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ना बंगाल में दंगे होते ना जुनैद मरता, अगर सब लोग इस बात को मान लेते

'आग की तरह' अगर किसी चीज़ को फैलाना है, तो वो यही है.

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9 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 9 जुलाई 2017, 12:46 PM IST)
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प्रतीकात्मक इमेज.
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बंगाल दंगे. जुनैद की मॉब लिंचिंग. इन दो घटनाओं ने इस देश के दो प्रमुख समुदायों के लिए आत्ममंथन की ज़रूरत को रेखांकित किया है. यही वक़्त है जब हम लोगों को थम कर सोचने की ज़रूरत है कि दूसरे धर्म के विरोध में खड़े होते-होते हम कहां पहुंच चुके हैं. आस्थाओं, प्रतीकों और मान्यताओं का सम्मान करने के चक्कर में मनुष्यता को भूलते जा रहे हैं. कोई भी घटना एक क्राइम एक्ट बाद में होती है, धर्म/मज़हब पर हमला पहले लगने लगती है. हम सबमें एक फोबिया, एक कॉम्प्लेक्स घर करता जा रहा है. दूसरे पक्ष का विरोध करने के चक्कर में हम कई बार हत्याओं को डिफेंड करने लगे हैं. क़ातिलों के पक्ष में खड़े होने लगे हैं.ये ख़तरनाक ट्रेंड है.
हम सब भारतीयों को एक सुर में तमाम तरह की कट्टरता की मुखालफ़त करनी चाहिए. हर प्रकार की हिंसा पर लानत भेजनी चाहिए. फिर चाहे वो इस्लाम के नाम पर मज़हबी गुंडों का हुडदंग हो, गौरक्षा के नाम पर मारे जाते बेगुनाह लोग हो या फिर भीड़ बनकर बेबस लोगों पर टूट पड़ने की ज़हरीली मानसिकता. सबकी मजम्मत बहुत ज़रूरी है.
एक खुशहाल भारत के लिए हम सबको अपना फ़र्ज़ पहचानना ही होगा. आइए हम सब मिलकर खुद से वादा करते हैं कि हम कभी भी - किसी भी हाल में - हिंसा का समर्थन नहीं करेंगे. हमारे नाम पर कोई जान नहीं ली जाएगी. नो, नॉट इन माई नेम.
# ये पहला सबक है. रट लीजिए इसे. 1
# सिलेक्टिव होना सबसे वाहियात आदत है. इसे बदलना ही होगा. 2
# खुद से बार-बार कहना ही होगा कि, 3
# हत्यारे हमेशा अपनी हत्याओं को आकर्षक पैकेजिंग में लपेटते हैं. सावधान रहिए. 4
# हमें अपने अधिकारों जितना ही ख़याल कर्तव्यों का भी रहना चाहिए. 5
# याद रखिए, आपके मज़हब की पहचान आप खुद हो. जैसा आप बिहेव करेंगे, आपके मज़हब की वैसी ही पहचान बनेगी. 7
# सिंपल सी बात है. समझना इतना मुश्किल तो नहीं? 6
# आस्था को ऐम्युनेशन बना लेना, आस्था की मूल भावना का अपमान है. 8
# कितने ही धर्म है दुनिया में. लेकिन मनुष्यता को वरीयता देने से ही ये दुनिया जीने लायक बनती है. इस बात को लिख के रखिए, घोल के पी जाइए, तावीज़ में बांध कर बांध लीजिए. 9
# ये सिर्फ एक शेर नहीं, सवाल है. ईमानदारी से इसका जवाब तलाशा जाना चाहिए. 10
'दी लल्लनटॉप' किसी भी तरह की हिंसा की पुरज़ोर मुखालफत करता है. अपने तमाम पाठकों से भी उम्मीद करता है कि वो भी किसी भी तरह के वायलेंस को एंटरटेन नहीं करेंगे. इन कार्ड्स को आप डाउनलोड कीजिए. अपने सिस्टम पर वॉल पेपर बनाइए. फेसबुक की कवर पिक बनाइए. व्हाट्सऐप पर फॉरवर्ड कीजिए. 'आग की तरह' किसी चीज़ को फैलाने की ज़रूरत है तो वो यही है प्रिय पाठकों.
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