बीजेपी, कांग्रेस, सपा और बसपा सबके नेता जो राज्यसभा में पहुंचेंगे- पूरी लिस्ट एक साथ!
जानिए इस बार BJP, कांग्रेस, SP और BSP की तरफ से राज्यसभा जाने वाले नेताओं के बारे में:
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संसद भवन (बाएं), राज्यसभा (दाएं)
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ऋषभ
ये ऋषभ हैं. दी लल्लनटॉप के साथ काम कर रहे हैं. देश की पॉलिटिकल पार्टियां इस बार जिन लीडर्स को राज्यसभा भेज रही हैं, ऋषभ ने उनके बारे में खोज डाला है. लंबा नहीं, छोटा सा. फुटकर वाला. ताकि आप तत्काल प्रभाव से फटाफट अपडेट हो जाएं. पढ़िए...
चुनाव होते हैं. पर्चा भरते हैं. एक जीतता है, बाकी हारते हैं. मगर राज्यसभा में ऐसी नौबत बहुत कम आती है. सबको अपनी हैसियत पता है. अपने विधायकों की संख्या भी. इसलिए गिन के ही पर्चे भरे जाते हैं. जून से अगस्त के बीच 57 सीटें खाली हो रही हैं. बीजेपी, कांग्रेस, सपा समेत तमाम दलों ने बता दिया कि कौन बनेगा माननीय सांसद. पहले तो ये लिस्ट देखें. और साथ में ये भी कि किसके नाम पर क्यों मुहर लगी.
बीजेपी
1. वेंकैया नायडू: मंत्री हैं. तो रिपीट होना ही था. कर्नाटक से थे. मगर ये तब की बात है, जब वहां हचक के विधायक थे. सरकार थी. अब राजस्थान से राज्यसभा पहुंचेंगे.2. ओपी माथुर: संगठन के आदमी. यूपी चुनाव के चलते लखनऊ में कैंप किए हैं. मोदी के खास. मूल रूप से राजस्थान के. वसुंधरा से उतनी नहीं जमती. राजस्थान कोटे से ही ये भी जाएंगे.
3. निर्मला सीतारमन: मंत्री हैं. कर्नाटक से जाएंगी. पहले आंध्र प्रदेश से थीं. इनका विशेष मुद्दा नहीं है. कहीं से ले जाना था और हर जगह इनको स्वीकार किया जाता है.
4. मुख़्तार अब्बास नकवी: पहले उत्तर प्रदेश से थे. अभी झारखंड से जाएंगे. मंत्री नहीं हैं पर पार्टी का मुस्लिम चेहरा हैं.
5. पीयूष गोयल: अपने स्थान महाराष्ट्र से ही जाएंगे. उनका काम भी अच्छा है और महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार भी है.
6. चौधरी वीरेंदर सिंह: हरियाणा के हैं. बड़े किसान क्रांतिकारी नेता सर छोटू राम के पोते हैं. पंचायती राज के मंत्री हैं मोदी सरकार में. 42 साल तक कांग्रेस में रहने के बाद 2014 में बीजेपी का दामन थाम लिया था. हरियाणा से ही जाएंगे.
7. गोपालनारायण सिंह: बिहार में बीजेपी के राज्य इकाई के पूर्व मुखिया. सुशील मोदी को दरकिनार कर इनको भेजा जा रहा है. ये मोदी सरकार का सरप्राइज पैकेज हैं. शायद सुशील मोदी को कुछ नया मिलनेवाला है. वो कुछ बुरा भी हो सकता है. बिहार चुनावों के बाद काफी कुछ बदला है.
8. पुरुषोत्तम रुपाला: गुजरात में पार्टी प्रेसिडेंट रह चुके हैं. राज्य सरकार में कई पोर्टफोलियो संभाल चुके हैं. गुजरात से ही राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. सो जाना तो तय है.
9. रामविचार नेतम: छत्तीसगढ़ राज्य सरकार में रह चुके हैं. अपने गांव में भी रहते हैं! इनको छत्तीसगढ़ से ही भेजा जा रहा है. ये नया चेहरा हैं संसद के लिए.
10. अनिल दवे: मध्य प्रदेश से ही राज्यसभा सांसद हैं. दुबारा अपनी उपस्थिति बनाए रखेंगे. क्योंकि राज्य चुनावों में ये बीजेपी के सबसे विश्वासपात्र इंसान हैं. चुनाव मैनेजमेंट इनके जिम्मे रहता है. तीन बार जीत दिला चुके हैं बीजेपी को.
11. हर्षवर्धन सिंह: डूंगरपुर के शाही खानदान से हैं. राजस्थान से भेजा जा रहा है इनको.
12. राम कुमार वर्मा: उत्तर प्रदेश के ओबीसी नेता. बड़ा चेहरा. राजस्थान से जाएंगे.
13. शिव प्रताप शुक्ल: बीजेपी के उत्तर प्रदेश ईकाई के उपाध्यक्ष हैं. गोरखपुर से विधायक रह चुके हैं. योगी आदित्यनाथ से इनकी बनती नहीं है. पर राज्यसभा जा रहे हैं.
14. सुरेश प्रभु: रेल मंत्री जो पहले हरियाणा से राज्यसभा में आये थे अब आंध्र प्रदेश से जायेंगे. बीजेपी की सहयोगी पार्टी तेलुगु देशम पार्टी ने समर्थन देने का फैसला किया है.
15. एम् जे अकबर: झारखण्ड से राज्यसभा सांसद को मध्य प्रदेश शिफ्ट किया गया है.
16. विनय सहस्बुधे: पार्टी उपाध्यक्ष और थिंक टैंक विंग के प्रभारी को महाराष्ट्र से सीट देकर संगठन में काम का इनाम मिला.
17. महेश पोद्दार: रांची के बड़े व्यवसाई और सूबे के पार्टी कोषाध्यक्ष महेश पोद्दार को बीजेपी ने टिकट दिया है . झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का आरोप है कि बीजेपी ने अपना दूसरा उम्मीदवार देकर चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग का दरवाजा खोल दिया है. पोद्दार का कहना है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं की पार्टी है और पार्टी ने इसी परंपरा को निभाते हुए मुझे टिकट दिया है.
राजस्थान में बीजेपी की 160 सीटें हैं और चार राज्यसभा के उम्मीदवार. वहीं कांग्रेस की 24 सीटें और एक भी उम्मीदवार जीतने के लिए कम से कम 41 सीटें होनी चाहिए. तो बीजेपी की चारों पक्की हैं! राम जेठमलानी जो कि राजस्थान से बीजेपी के राज्यसभा सांसद रहे हैं अब लालू के महागठबंधन से परचा भर रहे हैं. हाल में वो मोदी पर काफी हमलावर रहे हैं.
झारखण्ड में अब तक के ज्यादातर राज्यसभा सदस्य बाहर के रहे हैं. इस बार भी बीजेपी के नकवी बाहर के ही हैं. ऐसे में लोकल बीजेपी नेताओं में थोड़ा असंतोष है. वहीं झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन के छोटे बेटे बसंत सोरेन को नामित किया है. झारखण्ड में राज्यसभा चुनावों में खरीद-फरोख्त होने का दुखद इतिहास रहा है. पिछली विधानसभा के 18 सदस्य ऐसे मामलों में फंसे हुए हैं. एक ऐसे ही मामले में शिबू सोरेन की बहू सीता सोरेन जेल भी जा चुकी हैं.
कांग्रेस
1. पी चिदंबरम: कांग्रेस के बड़े नेता. वित्त मंत्री रहे थे. एक बार 1996 में अपनी पार्टी तमिल मनिला कांग्रेस भी बना ली पर वापस आ गए थे. प्रणव मुखर्जी से कांटे की टक्कर थी. हमेशा अपनी बात मनवाई पार्टी में.2. कपिल सिब्बल: कांग्रेस सरकार में बहुत सारे मंत्रालय संभाल चुके हैं. पर 2014 के चुनाव में चांदनी चौक से तीसरे नंबर पर रहे. दूसरे पर आम आदमी पार्टी के आशुतोष रहे थे. साख को बट्टा लगा. पर अब उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में जायेंगे. संविधान के ज्ञाता माने जाते हैं. रोचक बहसें होंगी.
3. जयराम रमेश: पर्यावरण मंत्री थे. रूरल भी संभाला. बढ़िया काम करते थे. अखबारों में लिखते रहते हैं. कर्नाटक से जाएंगे. पहले आंध्र प्रदेश से थे. अभी वहां से जगह नहीं है. इनका पहुंचना जरूरी है.
4. अंबिका सोनी: इनफॉर्मेशन एंड ब्राडकास्टिंग मिनिस्टर रह चुकी हैं. पिताजी इनके कलक्टर थे. पंजाब से ही राज्यसभा सांसद थीं. वहीं से जा रही हैं.
5. छाया वर्मा: छत्तीसगढ़ की बड़ी नेता. लोकसभा के चुनाव में टिकट ना मिलने से नाराज थीं. पार्टी छोड़ दीं. वापस आयीं फिर. अब छत्तीसगढ़ से राज्यसभा जा रही हैं.
6. विवेक तनखा: पूर्व एडिशनल सोलिसिटर जनरल ( सरकार के वकील) तनखा व्यापम मामले में काफी सक्रिय रहे हैं. मध्य प्रदेश से इनको नामित किया गया है.
7. प्रदीप टमटा: उत्तराखंड में विधायक हुआ करते थे. हरीश रावत के नजदीकी हैं. 2014 में लोकसभा का चुनाव हार गए थे. अब वहीं से राज्यसभा जाने की तैयारी है.
8. ऑस्कर फर्नांडिज: कर्नाटक से जा रहे हैं. कांग्रेस सरकार में कई पोर्टफोलियो संभाल चुके हैं.
कांग्रेस ने अपने पुराने लोगों पर ही भरोसा किया है. नए लोगों को जगह नहीं मिली है. क्योंकि हर जगह कांग्रेस को अपनी जगह बचानी है. देश में कांग्रेस सिमट रही है और उसे किसी तरह राज्यसभा में अपनी उपस्थिति मजबूत रखनी है. इन नेताओं के आने से बहसें बड़ी मजबूत होंगी.
सपा
1. अमर सिंह: हर तरह के दिन देखे हैं इन्होंने. सबसे सब कुछ तोड़ के पता नहीं कहां चले गए थे. मुलायम से अपनी नजदीकियां पिछले साल बढ़ाईं. अब वापस सपा से राज्यसभा सांसद बन के जा रहे हैं. हालांकि इस से आजम खान नाराज हैं.2. बेनी प्रसाद वर्मा: ये भी गए और आए सपा में. 1996 में मुलायम के अलावा ये भी केंद्र में मंत्री थे. अमर सिंह से बनती नहीं थी. अब राज्यसभा जा रहे हैं. कुर्मी वोट बैंक में काफी पहुंच है. सपा को अगले साल चुनाव लड़ना है यूपी में. सरकार बचाए रखने के लिए ये जरूरी था.
मुलायम ने हमेशा की तरह अपने फैसलों से चौंकाया है. किसी को नहीं पता वो क्या सोच रहे हैं. इन दोनों नेताओं से एक लंबे वक्त तक उनकी दूरी बनी रही है. अचानक ये ह्रदय परिवर्तन. कुछ लोग कह रहे हैं कि ये मुलायम की राजनैतिक समझ नहीं बल्कि बुढ़ापे की निशानी है.
बसपा
1. सतीश चंद्र मिश्र: यूपी में बसपा का ब्राह्मण चेहरा. वकील थे कभी. माया सरकार में मंत्री भी थे. 2007 में मायावती ने ब्राह्मण वोट बैंक को भी लपेटा था और सरकार बनाई थी. लगातार तीसरी बार जा रहे हैं राज्यसभा.2. अशोक सिद्धार्थ: यूपी में बसपा का उभरता दलित चेहरा. दलित समाज के ऐसे नेता जो फटाफट अंग्रेजी बोलते हैं. 10 साल तक साउथ इंडिया में बसपा की कमान संभाली है.
बसपा की यूपी विधानसभा में 79 सीटें हैं. सो ये दोनों तो जाएंगे. तीन और लोगों ने परचा भरा है बसपा की तरफ से. उनका जीतना तय नहीं है. रिटायर होने वालों 55 सांसदों में बीजेपी के 14 सांसद हैं. आशा है कि राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखण्ड और हरियाणा में अपनी सरकार के चलते बीजेपी अपनी ताकत 17-18 सांसदों तक बढ़ाएगी. असम में जीत का विशेष फायदा नहीं हुआ क्योंकि वहां के राज्यसभा संसद 2019-20 में रिटायर होंगे.हालांकि अब बीजेपी को जयललिता और ममता के जीतने से फायदा होगा. वहां कांग्रेस के मुकाबले इनके ज्यादा सांसद राज्यसभा पहुंचेंगे. 11 जून को पहला चुनाव होगा. जिसके लिए नामिनेशन 31 मई तक दिए जाने हैं. इसके बाद मामला काफी दिलचस्प होगा.

