अटल पर फिल्म बनाने के बाद राजनीति में आने वाली बात पर पंकज त्रिपाठी ने क्या कहा?
पंकज ने कहा कि हर बिहारी की तरह उन्हें भी राजनीति में रुचि है. वो इमरजेंसी से लेकर अब तक की सभी अहम घटनाओं को गिनवा सकते हैं.

Pankaj Tripathi ने अपने जीवन, उससे जुड़े अनसुने-कमसुने किस्से, सिनेमा के किस्सों पर बात की. कहां? लल्लनटॉप के प्रोग्राम ‘गेस्ट इन द न्यूज़रूम’ में. पिछले एपिसोड में वो बतौर गेस्ट आए थे. आप उस एपिसोड को यूट्यूब, हमारी वेबसाइट और ऐप पर देख सकते हैं. बातचीत में ‘द लल्लनटॉप’ के एडिटर सौरभ द्विवेदी ने उनसे पूछा कि क्या वो राजनीति से जुड़ेंगे. पंकज का कहना था,
पता नहीं. अभी तक तो नहीं लेकिन आगे कौन जानता है. मैं आगे क्या करूंगा वो मुझे भी नहीं मालूम.
सौरभ ने पूछा कि आगे चलकर राजनीति में खड़े तो हो सकते हैं ना. इस पर पंकज ने जवाब दिया,
क्यों नहीं खड़े हो सकते. हर बिहारी को राजनीति में रुचि होती है. हमसे अभी पूछो तो इमरजेंसी से लेकर अब तक की देश की बड़ी घटनाएं बता दें.
पंकज त्रिपाठी ने बातचीत के दौरान कहा कि वो अपने संघर्षों के बारे में बात नहीं करेंगे. उनका कहना था कि ऐसा करने पर लोग काटकर रील बना देते हैं. ऊपर कुछ म्यूज़िक छिड़क देते हैं. इस पर न्यूज़रूम की एक साथी ने रील्स और उसके खपत वाले कल्चर पर उनकी राय मांगी. उनका कहना था,
आप 25-30 मिनट रील्स देखने के बाद उसे बंद करें. आंखों को बंद कर के उस पर खीरा लगाएं और सोचें कि मुझे पिछले 20 मिनट में क्या मिला है. मैंने क्या पाया है. अगर आपको लगता है कि कुछ पाया है तो खीरे हटाकर (रील्स देखना) जारी रखिए. अगर कुछ नहीं पाया है तो खीरे को रहने दें.
पंकज त्रिपाठी ने बताया कि दो फिल्मों ने उन पर बहुत ज़्यादा प्रभाव छोड़ा. पहली ‘मैं अटल हूं’ और दूसरी ‘खड़क सिंह’. ‘मैं अटल हूं’ को रवि जाधव ने डायरेक्ट किया है. पंकज ने उस फिल्म के बारे में बताया कि उसे देखकर वो रोने लगे थे. उन्हें हर सीन याद है, फिर भी वो खुद की एक्टिंग देखकर रोने लगे थे. पंकज ने बताया कि अटल जी का रोल करना उनके लिए एक सुखद संयोग जैसा था. पटना के दिनों में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की रैली अटेंड की थी और अब उन्हीं का रोल करने का मौका मिला.

