दो खबरे हैं. पहली लखनऊ से 70 किलोमीटर दूर कुरमापुर गांव की. शिव कुमार की शादीहोने वाली थी. बारात ले जाने में कई जनम खर्च कर दिए. बारात लेकर पहुंचे तो वहांघरातियों का खाना शुरू हो गया था. वहां दूल्हे के रिश्तेदार ने दो रसगुल्ले मांगेनाश्ते में. उधर से एक एक देने का ऑर्डर था. मामला बिगड़ गया. लड़की वाले उखड़ गए.लड़के वालों ने दुल्हन के पापा को गरिया दिया. लड़की ने शादी के लिए मना कर दिया.दूल्हा बाबू अपना गधे सा मुंह लेकर लौट गए. दूसरी खबर है बेगूसराय, बिहार के साठाचक्का गांव की. वहां दूल्हा आया, बारात आई, बस डीजे नहीं आया. फिर शादी में मार मचगई. खूनखच्चर हो गया. 19 तारीख की शादी तय थी. दूल्हा बबलू जब बारात लेकर पहुंचा तोवहां लड़की वालों ने बमचक मचा दी. काहे कि वो डीजे नहीं लाया था. पहले बातचीत फिरगाली फिर हाथापाई फिर कुटम्मस. लड़के के रिश्तेदारों को दबोच के कोठरी में बंद करदिया. बाराती भाग गए. अचानक पता नहीं कहां से साउंड सिस्टम वाला लड़का आ टपका. शादीके लिए लार चुआ दिहिस और लड़की के मम्मी पापा ने उसे दूल्हा बना दिया. दूल्हा बबलूकी ऐसी तैसी हो गई. शादीशुदा जीवन शुरू होने से पहले ही निपट गया. ये दो खबरें हैंजो जान गए हो. ऐसी न जाने कितनी खबरें हैं जो गांव से लीक नहीं हो पातीं. उनको कांडकहते हैं. लास्ट में जाकर शादी टूट जाती है. हम उन सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक,वैवाहिक, आध्यात्मिक, प्राकृतिक कारणों की विवेचना करेंगे जिनकी वजह से अपने देशमें शादी जैसा पवित्र बंधन बंधने से पहले ही तड़ाक से टूट जाता है. #1 सेट वाली कपन होना बारात आने और शादी होने से पहले जरूरी है शादी तय होना. सबसे मुश्किल टास्कतो यही है. नासा के लिए एलियन खोजना आसान है, लेकिन शादी लायक 'मटीरियल' लड़कीलड़का खोजना महा जटिल. अक्सर लड़की वाले लड़का देखने जाते हैं तो इसलिए घोड़े जैसामुंह लटकाए लौट आते हैं कि वहां उन्हें दो रंग के कप में चाय मिल गई थी. अर्थात कपका सेट नहीं था. या लड़के की मां ने पीले रंग की चप्पल पहन रखी थीं जिसकी डिजाइनलड़की की मां को पसंद नहीं आई. इससे उनके घर का घटिया कल्चर पता चलता था तो शादी केलिए मना कर दिया. #2 बकरियों की गंध कई बार घर के बाहर बंधी बकरियां भी शादी तोड़नेके काम आती हैं. लड़की वाले लड़का देखकर आते हैं और अपने पड़ोसियों को बताते हैं"बकरियन का मूत इतना गंधा रहा था, हमारी बिटिया तो पागल हुइ जाती वहां." #3 सास काबक्सा अब आओ शादी पर. तिलक होता है न. उसमें सब कुछ चढ़ा देते हैं लड़की वाले. साराफल, कैश वगैरह और पैशन प्रो भी. लेकिन वो पीतल वाला बड़ा 'थारा' नहीं आया. शर्मनाकहै ये. चलो ये भी मिल गया तो सास का बक्सा नहीं मिला. फिर तो शादी न हो पाएगी. #4रूह अफजा वाला शर्बत न मिलना बारात शादी की सबसे सत्यानासी चीज होती है. इसमें आयाडेढ़ सौ साल का बुड्ढा भी खुद को 16 साल का छौना समझता है. इनके स्वागत में कमीनहीं रहनी चाहिए नहीं तो ये शादी भंड कर देते हैं. इनको तीन तरह की मिठाई और दो तरहकी नमकीन डिश परोस दो. लेकिन ये सादे शर्बत पर भड़क सकते हैं. एक ड्रम शर्बत में दोढक्कन रूह अफजा इनके गुस्से को फना करने के लिए काफी होता है. #5 कम आवाज वाले गोलेआतिशबाजी कम हो तो दिक्कत. जरूरत से ज्यादा गोले दग जाएं तो झाम. कई बार बारात कोबैरंग वापस इसलिए भी आना पड़ जाता है कि गोलों में सही डेसिमल की आवाज नहीं थी. अगरउनकी गूंज आस पास दस किलोमीटर में नहीं सुनाई देती तो लड़की वाले इस पर भी रिश्तातोड़ सकते हैं. #6 मान्य का सम्मान लड़के वाले लड़की वालों के मान्य होते हैं. औरलड़के वालों के मान्य, लड़की वालों के मान्य के मान्य होते हैं. ये गणित समझनीथोड़ी मुश्किल है. बस ये समझो कि ये लड़के के फूफा-जीजा वगैरह होते हैं. अगर येबारात के दौरान लड़की वालों से सरग की तरोई का हलवा या चिरैया के दूध की काजू कतलीमांगते हैं तो लड़की वालों का फर्ज होता है कि वह उसे लाकर दे. नहीं तो अंजाम मेंअक्सर शादी टूट जाया करती है. #7 खाने में कुर्सी मेज वाला सिस्टम खाने का हिसाबबारात का नहीं, बारात में शामिल हर आदमी का अलग होता है. किसी को पूड़ियों के साथतीन तरह की सब्जी चाहिए. किसी का एक से काम चल जाता है. कोई बिना रायते के खाना गलेसे नीचे नहीं उतारता. कोई टाट पट्टी पर पालथी मारकर खाता है तब तृप्ति मिलती है.किसी को बफ़र सिस्टम पसंद होता है. शादी रहेगी कि टूटेगी, ये बारात में शामिलज्ञानियों के कान भरने पर निर्भर होता है. अगर वो ज्ञानी लड़के वालों को ये समझानेमें कामयाब हो जाएं कि जिस सिस्टम में खाना खिलाया गया वो निहायत वाहियात था, तोशादी टूट जाएगी. #8 दूल्हे के नोटों की माला ये बहुत ज्यादा जरूरी है. दूल्हे सेज्यादा जरूरी उसके गले में नोटों की माला. और आजकल तो ये खतरा भी पैदा हो गया है किदूल्हा 100-100 की नोटों की जगह 10-20 के नोटों की माला पहनकर आए तो शादी टूट नजाए. #9 जूता चुराई में करप्शन ये धर्मसंकट वाली प्रथा है. दुल्हन की बहने औरसहेलियां केंद्र सरकार के वार्षिक बजट से ज्यादा रुपए मांग बैठती हैं और दूल्हेराजा की बधिया बैठ जाती है. वो दिन दूर नहीं है जब जूता वापस करने की रकम में मांगके अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पाएगी और शादी टूट जाएगी. #10 विदाई में कंजूसी ये शादीका आखिरी लेकिन जरूरी कांड होता है. इसमें हर बाराती सूखा प्रभावित किसान की तरहलड़की वालों की तरफ देख रहा होता है. कि अब ये बादल बरसेगा और हमारा घर खुशियों सेभर जाएगा. अगर उस रस्म में लड़की वालों ने एक भी खास बाराती को छोड़ दिया तो होचुकी शादी भी टूट सकती है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:पांच रुपए में 'फट्टा टॉकीज' में फिलिम देखने वालों को 16D न समझाओ, प्लीजसोनू निगम से कहीं ज्यादा बड़ा रिस्क उनके पापा ने लिया था!आसाराम के वो कारनामे जिनके लिए लोग उनको 'मिस' करते हैंअक्षय कुमार की फिल्म न देखी तब भी हो जाएगा देशद्रोह का केस!