"बच्चा है तू मेरा..." राकेश बेदी ने बताया कि कैसे इस एक डायलॉग ने 'धुरंधर' को पूरा बदल दिया
'धुरंधर' में जमील जमाली का रोल सीरियस रखना चाहते थे आदित्य धर. मगर राकेश बेदी ने उन्हें मजबूर कर दिया.

“स्याना हो गया है मेरा बच्चा. चल आ तुझे फैंटा पिलाता हूं.”
Dhurandhar के Jameel Jamali का ये डायलॉग तो याद ही होगा? जब वो Rahman Dakait जैसे खूंखार बाहुबली को पुचकारते हुए ये बात कहता है. और Dhurandhar 2 का वो सीन जब जमील जमाली, ज़रवारी के बंगले पर पहुंचता है और कहता है,
“ज़रवारी साहब, आपने बतखें तो बड़ी सफ़ेद पाल रखी हैं अपने फार्म हाउस में. योर बटक्स आर रियली व्हाइट.”
ये और इनके समेत जमील जमाली के कई चुटीले डायलॉग फिल्म की स्क्रिप्ट में कहीं थे ही नहीं. न ही किसी ने सोचा था कि जमील जमाली का पात्र ऐसे भी किया जा सकता है. Aditya Dhar तो इस किरदार को सीरियस रखना चाहते थे. मगर Rakesh Bedi ने उन्हें ऐसे-ऐसे जुमले सुनाए. इस कैरेक्टर का ऐसा मज़ेदार इंटरप्रेटेशन दिखाया कि आदित्य धर इस किरदार को चटखारेदार बनाने को मजबूर हो गए. हाल ही में जब राकेश बेदी The Lallantop के ख़ास कार्यक्रम Guest In The Newsroom में आए, तो बताया कि कैसे उन्होंने इस जमील जमाली को यादगार किरदार बना दिया. कुछ बचपन में सुने किस्से, कुछ यहां-वहां से मिले जुमले और ढेर सारा तजुर्बा. बस इन्हीं ने ‘धुरंधर’ का ज़ायका बढ़ा दिया.
बतख वाले डायलॉग के लिए तो आदित्य क़तई राज़ी नहीं थे. फिर राकेश बेदी ने उन्हें डेमो दिया. ये डायलॉग कहां से आया? इसकी उपज कहां की है? और आदित्य इसके लिए कैसे कन्विंस हुए, इस बारे में राकेश बेदी ने कहा,
“बचपन में कहीं सुना था. कुछ लोग बतख को बटक बोल देते थे. तो वो मेरे दिमाग में था. हमने जब ये सीन किया, हमने बैंकॉक में शूट किया था ये सीन. तो उसमें मैं लेट हो गया हूं. राष्ट्रपति मेरा इंतज़ार कर रहे हैं. इतना बड़ा उनका लॉन था. मैंने कहा अगर इसमे बतख वतख हों... तब नहीं थीं बतख. बाद में डालीं. मैंने पूछा आदित्य से कि तुम इसमें बतख डाल सकते हो. वो बोले हां डाल सकता हूं. तब मैंने कहा मैं एक लाइन बोलूंगा. योर बटक्स आर रियली व्हाइट. पहले तो आदित्य इसके लिए तैयार नहीं थे. फिर मैंने डेमो दिया. संजय दत्त, अर्जुन रामपाल सब वहीं बैठे थे. जैसे ही मैंने वो लाइन बोली, सब ज़ोर से हंस पड़े. खूब ठहाके लगे. मैंने कहा, देखो ये लाइन काम करेगी. इसे इस्तेमाल करना चाहिए. आदित्य ने फ़ौरन हामी भरी, और इस तरह वो सीन शूट हुआ.”
ल्यारी का डॉन, रहमान डक़ैत. जिसके नाम से लोग थरथर कांपते हैं. उसे फैंटा पिलाने वाले डायलॉग को डीकोड करते हुए राकेश बेदी ने कहा,
“देखिए... वो जो सीन है ना... फैंटा वाला, वो सीन धुरंधर वन एंड टू का बेस है. वहां से, उस सीन से फिल्म शुरू होती है. जैसे ही मुझे लगा, कि अरे बाप रे! ये आदमी तो मेरा मुक़ाबला कर रहा है यार. ये मेरी गद्दी लेना चाह रहा है. तो बच्चा है तू मेरा वहां से शुरू होता है…चल आ तुझे फैंटा पिलाऊं. अब फैंटा जो है, वो एक मेटाफ़र (रूपक) है. मतलब, चल मैं तुझे सेट करता हूं. तो पूरी फिल्म का प्लेसमेंट जो है, इसके बाद बदलता है. जैसे वो एसपी असलम को फोन करके कहता है कि भैया इसके पर काटने हैं. आ जाओ. अरशद पप्पू से मिलता है. उनको आपस में भिड़ाता है. बस इसी सीन से पूरा खेल शुरू होता है.”
‘धुरंधर’ का वो सीन जब रहमान डकैत के बेटे की मौत हो जाती है, तब जमील जमाली रोते हुए अस्पताल पहुंचता है. इस सीन के बारे में राकेश ने कहा,
“जब हम ये सीन कर रहे थे, तो आदित्य ने मुझसे कहा, कि सर इतना लाउडली मत रोइए. थोड़ा माइल्ड रखिए. हमने उसके हिसाब से पहला टेक किया. फिर मैंने उससे एक बात कही. मैंने कहा देखो यार, ऐसा है... कि आपने देखा होगा कि किसी की डेथ पे कोई आदमी जाए तो वो पास जाकर, उसके कान में जाकर बोलता है, कि भाई तुम्हारे साथ ये हो गया. मुझे इसका बड़ा दु:ख है. लेकिन जो आदमी ऐसा महसूस ही नहीं करता. जो फ्रॉड है. वो दूर से ही दिखावा करते हुए आएगा. मैंने कहा यदि ऐसे ट्रैजिक सीन में वो आदमी लाउड होगा, तो समझिए कि वहीं आपने इस कैरेक्टर का बीज बो दिया. तो मैंने फिर आदित्य ये कहा कि मुझे ये सीन लाउड ही करने दो. फिर वो बाहर गाड़ी में जाकर चप्पल भी पहन रहा है.”
खुशमिज़ाज तबीयत वाले कलाकार राकेश बेदी ने इस इंटरव्यू में ‘धुरंधर’ के साथ ज़िंदगी के क़िस्से भी सुनाए. ख़ुद के लिखे कुछ अशआर भी फ़रमाए, और ख़ूब दाद लूटी. वो उम्दा सुख़़नवर भी हैं. और अक्सर मुशायरों में बुलाए जाते हैं. राकेश बेदी का पूरा इंटरव्यू आप दी लल्लनटॉप के यूट्यूब चैनल और वेबसाइट पर देख सकते हैं.
वीडियो: गेस्ट इन द न्यूजरूम: 'धुरंधर' के जमील जमाली ने सुनाए मजेदार किस्से, रणवीर-अक्षय खन्ना पर क्या बोले राकेश बेदी?

