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ये 14 बातें पढ़कर आपको भी एनकाउंटर पर शक हो जाएगा

सवाल तो बहुत खड़े हुए हैं.

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ऋषभ
1 नवंबर 2016 (Updated: 1 नवंबर 2016, 01:41 PM IST)
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क्या देश में कभी ऐसा हुआ था कि भोर में जेल से अपराधी भागें और दोपहर तक पुलिस उनको ठोंक दे? भोपाल की फेमस सेंट्रल जेल से 8 कैदी भागते हैं. एक हेड कांस्टेबल का गला रेत के. फिर एक गांव में हाथ-मुंह धोते पाए जाते हैं. पुलिस पहुंचती है, मुठभेड़ होती है. आठों मारे जाते हैं.
देश में उत्सव का माहौल बन जाता है. लोग मध्य प्रदेश पुलिस की बड़ाई करते थकते नहीं. तभी किसी को कुछ याद आता है. लोग पुलिस के काम पर सवाल खड़े करने लगते हैं. क्योंकि कहानी पर भरोसा नहीं होता. लोग भरोसा करना तो चाहते हैं, पर सवाल हैं कि रुकते नहीं. अब खीझ होने लगती है. एक मौका आया था खुश होने का. छीनो मत. तब तक वीडियो आ जाते हैं एनकाउंटर के. पता चलता है कि जमीन पर गिरे एक अपराधी को नजदीक से गोली मारी जा रही है. उसे पकड़ा नहीं जा रहा. पर जनता इसको सही ही ठहराती है. क्यों नहीं मारेंगे नजदीक से? कसाब की तरह इसको भी पालना है क्या. मारेंगे. पुलिस की मौत मौत नहीं होती क्या? भोपाल पुलिस की तो कट-टू-कट स्टोरी थी. 8 लोग 2-3 बजे भोर में भागे. रमाशंकर यादव को मार के. पुलिस निकल पड़ी खोज में. 11.30 बजे तक आठों को मार दिया गया.

पर सबकी अपनी-अपनी स्टोरी थी.

1. पुलिस ने कहा उनके पास तमंचे और चाकू थे. उन लोगों ने जबर्दस्त फायरिंग की. जवाब में हमें मारना पड़ा. तमंचे से कितनी जबर्दस्त फायरिंग की जा सकती है. 2. तब तक मध्य प्रदेश पुलिस के आईजी योगेश चौधरी प्रेस कांफ्रेंस करने लगते हैं. बातें क्लियर करने के लिए. कि किस स्थिति में पुलिस ने ये कदम उठाया. पर चौधरी बात को ज्यादा फंसा देते हैं. कहते हैं कि आतंकवादियों के पास धारदार हथियार थे. हमारे कुछ लोगों को गंभीर चोटों आई हैं. क्या हैंड-टू-हैंड फाइट हो रही थी? 3. स्टेट होम मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह ने कहा कि उनके पास कोई हथियार नहीं थे. बर्तनों को हथियार की तरह इस्तेमाल किया. 4. ATS चीफ संजीव शमी ने भी कहा कि उनके पास हथियार नहीं थे.

फिर एक वीडियो फुटेज आई.

जिसमें कथित आतंकवादी एक पहाड़ी पर चढ़े हुए हैं. और पुलिस से बात करने की कह रहे हैं. पुलिस के वॉकी-टॉकी में साफ सुनाई देता है. वो लोग हाथ भी उठाते हैं सरेंडर करने के लिए. 1. अब सवाल ये आता है कि किस एनकाउंटर में पुलिस वाले ही फोन से वीडियो बनाते हैं. क्या ये मैच खेलने जैसा है. जान का डर तो इधर भी था. 2. जब आतंकवादी भयानक हमला कर रहे थे तो पुलिस वाले ऐसे चिल्ल खड़े क्यों थे. 3. फिर एक वीडियो में भीड़ लगी हुई है. काफी चीख-चिल्लाहट हो रही है. एक पुलिस वाला निशाना लेता है. उसके निशाने पर है गोली खाकर गिरा हुआ एक लड़का. उसका हाथ हिल रहा है. गोली लगती है. वो मर जाता है. ये क्यों हुआ? 4. फिर एक पुलिस वाला एक लड़के की जेब से चमकता हुआ चाकू निकालता है. बिना हाथ में दस्ताने पहने हुए. ऐसे कौन इन्वेस्टीगेशन करता है. 5. फिर सारे के सारे मारे गए लड़के घड़ी, बेल्ट और जूते पहने हुए हैं. अंडरट्रायल कैदियों के पास ये कहां से आ गया. फिर जेल से भागते ही क्या उन्होंने घड़ी खरीदी थी. https://www.youtube.com/watch?v=HKV-TwXBgxM

अब बात आती है जेल की.

1. देश की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक जेल है. 2 से 3 बजे भोर में यहां कई कांड हो गए. गार्ड मारा गया. बाकी लोग क्या कर रहे थे. अलार्म भी नहीं बजा. क्यों. 2. 32 फीट ऊंची दीवार पर लाइव तार लगे हुए हैं. इसको टाप के कौन भागेगा. कैसे. 3. इस जेल में ढाई हजार कैदी हैं. क्या किसी को सुबह कुछ पता नहीं चला. 4. अगर ये मान लें कि कैदी भाग सकते थे. पर सारे इस काबिल नहीं थे. कुछ तो फिजिकली फिट नहीं थे. इतनी ऊंची दीवार टापने लायक तो नहीं ही थे. 5. इसी जेल में सिमी का नेता अबू फैजल भी बंद है. उसने कोई कोशिश नहीं की भागने की.
अब एनकाउंटर सही हो या झूठ हो, सवाल तो उठेंगे ही. क्योंकि साक्ष्य सामने है.

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