क्या पाकिस्तान में बैन होने के बाद भी 'जॉयलैंड' ऑस्कर जीत सकती है?
जॉयलैंड के अवॉर्ड स्ट्रैटेजिस्ट फ्रांस में, इसे रिलीज़ करके ऑस्कर की क्वालिफ़ाइंग शर्तों को पूरा करना चाह रहे हैं.

Pakistan के सीरियल्स को हमने खूब पसंद किया. उनके डेली सोप्स की चहुंओर चर्चा रही. अब फिल्में भी अपना आगमन दर्ज करा रही हैं. हाल ही में पाकिस्तानी फ़िल्म ‘द लीजेंड ऑफ मौला जट्ट’ ने जलवा काटा. पूरी दुनिया में उसे नोटिस किया गया. फिर Joyland आई. कान फ़िल्म फेस्टिवल में दिखाई गई, लोग 10 मिनट तक खड़े होकर तालियां बजाते रहे. बाद में इसी फ़िल्म को दो अवॉर्ड मिले. पहला बेस्ट LGBTQ फ़िल्म के लिए 'क्वीर पाम' और दूसरा ‘अनसर्टेन रिगार्ड’ कैटगरी में ज्यूरी अवॉर्ड. फिल्म का नाम है ‘जॉयलैंड’.' कान में पुरस्कार जीतने वाली ये पहली पाकिस्तानी फ़िल्म बनी. इसे मेलबर्न के इंडियन फ़िल्म फेस्टिवल में भारतीय उपमहाद्वीप की बेस्ट फ़िल्म का अवॉर्ड मिला. फिर फ़िल्म को भारत लाया गया. इसे तीन से छह नवंबर तक धर्मशाला में चले इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में दिखाया गया. लोग लहालोट हो गए. हॉल इतना भर गया कि लोगों ने ज़मीन पर बैठकर फ़िल्म देखी. एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक जनता वेन्यू के बाहर फ़िल्म देखने के लिए पहले से ही लाइन लगाकर खड़ी हो गई. फ़िल्म देखकर लोग रोने लगे. एक दूसरे को लगे लगाने लगे.
खैर, ये सब तो माहौल है. असली गेम तो ये है कि इसे पाकिस्तान की तरफ़ से ऑस्कर्स में ऑफ़िशियल एंट्री में भी भेजा गया. ये पाकिस्तानी सिनेमा इतिहास की ऑस्कर जाने वाली दसवीं फ़िल्म है. पूरी दुनिया के फ़िल्म फेस्टिवल में धूम मचाने के बाद 4 नवंबर को इसका ट्रेलर आया. 18 नवंबर को पाकिस्तान में रिलीज़ किया जाना है. पर मामला एक जगह पर अटक गया. 11 नवंबर को पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक लगा दी. माने इसे पाकिस्तान में बैन कर दिया गया. मंत्रालय ने बयान जारी किया कि 'जॉयलैंड' को सेंसर बोर्ड ने 17 अगस्त को सर्टिफिकेट देकर रिलीज़ के लिए पास कर दिया था. मगर फिल्म को देखने के बाद लोगों ने पाकिस्तानी सेंसर बोर्ड से लिखित शिकायत की. इन शिकायतों में कहा गया कि 'जॉयलैंड' में कई ऐसी चीज़ें दिखाई गई हैं, जो पाकिस्तानी समाज की 'नैतिकता और शालीनता' के साथ मेल नहीं खाती हैं. इसलिए सेंसर बोर्ड फिल्म को अन-सर्टिफाइड करार देती है. इसका मतलब ये है कि पाकिस्तान के सिनेमाघरों में इस फिल्म को तत्काल प्रभाव से बैन किया जाता है.
अब मुद्दा ये है कि जब फ़िल्म को बैन कर दिया गया है तो ये ऑस्कर के लिए क्वालीफाई कैसे करेगी? क्योंकि ऑस्कर्स का ये रूल होता है कि किसी फीचर फ़िल्म को यदि फ़ॉरेन फ़िल्म कैटगरी में नॉमिनेशन पाना है, तो उसका थिएटर में रिलीज़ होना ज़रूरी है. ये रिलीज़ यूएसए की परिधि के बाहर की होनी चाहिए. साथ ही फ़िल्म लगातार सात दिनों तक थिएटर में कमर्शियल पर्पज से दिखाई जानी चाहिए. अब सवाल ये है कि जब फ़िल्म रिलीज़ नहीं होगी, तो ऑस्कर्स में जाएगी कैसे? हालांकि ख़बर ये भी है कि पाकिस्तानी सरकार इस बैन पर दोबारा विचार करेगी. द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने फ़िल्म बैन के रिव्यू के लिए ऑर्डर किया है.
सोमवार को पाकिस्तानी पीएम के सलाहकार सलमान सूफ़ी ने ट्वीट किया था. इसके अनुसार एक कमेटी बनाई जाएगी जो बैन पर दोबारा विचार करेगी. वो तो जब होगा, तब होगा. पर 'जॉयलैंड' के मेकर्स के पास एक प्लान बी भी है. 'जॉयलैंड' के लिए काम करने वाले अवार्ड स्ट्रैटेजिस्ट का कहना है कि वो फ्रांस में इसे रिलीज़ करके ऑस्कर की क्वालिफ़ाइंग शर्त को पूरा करेंगे. ये काम वो 30 नवंबर से पहले-पहले करेंगे क्योंकि ये इस साल के ऑस्कर्स में जाने लिए कटऑफ रिलीज़ डेट है. यदि फ़िल्म को फ़ॉरेन कैटगरीज़ के बजाय सामान्य कैटगरी जैसे: बेस्ट फ़िल्म में सबमिट किया जाता, तो इसे यूएस में ही दिखाया जा सकता था. पर यहां मामला तो कुछ और ही है. जो हम आपको समझा चुके हैं. अभी फ़िल्म के पास कोई डिस्ट्रीब्यूटर्स भी नहीं हैं और पाकिस्तान अब कोई दूसरी फ़िल्म भेज भी नहीं सकता है. देखते हैं अब 'जॉयलैंड' के भाग्य में जॉय आता है या सॉरो. फ़िल्म को ज़रूरी सात दिनों की थिएट्रिकल रिलीज़ मिलती है या नहीं. ऑस्कर तो मिलना तो बाद की बात है.
'जॉयलैंड' को साइम सादिक़ ने डायरेक्ट किया है. फिल्म में अली जुनेजो, अलिना खान, सरवत गिलानी और रस्ती फारूक़ ने लीड रोल्स किए हैं. 'जॉयलैंड' लाहौर के एक मिडल क्लास राणा परिवार की कहानी है. पितृसत्ता और दकियानूसी विचारों में गले तक डूबा हुआ परिवार. परिवार का छोटा बेटा हैदर, बिब्बा के प्रेम में पड़ जाता है. बिब्बा एक थिएटर आर्टिस्ट है. डांसर भी है. मगर वो खुद को ट्रांसजेंडर के तौर पर आइडेंटिफाई करता है. पाकिस्तान जैसे देश में हैदर और बिब्बा के प्रेम के पूरा होने में किस किस्म की दिक्कतें आती हैं, 'जॉयलैंड' इसी बारे में बात करती है. इस दौरान पाकिस्तान के समाज में LGBTQ की स्वीकार्यता से लेकर पितृसत्ता और सेक्शुअल आज़ादी की बात होती है. देखते हैं, सेक्शुअल आज़ादी के बीच पाकिस्तान इसे बैन से आज़ादी देता है या नहीं.
'जॉयलैंड' पाकिस्तानी फिल्म है, जिसमें ऐसी चीज़ें दिखाई गईं कि पाकिस्तान में ही बैन हो गई

.webp?width=60)

