दुनिया में सबसे सही कोई पद है तो यूनाइटेड नेशंस यानी UN के सेक्रेटरी जनरल का. बसभाषण देना होता है. कुछ भी बोल दो सारी दुनिया छापने को तैयार रहती है. और छात्रोंके लिए ये पद कंपटेटिव इग्जाम का एक क्वेश्चन भर होता है. बहरहाल अभी तक इसका आंसरहोता था बान की मून. 2006 में ये बने थे. इनके मुकाबले अपने यहां के शशि थरूर थे.जब हम स्कूल में थे तब संयुक्त राष्ट्र महासचिव का मतलब होता था कोफी अन्नान. घानाके थे. पर अब से ये आंसर होगा एंटोनियो गुतेरस. जाहिर है उनको यूनाइटेड नेशंस कानया महासचिव बनाया गया है. एंटोनियो अब दुनिया भर के लिए काम करने वाली संस्था केहेड हो गए हैं पर उनका घर है पुर्तगाल. पुर्तगाल, अरे वास्कोडिगामा वाला देश. जाननेवाली बात ये भी है कि एंटोनियो गुतेरस पुर्तगाल के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं.एंटोनियो 1 जनवरी 2017 से महासचिव के पोस्ट पर काम करना स्टार्ट करेंगे. यानी किउसी दिन से जिस दिन अभी के महासचिव बान की-मून का कार्यकाल खत्म होगा. UN में 193देश शामिल हैं. सारे देशों ने मिलकर बैठक की और सेक्रेटरी चुना एंटोनियो को. वैसेइस पद के लिए कुल मिलकर मैदान में 13 उम्मीदवार थे. ये भी जान लो 67 साल केएंटोनियो पिछले साल तक UN के रिफ्यूजी एजेंसी के चीफ रहे. अब पढ़ो कि एंटोनियो नेऐसा क्या-क्या किया कि यहां तक पहुंच गए -कारनेशन रेवोल्युशन ने बनाया नेता, फिर ऐसे हिट हुए कि रुके ही नहींइन्होंने 1974 में पुर्तगाल की सोशलिस्ट पार्टी ज्वाइन की. वह भी उस समय जबपुर्तगाल में सत्ता के खिलफ आंदोलन चल रहा था. काएटानो उस समय पुर्तगाल केप्रधानमंत्री थे. जिनका रवैया एकदम तानाशाही था. जो वो चाहते थे वही होता था, कानूनउनके आगे पस्त था. पूरे पुर्तगाल में भभ्भड़ मचा हुआ था. जिससे तंग आकर लोगों नेकाएटानो को कुर्सी से गिराने के लिए उसके खिलाफ आन्दोलन स्टार्ट कर दिया. यह आंदोलनआगे जा कर कारनेशन रेवोल्युशन के नाम से मशहूर हो गया. असल में कारनेशन एक लाल रंगका फूल है जो कि रेड रोज जैसा होता है. लाल कारनेशन को सोशलिज्म का सिंबल भी मानाजाता है. और कारनेशन रेवोल्युशन की बारात भी लाल सलाम वाले सोशलिस्ट ने ही निकलाथा. इसी राजनीतिक उठा-पटक के बीच एंटोनियो सोशलिस्ट पार्टी के युवा चेहरा बन गए. एकसाल उन्होंने एक मंत्रालय में दफ्तर का काम संभाला. और फिर सांसद बन गए. 16 साल कीरगड़ाई के बाद पार्टी हेड और अपोजीशन के नेता बने.कम्युनिस्ट आदमी पर देश को जरूरत हुई तो मार्केट को ओपन कर दिया1995 के चुनाव में पार्टी ने बंपर जीत हासिल की. एंटोनियो बन गए पीएम. उन्होंने लीकसे हटकर काम किया. भारत के कम्युनिस्टों की तरह पुरानी थ्योरी छाती से चिपका कंकालन बन गए. देश की जरूरत लगी तो मार्केट को भी ओपन कर दिया. ओपन मार्केट बोले तोविदेशी कंपनियों को देश में आकर बिज़नेस करने देना है. एंटोनियो जनता की राय कोभरपूर तवज्जो देते थे. कोई भी बड़ा सुधार करते तो उससे पहले पॉलिसी पर पब्लिकरेफरेंडम करवाते. इससे जनता को लगता कि नए नियम में उनकी पूछ भी है और जरूरत भी. इनसब चीजों की वजह से जनता में उनकी लोकप्रियता का करंट दौड़ने लगा.लोकल म्युनिसिपल में खराब रही परफॉर्मेंस तो PM एंटोनियो ने इस्तीफा दे दियाएंटोनियो 1999 में दोबारा पीएम चुने गए. चौंकिएगा नहीं पुर्तगाल में भी अमेरिका कीतरह चार साल पर चुनाव होते हैं. हालांकि उनका दूसरा कार्यकाल उतना सफल नहीं रहा.सोशलिस्ट पार्टी के अंदर कलह होने लगा. और इकोनॉमी की खस्ता हालत के चलते एंटोनियोकी पॉपुलैरिटी कम होती गई. दिसंबर 2001 में लोकल म्युनिसिपेलिटी के चुनावों मेंसोशलिस्ट पार्टी का परफॉरमेंस बहुत ही ख़राब रहा. जिसके बाद एंटोनियो ने पीएम केपोस्ट से इस्तीफा दे दिया. और कहा कि ‘मैं इस्तीफा दे रहा हूं, ताकि हमारा देशराजनीतिक दल-दल में धंसने से बच सके’.पहले भी दुनिया में शांति बनाने को रहे हैं डेडिकेटेडमई 2005 में एंटोनियो यूएन रिफ्यूजी काउंसिल (UNRC) के हाई कमिश्नर बनाए गए. इसएजेंसी में 10 हजार के लगभग लोग काम करते हैं. कुल 126 देशों में दफ्तर खुला हैइसका. ये वही दौर है, जब पोस्ट तालिबान दौर में मिडल ईस्ट और अफ्रीका के कई देशोंमें गृह युद्ध और आतंकवाद रहा. जिसके चलते लाखों लोगों को घर छोड़ना पड़ा. फिर चाहेवह सूडान की लड़ाई हो या फिर हाल फिलहाल सीरिया की. एंटोनियो ने इन सबके लिए खूबएक्टिव होकर काम किया. 31 दिसंबर 2015 तक वह इस पोस्ट पर रहे. ड्यूरेशन के हिसाब सेनंबर दो पर रहने वाले हाई कमिश्नर.भारी मतों से मार ले गए सेक्रेटरी बनने की बाजीएंटोनियो का नाम दुनिया भर में ढंग से सुनाई देना शुरू तब हुआ जब 5 अक्टूबर को 15मेंबर्स वाले यूनाइटेड नेशंस सिक्यूरिटी कौंसिल ने एंटोनियो के नाम का ऐलान किया.इसके लिए सभी मेंबर्स के बीच गुप्त रूप से वोटिंग किया गया. जो कि के जिसमें 13 वोटएंटोनियो को मिले और 2 नो ऑपिनियन वोट किए गए. उनका कार्यकाल 1 जनवरी 2017 सेस्टार्ट हो जाएगा. एंटोनियो की एक ख़ास बात यह भी है कि वो इंग्लिश,पुर्तगाली,फ्रेंच, स्पैनिश भाषाओं को फर्राटेदार बोल लेते हैं. एंटोनियो को यूएन के महासचिवबनाने की सबसे बड़ी वजह रही उनका यूएन में 10 साल से भी ज्यादा समय का अनुभव. जिसमेंरिफ्यूजी संकट, मानवाधिकारों जैसे गंभीर मसले पर उनका बेहतरीन परफॉरमेंस रहा. आज जबयूएन को अमेरिका का रबड़ स्टाम्प माना जाने लगा है. एंटोनियो की सोशलिस्ट-लिबरल कीछवि यूएन को एक अलग पहचान दिला सकती है.-------------------------------------------------------------------------------- ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें -वो क्रिकेटर जिसने इस्लाम छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लियाइंडिया का पहला सुपरस्टार, जिसने पत्नी की न्यूड पेंटिंग बनाई, अफेयर कबूलेWHATSAPP पर फैमिली ग्रुप से परेशान लोगों के लिए 7 वरदाननसीरुद्दीन शाह और पंकज कपूर से भी बड़ी तोप एक्टर हैं उनकी सासू मांसबका एक दोस्त होता है, जो टाइप करते वक्त आपके फोन में घुस जाता है