"शाहरुख को लोगों को रिस्पेक्ट देना आता है, मगर सलमान..."
सुरेश वाडकर ने बताया कि सलमान, शाहरुख और आमिर का ऑफ-स्क्रीन मिज़ाज कैसा है.

Suresh Wadkar ने भारतीय सिनेमा के नामी एक्टर्स के लिए गाने गाए हैं. इनमें Rajesh Khanna से लेकर Amitabh Bachchan और Shahrukh Khan, Salman Khan Aamir Khan से लेकर Shahid Kapoor के गाने भी शामिल हैं. बल्कि शाहरुख का तो पहला गाना ही सुरेश वाडकर ने गाया है. फिल्म थी Dil Aashna Hai. गाने के बोल भी यही हैं. Hema Malini ने इस फिल्म से अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू किया था. इस तरह सुरेश वाडकर का राबता सलमान, शाहरुख और आमिर से फिल्मों के इतर भी है. वो इन तीनों से तब से जुड़े हैं, जब ये फिल्मों में आए भी नहीं थे. और बकौल सुरेश वाडकर तीनों के मिज़ाज में बहुत फ़र्क है.
पिछले दिनों जब सुरेश वाडकर दी लल्लनटॉप के विशेष कार्यक्रम गेस्ट इन द न्यूज़रूम में आए, तो इस बारे में लंबी चर्चा की. शाहरुख के बारे में उन्होंने कहा
“शाहरुख जब भी जहां भी मिलते हैं, बहुत प्यार से मिलते हैं. दिल आशना गाने से भी पहले मेरा टीवी पर एक प्रोग्राम था. उसकी एंकरिंग की है शाहरुख ने. तब तो फिल्मों में भी नहीं आए थे वो. शाहरुख दिल से बहुत शांत और अच्छा बंदा है. और सामने वाले को सम्मान कैसे देना है, ये उसे आता है. हो सकता है दिल्ली वाला है इसलिए एटिकेट्स बहुत अच्छे हैं उसके.”
सलमान खान से वो पहली बार इंदौर में उनके घर, खान बिल्डिंग में मिले थे. सलमान के बारे में सुरेश वाडकर ने कहा,
“सलमान दबंग है. वो ऐसा है कि अच्छा लगा आदमी तो ठीक है. नहीं तो बहुत ज़्यादा किसी को भाव नहीं देता. बहुत ज़्यादा मुलाक़ात नहीं होती. मगर जब भी मिले हैं हम लोग, बहुत प्यार से मिले हैं. और सलमान को याद है एक ख़ास किस्सा. मैंने एक दिन पूछा कि ‘सलमान याद है, मैंने आपको बच्चा देखा हुआ है?' वो बोला ‘बिल्कुल याद है. आप आते थे'. तब मैं इंदौर जाता रहता था. वहां के बहुत बड़े सिंगर हैं अरुण दाते और रवि दाते. तो हम लोग इंदौर में सलीम साहब से मिलने जाते थे. इतना सा था सलमान. अरबाज़ मेरे साथ स्कवॉश खेलता था.”
वहीं आमिर को उन्होंने मिलनसार और मृदुभाषी बताया. कहा,
"आमिर तो बहुत ही अच्छा लड़का है. मिलनसार है. हम लोग मेरे म्यूजिक स्कूल में एक फेस्ट करते हैं हर साल. उसमें उन्हें बतौर स्पीकर इन्वाइट किया था. तो आमिर आया था. और अपनी गुरु को भी लेकर आया था. इन दिनों गाना सीख रहे हैं आमिर. क्लासिकल. एक बार मैं और पद्मा न्यूयॉर्क से आ रहे थे, तो हम राइट विंग में बैठे थे. और आमिर किरण राव के साथ लेफ्ट साइड में बैठे थे. टेक ऑफ के 15-20 मिनट के बाद आमिर आए मेरे पास खड़े होकर वहीं प्लेन में ही मुझसे बात करने लगे. वो भी कोई घंटाभर. बोले सुरेश मुझे आपसे कुछ बात करनी है."
# ‘लगान’ के सेट तक गायत्री मंत्र सुनते हुए जाते थे आमिर
आमिर ने उनसे क्या कहा, ये बताते हुए सुरेश वाडकर बोले,
“बहुत कमाल किस्सा है ये भी. ‘ओ प्रिया-प्रिया…’, दिल का गाना है. (फिर कुछ मुस्करा कर बोले) फिर माधुरी का नाम आएगा. अच्छा नहीं लगा था जब माधुरी के गाल पर आमिर ने मारा था. तो किस्सा यूं हैं कि आमिर बोला- ‘हम लोग लगान की शूटिंग कर रहे थे. और सेट जहां लगा हुआ था, वो शहर से दूर बनाया हुआ था. तो शहर से दूर सेट पर पहुंचने तक आपका गाया हुआ गायत्री मंत्र हम रोज़ सुनते थे. एक ही कैसेट चलती थी गाड़ी में. ये मैं आपको बताना चाहता था’.”
कुछ मधुर कुछ मस्खरे मिज़ाज के सुरेश वाडकर के कंठ में मिठास है, ये सबसे पहले उनके पिता ईश्वर वाडकर ने महसूस किया. तब सुरेश महज़ चार साल के थे. उनके पिता ने उन्हें अपने गुरु से मिलाया. सुरेश के पिता थे तो मिल वर्कर. मगर शास्त्रीय संगीत में उनकी रुचि थी. और उस वक्त वो विधिवत संगीत सीख भी रहे थे. और ये गुरु सुरेश के ही घर में रहते थे. तो एक दिन सुरेश आंगन में रखी बेंच बजाते हुए राग भीमपलासी की एक बंदिश गा रहे थे. गुरुजी ने उन्हें अंदर बुलाया. उससे पहले कभी तबले-हारमोनियम को छूने भी नहीं देते थे. मगर उस दिन ख़ुद बैठाया और पूछा कि ये बंदिश कहां से सीखी? सुरेश ने कहा- ‘जब आप सबको सिखाते थे, तब बाहर बैठकर सुनता था. तो याद हो गई.’ सुरेश ने पूरी बंदिश. सरगम. तानें, आकार सब गाकर बताया. बस उसी दिन संगीत की उनकी बकायदा तालीम शुरुआत हुई. और आगे चलकर हिंदी सिनेमा को एक पुरसुकून आवाज़ मिली.
वीडियो: गेस्ट इन द न्यूजरूम: 'चप्पा चप्पा चरखा चले' के पीछे की कहानी, लता क्यों हुई थीं नाराज? सुरेश वाडकर ने सब बताया

