यूरो डायरी: 'क्लाउन' क्रिस्टियानो और बाकी कहानियां
मेस्सी सिर्फ बार्सीलोना का खिलाड़ी है और रोनाल्डो दुनिया की किसी भी टीम में खेल सकता है, बशर्ते उसके सिवा कोई और फ्री किक या पेनल्टी किक ना ले.
Cristiano Ronaldo in EURO 2016, Image : Reuters
लल्लनटॉप
20 जून 2016 (Updated: 19 जून 2016, 04:07 AM IST)
यूरोप अौर लातिन अमेरिका दोनों इस समय फुटबॉल के खुमार में डूबे हुए हैं. समकालीन फुटबॉल के दो सबसे बड़े सितारे, क्रिस्टियानो रोनाल्डो अौर लियोनल मेस्सी अपने देशों की टीमों के लिए मैदान पर हैं. इसके साथ ही महानता की बहसें भी. यहां सुशोभित सक्तावत ने 'यूरो कप' पर कुछ विश्लेषणात्मक टिप्पणियां लिखी हैं. जिनके माध्यम से खेल के बदलते मिजाज़ को अौर टूर्नामेंट की दिशा को समझा जा सकता है. सुशोभित इंदौर में रहते हैं. उनके लिखे किस्से, कहानियां अौर आलोचनाएं आप 'दी लल्लनटॉप' पर पहले भी पढ़ते रहे हैं.आपके पास भी कुछ ऐसा हो, जिसे आप सबको पढ़ाना चाहें तो लिख भेजिए lallantopmail@gmail.com पर.
1.
बीती रात हमने पेरिस में एक 'क्लाउन' को देखा और उसका नाम था क्रिस्तियानो रोनाल्डो. सब उस पर हंस रहे थे और वह ख़ुद पर हंस रहा था और अपमान के चरम पर खड़ा होकर सेल्फियां खिंचवा रहा था. ब्राज़ील में जर्मनी के हाथों विश्वकप पराजय के बाद लियोनल मेस्सी की गरिमामयी छवि से रोनाल्डो की इस छवि की तुलना करें तो चीज़ें अपने आप पर्सपेक्टिव के अहाते में आ जाती हैं.
इसी के साथ हमें याद आए सर एलेक्स फ़र्ग्युसन, जिन्होंने मैनचेस्टर यूनाइटेड के अपने इस स्ट्राइकर की अनुशस्ति में कहा था कि रोनाल्डो दुनिया की किसी भी टीम में खेल सकता है, जबकि मेस्सी केवल बार्सीलोना का खिलाड़ी है. यक़ीनन, मेस्सी बार्सीलोना का खिलाड़ी है और बेशक़ रोनाल्डो दुनिया की किसी भी टीम में खेल सकता है, बशर्ते उस टीम में उसके सिवा कोई और फ्री किक या पेनल्टी किक ना ले. मौजूदा यूरो कप में रोनाल्डो अभी तक 16 फ्री किक और पेनल्टी किक ले चुका है और एक को भी गोल में तब्दील नहीं कर पाया है. उसकी ढिठाई चरम पर है और अगर उसके कारण पुर्तगाल इस टूर्नामेंट से बाहर हो जाता है, तो शायद फ़र्ग्युसन अपनी बात में सुधार करते हुए कहें कि जिस रात मेस्सी अर्खेंतीना को कोपा अमेरिका सेमीफ़ाइनल में पहुंचा देता है, उसी रात क्रिस्तियानो ख़ुद को दुनिया की नज़रों में एक जोकर क्यों साबित कर सकता है, चाहे वह किसी भी टीम के लिए खेल रहा हो.
2.
बुद्धिमान से बुद्धिमान फ़ुटबॉल कोच में एक विशिष्ट गुण होता है, जो कि जड़ता कहलाता है. यूरो कप में तो इसका शानदार मुजाहिरा हमें देखने को मिल रहा है. मसलन, फ्रांस के कोच दिदियर देशां का पॉल पोग्बा और अंतोनियो ग्रीज़मान को बेंच पर बैठा देने का निर्णय. यह विराट कोहली और एबी डीविलियर्स के बिना आरसीबी के मैदान में उतरने जैसा था. गनीमत थी कि हाफ़ टाइम में उन्होंने अपनी भूल सुधारी और इन दोनों को मैदान में उतारा. ग्रीज़मान ने गोल दाग़ा और मेज़बान फ्रांस को जीत दिला दी. ठीक ऐसा ही इंग्लैंड के कोच रॉय हॉजसन ने भी कर दिखाया. उन्होंने जेमी वार्डी और डेनियल स्टरिज को बाहर बैठा दिया. हाफ़ टाइम में उन्हें टीम में लाए. इन दोनों ने गोल दाग़े और इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास था. बाय द वे, मिस्टर रॉय हॉजसन, इंग्लिश प्रीमियर लीग के गत सीज़न के "लीडिंग गोल स्कोरर" और लेस्टर को चैंपियन बनाने वाले जेमी वार्डी को बेंच पर बिठाने के बारे में आप सोच भी कैसे सकते थे. आई मीन, सीरियसली!!
3.
क्रिकेट में 'अंतिम समय तक कुछ भी हो सकता है' वाली बात के लिए कहते हैं कि 'It ain't over till the fat lady sings'. फिलवक्त इसे यूरो कप पर लागू कर सकते हैं. कह लीजिए, 'स्टॉपेज टाइम' में कुछ भी हो सकता है. टूर्नामेंट में अभी तक स्टॉपेज टाइम में कोई एक दर्जन गोल हो चुके हैं और टीमों ने हारी हुई बाज़ी उलट दी हैं. यह लाइव कवरेज के साथ आखिरी वक़्त तक जुड़े रहने का एक और इंसेंटिव भी है.
4.
क्रिस्तियानो रोनाल्डो ने आइसलैंडवासियों को 'छोटी मानसिकता' वाला कहकर नाराज़ कर दिया तो उनके रीयल मैड्रिड के साथी गैरेथ बेल ने भी इंग्लैंड की राष्ट्रभावना को छेड़ दिया. यह भी कारण था कि इंग्लैंड और वेल्स के बीच हुआ मैच इस यूरो कप का अब तक का सर्वश्रेष्ठ मैच था और हालांकि जेमी वार्डी और डेनियल स्टरिज के गोलों की मदद से इंग्लैंड ने वह मैच जीता, लेकिन उसे गैरेथ बेल की उस बेमिसाल स्वर्लिंग फ्री किक के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा. केवल और केवल गैरेथ बेल ही वह किक मार सकता था. गनीमत है रोनाल्डो टीम में नहीं था, वरना वह बेल को वह फ्री किक लेने ही नहीं देता!
5.
और अंत में, विश्व चैंपियन जर्मनी इस टूर्नामेंट में पस्त नज़र आ रही है. जर्मनी इकलौती ऐसी टीम है, जिसकी राष्ट्रीय टीम और घरेलू लीग चैंपियन टीम (बायर्न म्यूनिख़) अमूमन एक ही होती है. बायर्न म्यूनिख़ ने इस सत्र में लीग और कप दोनों जीते, अचरज नहीं कि यूरो में जर्मनी थकी हुई लग रही है. नीदरलैंड्स इस बार यूरो के लिए क्वालिफ़ाई ही नहीं कर पाया, लेकिन डिफ़ेंडिंग चैंपियन स्पेन और मेज़बान फ्रांस खिताब के प्रबल दावेदार हैं. इंग्लैंड की टीम में भी धार नज़र आ रही है. लेकिन हमें बेल्जियम पर नज़र रखना चाहिए. यह टीम छुपी रुस्तम साबित हो सकती है. कल ऑस्ट्रिया के खिलाफ़ मैच में बेल्जियम के खिलाडि़यों का खेल शैम्पेन के झाग की तरह था. एब्सोल्यूटली ब्रिलियंट. शीयर फ़ुटबॉल!!