क्या देश में कभी ऐसा हुआ था कि भोर में जेल से अपराधी भागें और दोपहर तक पुलिसउनको ठोंक दे? भोपाल की फेमस सेंट्रल जेल से 8 कैदी भागते हैं. एक हेड कांस्टेबल कागला रेत के. फिर एक गांव में हाथ-मुंह धोते पाए जाते हैं. पुलिस पहुंचती है,मुठभेड़ होती है. आठों मारे जाते हैं. देश में उत्सव का माहौल बन जाता है. लोग मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ाई करते थकते नहीं. तभी किसी को कुछ याद आता है. लोग पुलिस केकाम पर सवाल खड़े करने लगते हैं. क्योंकि कहानी पर भरोसा नहीं होता. लोग भरोसा करनातो चाहते हैं, पर सवाल हैं कि रुकते नहीं. अब खीझ होने लगती है. एक मौका आया था खुशहोने का. छीनो मत. तब तक वीडियो आ जाते हैं एनकाउंटर के. पता चलता है कि जमीन परगिरे एक अपराधी को नजदीक से गोली मारी जा रही है. उसे पकड़ा नहीं जा रहा. पर जनताइसको सही ही ठहराती है. क्यों नहीं मारेंगे नजदीक से? कसाब की तरह इसको भी पालना हैक्या. मारेंगे. पुलिस की मौत मौत नहीं होती क्या? भोपाल पुलिस की तो कट-टू-कटस्टोरी थी. 8 लोग 2-3 बजे भोर में भागे. रमाशंकर यादव को मार के. पुलिस निकल पड़ीखोज में. 11.30 बजे तक आठों को मार दिया गया.पर सबकी अपनी-अपनी स्टोरी थी.1. पुलिस ने कहा उनके पास तमंचे और चाकू थे. उन लोगों ने जबर्दस्त फायरिंग की. जवाबमें हमें मारना पड़ा. तमंचे से कितनी जबर्दस्त फायरिंग की जा सकती है. 2. तब तकमध्य प्रदेश पुलिस के आईजी योगेश चौधरी प्रेस कांफ्रेंस करने लगते हैं. बातेंक्लियर करने के लिए. कि किस स्थिति में पुलिस ने ये कदम उठाया. पर चौधरी बात कोज्यादा फंसा देते हैं. कहते हैं कि आतंकवादियों के पास धारदार हथियार थे. हमारे कुछलोगों को गंभीर चोटों आई हैं. क्या हैंड-टू-हैंड फाइट हो रही थी? 3. स्टेट होममिनिस्टर भूपेंद्र सिंह ने कहा कि उनके पास कोई हथियार नहीं थे. बर्तनों को हथियारकी तरह इस्तेमाल किया. 4. ATS चीफ संजीव शमी ने भी कहा कि उनके पास हथियार नहीं थे.फिर एक वीडियो फुटेज आई.जिसमें कथित आतंकवादी एक पहाड़ी पर चढ़े हुए हैं. और पुलिस से बात करने की कह रहेहैं. पुलिस के वॉकी-टॉकी में साफ सुनाई देता है. वो लोग हाथ भी उठाते हैं सरेंडरकरने के लिए. 1. अब सवाल ये आता है कि किस एनकाउंटर में पुलिस वाले ही फोन सेवीडियो बनाते हैं. क्या ये मैच खेलने जैसा है. जान का डर तो इधर भी था. 2. जबआतंकवादी भयानक हमला कर रहे थे तो पुलिस वाले ऐसे चिल्ल खड़े क्यों थे. 3. फिर एकवीडियो में भीड़ लगी हुई है. काफी चीख-चिल्लाहट हो रही है. एक पुलिस वाला निशानालेता है. उसके निशाने पर है गोली खाकर गिरा हुआ एक लड़का. उसका हाथ हिल रहा है.गोली लगती है. वो मर जाता है. ये क्यों हुआ? 4. फिर एक पुलिस वाला एक लड़के की जेबसे चमकता हुआ चाकू निकालता है. बिना हाथ में दस्ताने पहने हुए. ऐसे कौनइन्वेस्टीगेशन करता है. 5. फिर सारे के सारे मारे गए लड़के घड़ी, बेल्ट और जूतेपहने हुए हैं. अंडरट्रायल कैदियों के पास ये कहां से आ गया. फिर जेल से भागते हीक्या उन्होंने घड़ी खरीदी थी. https://www.youtube.com/watch?v=HKV-TwXBgxMअब बात आती है जेल की.1. देश की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक जेल है. 2 से 3 बजे भोर में यहां कई कांडहो गए. गार्ड मारा गया. बाकी लोग क्या कर रहे थे. अलार्म भी नहीं बजा. क्यों. 2. 32फीट ऊंची दीवार पर लाइव तार लगे हुए हैं. इसको टाप के कौन भागेगा. कैसे. 3. इस जेलमें ढाई हजार कैदी हैं. क्या किसी को सुबह कुछ पता नहीं चला. 4. अगर ये मान लें किकैदी भाग सकते थे. पर सारे इस काबिल नहीं थे. कुछ तो फिजिकली फिट नहीं थे. इतनीऊंची दीवार टापने लायक तो नहीं ही थे. 5. इसी जेल में सिमी का नेता अबू फैजल भी बंदहै. उसने कोई कोशिश नहीं की भागने की.--------------------------------------------------------------------------------अब एनकाउंटर सही हो या झूठ हो, सवाल तो उठेंगे ही. क्योंकि साक्ष्य सामने है.--------------------------------------------------------------------------------एनकाउंटर को रिपोर्ट करने में मीडिया ने एक बड़ी चूक कर दीमध्य प्रदेश ‘एनकाउंटर’ का तीसरा वीडियो, जिससे पूरी पिक्चर क्लियर हो गई हैपाकिस्तान से आए आतंकी भारत में घुस रहे हैं, एकदम क्लियर वीडियोजो एनकाउंटर में मारे गए, उनके बारे में सबसे डरावनी बात पढ़िएमध्य प्रदेश की जेलों से ही क्यों भागते हैं कैदी?भोपाल एनकाउंटर में सबसे ट्रैजिक कहानी है हेड कॉन्स्टेबल रमाशंकर की!सिमी के संदिग्ध आतंकियों के एनकाउंटर के वक्त का वीडियोहलाली नदी, जहां दोस्त मुहम्मद खान ने नरसिंह देव चौहान को मार दिया थाएक कारोबारी के दिमाग़ की उपज था दिवाली पर पटाखे चलाने का आइडियाइस शहर में किसी भी इंसान को मरने की इजाजत नहीं है