खुद सामने न आकर प्रॉक्टर या किसी और को भेज देते हैं और विवाद खत्म हो जाता है. अब जबकि महामना की बगिया कहे जाने वाले बीएचयू की लड़कियां अपनी सुरक्षा के लिए प्रदर्शन कर रही हैं तो गिरीश चंद्र त्रिपाठी एक बार फिर मौके पर जाने की ज़हमत नहीं उठा रहे हैं. वीसी की नियुक्ति से लेकर उनके कार्यकाल में हुए विवादों पर एक नजर:
1. नियुक्ति पर विवाद

वीसी प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी की नियुक्ति नवंबर 2014 में हुई थी.
गिरीश चंद्र त्रिपाठी की बतौर वीसी नियुक्ति भी विवादों में रही है. वो आरएसएस के करीबी हैं और बीएचयू से जुड़ने से पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के साथ थे. नवंबर 2014 में उन्हें बीएचयू का वीसी नियुक्त किया गया. सेलेक्शन कमिटी के सामने उनके नाम के अलावा संघ से पुराना जुड़ाव रखने वाले और बीएचयू के संस्थापक मदन मोहन मालवीय के पौत्र रिटायर्ड जस्टिस गिरिधर मालवीय का भी नाम था.
2. यूनिवर्सिटी में कलात्मक मूर्ति को कपड़े पहना देना

एक मूर्ति को अश्लील बताकर उसे कपड़े पहना दिए गए थे. इसका खूब विरोध हुआ था.
यूनिवर्सिटी में मधुवन नाम की जगह पर दशहरा के दौरान दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है. यहां यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं का जमावड़ा लगा रहता है. इसी मधुवन के बीचो-बीच लगभग 20 फुट ऊंची महिला की कलात्मक मूर्ति लगी है, जिसे 40 साल पहले यूनिवर्सिटी के ही फाइन आर्ट्स के स्टूडेंट्स ने बनाया था. अक्टूबर 2015 में अचानक मूर्ति में अश्लीलता नज़र आने लगी और उसे स्कर्ट-टॉप पहना दिया गया. विरोध हुआ तो मूर्ति फिर पहले ही तरह हो गई. इस मामले में वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी की ओर से किसी तरह का बयान जारी नहीं किया गया था.
3. 24 घंटे लाइब्रेरी न खोलने पर विवाद

बीएचयू के छात्रों ने 24 घंटे लाइब्रेरी की सुविधाओं की मांग के लिए कई दिनों तक धरना दिया था.
23 मई 2016 को बीएचयू में साइबर लाइब्रेरी की मांग उठी थी. छात्रों के एक समूह ने मांग की थी कि बीएचयू में साइबर लाइब्रेरी बनाई जाए, जिससे कि स्टूडेंट्स को पढ़ाई का मौका मिल सके. बाद में प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे. प्रदर्शन करने वाले छह छात्रों को यूनिवर्सिटी से सस्पेंड कर दिया गया था. इस मामले में वीसी ने कहा था कि जो लोग लाइब्रेरी की मांग कर रहे हैं, वो साल में एक बार भी लाइब्रेरी नहीं जाते हैं. अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हुआ.
4.बिहार में मिली मानद उपाधि पर विवाद

पटना यूनिवर्सिटी ने प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी को मानद उपाधि दी है.
27 अक्टूबर 2016 को बीएचयू वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी को पटना विश्वविद्यालय ने अपने शताब्दी समारोह में मानद उपाधि देने का ऐलान किया. इसके बाद विवाद पैदा हो गया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मानद उपाधि यूनिवर्सिटी के एकेडमिक काउंसिल और सिंडिकेट के अप्रूवल के बिना ही दी गई थी. सिनेट, सिंडिकेट और एकेडमिक काउंसिल के सदस्य, जिनके पास मानद उपाधि देने वाले लोगों को चुनने का अधिकार होता है, उन्हें भी इस बात का पता तब चला, जब मंच से वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी को मानद उपाधि देने की घोषणा की गई.
5. प्रोफेसर संदीप पांडेय की बर्खास्तगी पर विवाद

संदीप पांडेय की बर्खास्तगी को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था.
पांच जनवरी 2017 को नक्सल समर्थक होने के आरोप में मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय को यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया. इसका पत्र खुद वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने जारी किया था. हालांकि इसमें वजह नहीं बताई गई थी. संदीप पांडेय यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर थे. इसके खिलाफ छात्रों ने प्रदर्शन किया था. 22 अप्रैल 2017 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संदीप पांडेय की बर्खास्तगी रद्द कर दी थी.
6. बीएचयू में चली गई सात लोगों के आंख की रोशनी

गलत इंजेक्शन लगने से सात मरीजों की आंख की रोशनी चली गई थी.
28 जनवरी को बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में आंखों का इलाज करवाने पहुंचे पांच लोगों का ऑपरेशन किया गया था. ऑपरेशन के बाद इन्हें आंखों से दिखना बंद हो गया था. वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने मामले की जांच के आदेश दिए थे. जांच में सामने आया कि खराब इंजेक्शन की वजह से सबकी आंखों को नुकसान पहुंचा था. हाई कोर्ट में मामला पहुंचा और कोर्ट ने मुआवजे के साथ ही मुफ्त में सभी का इलाज करवाने का आदेश दिया था.
7. ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत

बीएचयू में ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत का मामला सामने आया था.
6-7 जून 2017 को बीएचयू के ही सर सुंदर लाल अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से कई मरीजों की मौत का मामला सामने आया था. वीसी की ओर से कहा गया था कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई है. इस मामले में भी हंगामा हुआ था. ये मामला भी इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था, जहां कोर्ट ने सभी कागजात तलब किए थे. इस मामले में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के पास लाइसेंस तक नहीं था. कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय है.
8.सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची लड़कियां

लड़के-लड़की में हो रहे भेदभाव के खिलाफ बीएचयू की लड़कियां सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं.
बीएचयू में छात्राओं के लिए बने हॉस्टल के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में इसी साल 29 अगस्त को एक याचिका दाखिल की गई है, जो अभी पेंडिंग है. कोर्ट इस मामले में सुनवाई के लिए तैयार है. याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि छात्राएं रात 8 बजे के बाद हॉस्टल नहीं छोड़ सकती हैं. वो लाइब्रेरी भी नहीं जा सकती हैं, जबकि छात्र रात 10 बजे तक लाइब्रेरी इस्तेमाल कर सकते हैं. छात्राओं को हॉस्टल के कमरे में वाई-फाई लगाने की इजाज़त नहीं है. कपड़ों पर भी तरह-तरह की पाबंदी लगाई गई है. लड़कियां हॉस्टल में मांसाहार नहीं खा सकती हैं. रात 10 बजे के बाद मोबाइल फोन पर बात भी करना मना है. वीसी ने इन नए नियमों का बचाव किया था.
9. राष्ट्रपति तक पहुंची है वीसी की शिकायत

वीसी प्रोफेसर त्रिपाठी के खिलाफ राष्ट्रपति के साथ ही प्रधानमंत्री से भी शिकायत की गई है.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बीएचयू के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी की शिकायत प्रधानमंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी के साथ ही राष्ट्रपति से भी की गई है. आजमगढ़ के रहने वाले शिकायतकर्ता हरिकेश बहादुर सिंह ने 22 फरवरी 2017 को राष्ट्रपति को संबोधित पत्र में कुलपति की शिकायत की थी. मामला एक निजी कॉलेज के निर्माण में आर्थिक सहायता से जुड़ा होना बताया जा रहा है. 23 अगस्त को राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से सेक्शन ऑफिसर प्रियंवदा रिथीश की ओर से जारी पत्र में मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मामले में विधिक कार्रवाई की बात कही गई है. हालांकि वीसी की ओर से कहा गया था कि यह शिकायत उन्हें और यूनिवर्सिटी को बदनाम करने के लिए की गई है.
10. विवाद और भी हैं

बीएचयू में अक्सर तोड़फोड़, मारपीट और आगजनी की घटनाएं सामने आती हैं.
पिछले दो साल के दौरान बीएचयू में हंगामों की संख्या में इजाफा हुआ है. कभी सर सुंदर लाल अस्पताल में डॉक्टर और रेजिडेंट भिड़ जाते हैं तो कभी डॉक्टरों से तीमारदारों की मारपीट हो जाती है. छात्र आए दिन किसी न किसी बात पर हंगामा करते रहते हैं और यूनिवर्सिटी प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है. खुद डीएम विजय किरन आनंद इस बात को मान चुके हैं कि लंका थाने की पुलिस का ज्यादातर वक्त बीएचयू में हो रहे झगड़ों को निपटाने में ही निकल जाता है. विवाद के दौरान वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी बहुत कम मौकों पर घटनास्थल पर पहुंचते हैं, जिससे छात्रों में उनके खिलाफ आक्रोश रहता है.
दो दिनों से जो लड़कियां अपनी सुरक्षा और आजादी के लिए धरना दे रही हैं, उनकी सुरक्षा का वादा करना और उस पर अमल करना ही सबसे बेहतर समाधान है. मांग जितनी आसान है, उस पर अमल करना उससे भी आसान लेकिन पता नहीं क्यों वीसी अपने घर से 500 मीटर दूर बैठी इन लड़कियों के पास पहुंचकर उनसे मुलाकात नहीं कर रहे हैं.
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बीएचयू में लड़कियों का हाल: पेट दर्द की शिकायत पर ‘टू फिंगर टेस्ट’ कराया जो रेप केस में भी बैन है
'और भी काम हैं जमाने में VC साहेब, एक BHU को बर्बाद करने के सिवा'
संस्कारी लोग न पढ़ें कोठे वाली लड़की की ये 'अश्लील' कहानी
वीडियो में देखें बीएचयू में लड़कियों की हालत:
