इस फिल्म में मां है, ये हॉलीवुड की करण-अर्जुन है
बैटमैन और सुपरमैन की फाइट देखकर आपको विनोद खन्ना और अमिताभ की फाइट याद आ जाएगी.
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फोटो - thelallantop
नवीन चौधरी की दो खासियतें हैं. पहली ये कि वो आर्यादित्य के पापा हैं, दूसरी ये कि वो हैंडसम हैं. मार्केटिंग के पेशे में है, लेकिन लिखने का कीड़ा है. खास तौर से व्यंग्य का और व्यंग्य भी मिर्ची लगाने वाला. ट्विटर हैंडल @naveen1003 पर चौड़ में एक्टिव रहते हैं. इनके पास एक DSLR भी है. कम कहे को ज्यादा समझिएगा घुटने मोड़ कर फूल-पत्ती की फोटो खींचने वाले फोटोग्राफर नहीं हैं. माल्या हमारे बीच नहीं टिके. 2017 का कैलेंडर इन्हीं की ओर से आएगा. फिलहाल बैटमैन और सुपरमैन वाली पिच्चर देख कर लौटे हैं. पढ़िए क्या बता रहे हैं.
Batman vs Superman: Dawn of Justice
एक विलेन है और उसे एक ऐसा आइटम हथियाना है जिससे वो पावरफुल हो सके और सब पर राज कर सके पर रास्ते का कांटा है हीरो, तो भैया विलेन ऐसी चाल चलता है कि हीरो फंस जाये. जैसे कि हीरोइन को लपेटो, हीरो को हीरोइन बचाने भेजो और वहां पर अपने आदमियों से एक खून करवा दो और जब हीरो पहुंचे तो खून के इल्जाम में उसे गिरफ्तार करवा दो. ना ना ना, ये बॉलीवुड फिल्म की स्टोरी नहीं है, ये है लेटेस्ट रिलीज़ Batman vs Superman: Dawn of Justice की स्टोरी. बैटमैन- सुपरमैन टाइप फिल्मों में टेक्नोलॉजी तो अच्छी यूज होती ही है, ग्राफ़िक्स भी अच्छे होते है तो उस सबके बारे में बात करके टाइम क्यों वेस्ट करना. सीधे मुद्दे पे आते हैं और वो है फिल्म की स्टोरी जोकि इस बार फुल्टू बॉलीवुड स्टाइल में हैं. इसमें 2 हीरो है, दोनों की दुश्मनी है, फिर दोस्ती है, मिलकर विलेन का खात्मा है और सबसे जरूरी बात - इस फिल्म में 'मां’ है. फिल्म देखते टाइम आपको यकीन हो जायेगा कि इस बार डायरेक्टर ने ये फिल्म बनाने से पहले बॉलीवुड की फ़िल्में दबा के देखी है. https://www.youtube.com/watch?v=bha24P9uw-E अब सुपरमैन को ऊपर बताए सीन के हिसाब से विलेन फंसा चुका है और बेचारा बैटमैन भी ग़लतफ़हमी में आके सुपरमैन की लेने पर आ जाता है. बॉलीवुड फिल्मों ने हमें सिखाया है कि हीरो की लेनी हो तो उसकी मां को उठाओ. बस अपने विलेन ने हीरो की मां को उठवा लिया और छोड़ने के बदले में उसे बैटमैन को मारने को कहता है, ठीक वैसे ही जैसे कुलभूषण खरबंदा ने बहुत सी फिल्मों में एक हीरो से दूसरे हीरो को मरवाने का प्लान करता है. जहां तक याद है मैं पहली बार किसी भी सुपरमैन की फिल्म में उसकी मां को किडनैप होते देख रहा हूँ. सुपरमैन है इंटेलीजेंट, प्लान समझ जाता है पर बैटमैन तो खार खाया बैठा है, सुनने को राजी नहीं और फिर ढिशुम ढिशुम. ये सीन ऐसा है कि आपको विनोद खन्ना और अमिताभ की फाइट याद आ जाएगी. बस यही वो सीन है जहां डायरेक्टर ने मां के रोल का फुल बॉलीवुड स्टाइल में यूज़ किया है. सुपरमैन और बैटमैन दोनों की मां का नाम मार्था है, बस नाम सुनते ही बैटमैन इमोशनल क्योंकि उसकी मां बचपन में गुजर चुकी. सारे गिले-शिकवे गलतफहमियां छू मंतर, और बैटमैन मां को बचाने का मिशन उठा लेता है और सुपरमैन विलेन को उड़ाने का. https://www.youtube.com/watch?v=BvP4RIqSbiw बॉलीवुड की कहानी यहीं ख़त्म नहीं हुई. मां को बैटमैन बचाता है तो कहता है – I am your son’s friend और मां का जवाब है - आई गेस्ड. दैट केप. गोया केप न हुआ मेले में खरीदा हुआ लॉकेट हो गया जो हीरो लोग बचपन में बिछड़ने से पहले पहन लिए थे. बैटमैन की फिल्मों का मैं दीवाना बैटमैन से ज्यादा उसके विलेन के लिए होता हूं. कौन भूल सकता है जोकर को? इस फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी विलेन है. उसकी एक्टिंग, डायलाग डिलीवरी देख कर 3-4 बार लगा कि वो शाहरुख़ खान की मिमिक्री कर रहा है. फॉर योर काइंड इनफार्मेशन – मैंने डब नहीं, अंग्रेजी वर्शन ही देखा और अंग्रेजी में शाहरुख़ की मिमिक्री की बात ही और है. इस फिल्म के बारे में आप यूं कह सकते हैं कि ये हॉलीवुड की करण-अर्जुन है. अगर आप इंस्पायर्ड फिल्मों के दीवाने है तो इसे देखिए. पहली बार बॉलीवुड से इंस्पायर्ड सुपर हीरो की फिल्म आई है. अगर आप बैटमैन सीरीज या सुपरमैन सीरीज के दीवाने हैं तो आपको ये फिल्म देखकर वैसी ही फीलिंग आएगी जैसी अनुराग कश्यप के दीवानों को बॉम्बे वेलवेट देखकर आई थी.पढ़ें - बैटमैन वर्सेज़ सुपरमैन, थ्री-डी में दो बड़े चेतन!

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