यूपी में वही हो रहा है, उसकी तरफ आंखें फाड़कर मत देखो. ये अपने यहां मिडिल क्लासफैमिलीज का कल्चर है. अगर यहां परिवार एक में रहे या एक दुकान में दो भाई हिस्सेदारहों और चालीस-पचास साल तक सिर फुटौव्वल न हो तो कुछ कमी होगी. ये रेयरेस्ट ऑफ दरेयर केस की कैटेगरी में आते हैं. यादव परिवार पर इतनी बमचक होने की वजह ये कि वोमिडिल क्लास तो है नहीं. इत्ता बड़ा सूबा उनके पीछे लड़ भिड़ रहा है. इसलिए जो होरहा है उसके पीछे बौराओ मत. आप्टिमिस्टिक बनो भैया. देखो कि इस झगड़े से क्या क्याअच्छा हो रहा है. पार्टी सुप्रीमो नेताजी, माने मुलायम सिंह यादव इस लफड़े से औरनिखर कर आ गए, ये किसी ने नोटिस किया? हां भैया इस उठापटक में वो संस्कारी हो लिए.यकीन न आए तो इन पॉइंट्स पर सोचकर देखो.सबका साथ सबका विकासये टैगलाइन तो बीजेपी की है लेकिन निभाई धरतीपुत्र मुलायम ने. अपने परिवार में सबकोसाथ रखने की कोशिश में लगे पड़े हैं. हालात ये बन गए हैं कि अखिलेश यादव केले केपेड़ बने हैं सत्ता के फल से भारी हो रखे हैं. और शिवपाल बेर के दरख्त हैं. कह कबीरकैसे निभे केर बेर को संग. अखिलेश इत्ता नोचा गए हैं कि शिवपाल को कटा पड़ा देखनाचाहते हैं. लेकिन मुलायम फैमिली के बड़े हैं. धमकाइयां चमकाइयां प्यार दुलार पुचकारसब आजमा रहे हैं कि एक्को गोटी गिरे न. नहीं तो बाहर सारी पार्टी दांत लगाए हैं.दन्न से हमला कर देंगी. कुर्सी ले लेंगी. सबको समझा बुझाकर रखा है.बाप बाप होता हैयहां देहात में कहावत है "बेटवा होइगा आप बराबर समझो उसको बाप बराबर." अर्थात साइजमें बाप की ऊंचाई तक आ गया है तो उसे बच्चा न समझो. बाप के जूते में बेटे का पैरसेट होने लगे तो भी उसपर से बच्चा होने का दबाव हट जाता है. लेकिन कहावत औरप्रैक्टिकल में फर्क है गुरू. अखिलेश कितना बड़े तीस मार खां और सीएम पीएम हो जाएं,मुलायम की नजर में स्वेटर की बांह में नाक पोंछने वाले टीपू ही रहेंगे. तभी तो जबदेखो डपटते रहते हैं. इस बात की फिक्र नहीं कि लड़का सीएम है. या कहीं ऊंचा मंच सजाहै, सामने पब्लिक खड़ी है. या पार्टी मीटिंग चल रही है जिसमें रिश्तेदारों से लेकरबड़े छोटे तमाम लोग आए हैं. कहीं भी हड़काने लगते हैं. इस लड़ाई से ये प्रूव हो गयाकि वो जिंदा रहते टिपिकल बाप ही रहेंगे.अहसान नहीं भूलेनेता बनने के लिए जो अर्हता होती है उसके लिए एक कहानी सुनाई जाती है. कि बेटे नेबाप से कहा कि पापा मुझे भी राजनीति सीखनी है. बाप ने कहा जाओ छत पर से कूद जाओ,यहां मैं तुमको कैच कर लूंगा. बेटा कूद गया भैया. बाप नीचे से सरक गया. फिर हाथपांव तुड़ाए बेटे से कहा कि ये होती है राजनीति. बाप बेटे का सगा नहीं होता. और एकबात. इसमें एहसान या विचारधारा जैसी कोई चीज नहीं होती. ये बात रीता बहुगुणा जोशीसे बेहतर कौन बता सकता है यूपी वालों को. लेकिन मुलायम ने राजनीति की इस फिलॉसफी कोसिर के बल उलटकर खड़ा कर दिया. वो अमर सिंह का एहसान सीने पर रखे ढो रहे हैं. पूरापरिवार चाहे ईंट लेकर एक दूसरे का सिर फोड़ डाले लेकिन उस एहसान में दबे मुलायम अमरसिंह के बारे में एक भी टेढ़ी बात नहीं सुनेंगे. अब वो एहसान क्या है ये उन्हीं सेपूछना.मोहनी मूरत मोदीइधर यूपी में क्या देश में ही मोदी की लहर चल रही है. जो इस लहर के खिलाफ है (अगरकिसी में औकात हो तो दिखाए) तो वो एंटीक पीस होगा. उसे म्यूजियम में रखा जा रहा हैया भरे चौराहे गरिया के कान के कीड़े झाड़ दिए जा रहे हैं. मोदी की तारीफ करनासंस्कार हैं भैया, संस्कृति है. और इस झगड़े के दौरान इस संस्कृति को अच्छे सेनिभाया नेताजी ने. मोदी की तारीफ की. कहा उनसे सीखो. पीएम बन गए लेकिन मां केसम्मान में कोई कमी न रखी. बात वाजिब है. नेताजी को शायद एहसास है कि उनका लड़का घरके कटोरी चम्मच तक बटवाएगा, पार्टी की तो बात ही क्या. इसलिए संस्कारी होते हुएउन्होंने मोदी की मिसाल दी.गरीब को सम्मान और सम्मानित को पार्टीअगली गाली नेताजी की इंसानियत पर सवाल उठाने वाला खाएगा. उन्होंने भारत की प्राचीनसंस्कृति निभाई. आदमी कितना भी बड़ा हो जाए, छोटों को साथ लेकर चलता है. इसलिएउन्होंने गायत्री प्रजापति को वापस बुलाया. टीवी पर नेताजी की आवाज देखने वालों नेसाफ साफ सुना होगा. जब उन्होंने कहा कि गायत्री प्रजापति गरीब परिवार से हैं इसलिएउनको पार्टी में वापस बुलाया. तो एक तरफ गरीब को पार्टी में मुकाम दिलाया. दूसरीतरफ मुख्तार अंसारी 'सम्मानित' को. उन्होंने कहा कि मुख्तार का परिवार सम्मानित औरईमानदार है. उनके ऊपर 30 से ऊपर मुकदमे चल रहे हैं लेकिन कोई झंझट नहीं. खुद उपराष्ट्रपति उनसे प्रेम से मिलते हैं इसलिए सम्मानित हैं और समाजवादी पार्टी के साथरहेंगे. और हां, पार्टी नहीं टूटेगी.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: मुलायम ने गले मिलवाया, लेकिन फिर झगड़ पड़े अखिलेश-शिवपाल साइकिलटूटी तो अमर सिंह पंचर वाला कांटा हथिया लेंगे अखिलेश यादव का सामान कमरे से निकालफ़ेंका था शिवपाल ने! अखिलेश को लताड़ कर बोले मुलायम, 'अमर-शिवपाल मेरे भाई, अलगनहीं हो सकता'