बड़ी मुश्किल से GST समझ में आया था, अब लोगों ने ये अफवाहें फैला दीं
GST से जुड़ी अफवाहें और उनकी सच्चाई, यहां जानिए.

GST आया. आया तो अपने साथ कुछ समस्याएं भी लाया. कुछ वो लाया, कुछ हमने खुद बना लीं. इसमें फेसबुक और वॉट्सऐप ने खूब साथ दिया. इतना साथ दिया कि अधिया को आगे आना पड़ा. अधिया यानी हसमुख अधिया. भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में रेवेन्यू सेक्रेटरी हैं ये. 30 जून तक ये रोज दो-तीन ट्वीट करते थे. 1 जुलाई से दिन में दो-दो दर्जन ट्वीट करने पड़ रहे हैं. GST की वजह से वित्त मंत्रालय के लिए काम कर रहे हजारों लोगों का चैन लुटा पड़ा है. उधर जनता है कि पहले से समझ न आने वाली चीज के बारे में भी अफवाह फैला रही है.
GST हम आपको पहले ही समझा चुके हैं. जो तब न देख पाए हों, वो अब यहां ऊपर देख लें. लेकिन आज अपन GST बताने नहीं, इसके बारे में फैली अफवाहों, गलतफहमियों और मिथकों की सच्चाई बताने आए हैं. अधिया ये पोस्टमॉर्टम पहले ही कर चुके हैं. कुछ अफवाहें दुकानदारों से जुड़ी हैं, कुछ ग्राहकों से. आप गौर फरमाइए.
मिथ #1. सारे बिल/ इन्वॉइस सिर्फ कंप्यूटर/ इंटरनेट से ही जेनरेट किए जाएंगे. सच्चाई: बिल/ इन्वॉइस हाथ से भी बनाए जा सकते हैं. वो भी मान्य होंगे.
मिथ #2. GST के तहत बिजनेस करने के लिए मुझे हर समय इंटरनेट की जरूरत होगी. सच्चाई: इंटरनेट की जरूरत आपको सिर्फ एक बार तब होगी, जब महीने के आखिर में आप GST रिटर्न फाइल कर रहे होंगे.
मिथ #3. मेरे पास प्रोविजनल आईडी है, लेकिन बिजनेस करने के लिए मैं फाइनल आईडी का इंतजार कर रहा हूं. सच्चाई: आपकी प्रोविजनल आईडी ही आपका फाइनल GSTIN नंबर होगा, तो बिजनेस शुरू कर दीजिए.
मिथ #4. मेरे पिछले कारोबार को छूट मिली हुई थी. अब नया बिजनेस शुरू करने के लिए मुझे नया रजिस्ट्रेशन करना होगा? सच्चाई: आप अपना बिजनेस जारी रख सकते हैं. नए रजिस्ट्रेशन के लिए आपके पास 30 दिनों का वक्त है.
मिथ #5. महीने में तीन बार रिटर्न फाइल करना पड़ेगा. सच्चाई: रिटर्न सिर्फ एक बार फाइल करना है, जिसके तीन हिस्से हैं. पहला हिस्सा डीलर द्वारा भरा जाएगा, जबकि बाकी दोनों हिस्से कंप्यूटर खुद ही भर देगा.मिथ #6. रिटर्न दाखिल करते समय छोटे डीलर्स को भी हर इन्वॉइस/ बिल की जानकारी देनी होगी. सच्चाई: जो लोग रीटेल बिजनेस (बिजनेस टू कन्ज्यूमर) कर रहे हैं, उन्हें बिक्री की सारी जानकारी देनी होगी.
मिथ #7. पहले के VAT की दरों के मुकाबले GST की दरें ज्यादा हैं. सच्चाई: ऐसा इसलिए लग रहा है, क्योंकि पहले एक्साइज ड्यूटी समेत कई दूसरे टैक्स अदृश्य होते थे. अब इन सबको GST में मिला दिया गया है और सब एक में जुड़ गए हैं.
1/2 A wrong message is doing rounds on social media that if u make payment of utility bills by credit cards,you will be paying GST twice.
— Dr Hasmukh Adhia (@adhia03) July 2, 2017
इन मिथकों के अलावा अधिया ने एक अफवाह का प्रमुखता से जिक्र किया. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि सोशल मीडिया पर एक मेसेज सर्कुलेट किया जा रहा है, जिसके मुताबिक अगर आप क्रेडिट कार्ड से यूटिलिटी बिलों का भुगतान करते हैं, तो आपको GST दो बार देना पड़ेगा. अधिया बताते हैं कि ये पूरी तरह गलत है और लोगों से अपील करते हैं कि ऐसे मेसेज न फैलाए जाए.
2/2 This is completely untrue. Please do not recirculate such message without checking it with authority. — Dr Hasmukh Adhia (@adhia03) July 2, 2017
इसके अलावा कुछ लोगों ने अधिया को ट्वीट करते हुए सवाल भी पूछे, जिसके जवाब उन्हें मिले. देखिए:
सवाल- नियम के मुताबिक 20 लाख रुपए से कम के बिजनेस वालों पर GST लागू नहीं होगा, लेकिन अगर कोई इंटर-स्टेट सर्विस देता है, तो उसे भुगतान करना पड़ेगा. ऐसा कैसे? जवाब- छूट सिर्फ उन छोटे व्यापारियों को है, जो एक राज्य के अंदर अपना व्यवसाय करते हैं. दूसरे राज्य तक बिजनेस करने के लिए IGST का भुगतान करना पड़ेगा.
सवाल- कौन से बिल मान्य होंगे और कौन से नहीं? जवाब- जब तक केंद्र सरकार के e-way बिल के नियम नहीं बन जाए, तब तक राज्य सरकारें अपने मौजूदा e-way बिल सिस्टम जारी रख सकते हैं.

रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अधिया
सवाल- जब GSTR2 कंप्यूटर अपने-आप भर लेगा, तो इम्पोर्ट की जानकारी कैसे दिखेगी? जवाब- इम्पोर्ट करते समय जिस IGST का भुगतान किया गया है, वो GSTR2 में अपने-आप दिखने लगेगा. अगर ऐसा नहीं होता है, तो आप खुद भी भर सकते हैं.
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