मोदी 2.0: कोरोना संकट तो अब आया, लेकिन एक साल में हेल्थ सेक्टर को लेकर सरकार ने क्या किया
30 मई को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा हुआ.
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हेल्थ सेक्टर में मोदी सरकार की आयुष्मान योजना का ज़िक्र ज़रूर होता है. इसके अलावा योग, स्वच्छ भारत को बढ़ावा दिया गया है. कोरोना वायरस के दौर में भारत के हेल्थ सेक्टर की कमियां और चुनौतियां खुलकर सामने आई हैं. फोटो: PTI
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31 मई, 2020. मन की बात. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि सरकार की सबसे बड़ी हेल्थ स्कीम 'आयुष्मान भारत' से अब तक एक करोड़ से ज़्यादा लोगों को फायदा मिला है. उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ पाने वालों में करीब 80 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों से आते हैं. इनमें 50 फीसदी महिलाएं हैं.
अगला दिन 1 जून. बेंगलुरु की राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज का 25वां फाउंडेशन डे. पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की बात कही, जिसमें उन्होंने योग, आयुर्वेद, जनरल फिटनेस, स्वच्छ भारत का ज़िक्र किया. आयुष्मान योजना वाली बात फिर दोहराई.
कोरोना वायरस के दौर में भारत का हेल्थ सेक्टर सबसे ज़्यादा चर्चा में आया है, तो पीएम मोदी भी इस पर खूब बोल रहे हैं. लेकिन इस दौर में देश के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमियां उधड़कर दिख गई हैं. 30 मई, 2020 को मोदी सरकार 2.0 का एक साल पूरा हुआ. सरकार की तरफ से रिपोर्ट कार्ड पेश किए जा रहे हैं. हम भी देख लेते हैं कि हेल्थ सेक्टर को लेकर बीते एक साल में कौन-से तीन बड़े काम हुए और कौन-सी तीन नाकामियां रहीं. बड़े फैसले 1. आयुष्मान भारत
वैसे तो आयुष्मान भारत या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) 2019 लोकसभा चुनाव से पहले की है, लेकिन पिछले एक साल में अब तक सरकार का सबसे ज़्यादा फोकस इसी योजना पर है. हेल्थ सेक्टर में सरकार की तमाम योजनाओं में ये 'चेरी ऑन द टॉप' बन चुकी है. पीएम मोदी ने झारखंड के रांची से 23 सितंबर, 2018 को ये योजना लॉन्च की थी. इससे पहले स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2018) को लालकिले से पीएम मोदी ने इसका ऐलान किया था.
ये एक हेल्थकेयर इंश्योरेंस स्कीम है. 10 करोड़ परिवारों और 50 करोड़ नागरिकों को इलाज के लिए पांच लाख रुपए सालाना हेल्थ कवर देने की बात कही गई. इसके लिए इंश्योरेंस कार्ड दिए जाते हैं. इसे दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर इंश्योरेंस योजना बताया गया. अब एक साल के रिपोर्ट कार्ड में सरकार कह रही है कि एक करोड़ से ज़्यादा लोगों को इस योजना का फायदा मिल चुका है.

हेल्थ सेक्टर में मोदी सरकार के काम-काज की चर्चा हो तो आयुष्मान भारत का नाम सबसे पहले आता है. झारखंड के रांची में योजना की शुरुआत करते पीएम मोदी. फोटो: PTI
2. हेल्थ बजट में लगातार बढ़ोतरी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट फरवरी, 2020 में पेश किया. वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए हेल्थ सेक्टर को 69,000 करोड़ रुपए की घोषणा हुई. इसमें से 6,400 करोड़ रुपए आयुष्मान योजना को मिले. योजना को विस्तार देने की बात कही गई. इसके लिए टियर 2 और टियर 3 शहरों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अस्पताल बनाने की बात हुई. मिशन इंद्रधनुष के तहत टीकाकरण का विस्तार करने की घोषणा हुई. 'टीबी हारेगा-देश जीतेगा' अभियान के बारे में बताया गया.
द प्रिंट
की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में पीएम मोदी के पहली बार सत्ता में आने के बाद लगातार 21.83 फीसदी की औसत से हेल्थ बजट में बढ़ोतरी हुई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को COVID-19 के लिए 15 हज़ार करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान किया था. पिछले दिनों प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से PM CARES फंड से 3,100 करोड़ रुपए आवंटित करने की बात कही गई, जिसका इस्तेमाल वेंटिलेटर, पीपीई किट खरीदने में किया जाएगा.

1 फरवरी, 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार 2.0 का पहला पूर्ण बजट पेश किया था. फोटो: LSTV
3. स्वच्छ भारत, योग, आयुष
सरकार की तरफ से स्वास्थ्य को लेकर स्वच्छता, योग पर काफी ज़ोर दिया गया है. वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए स्वच्छ भारत अभियान के लिए 12,294 करोड़ रुपए की घोषणा हुई. जल शक्ति मंत्रालय
के मुताबिक, अब तक 706 ज़िलों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है. 2 अक्टूबर, 2014 में स्वच्छ भारत अभियान शुरू होने से लेकर अब तक 1028 लाख टॉयलेट बने हैं.
योग को लेकर पीएम मोदी काफी सक्रिय दिखे हैं. 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है. पिछले कार्यकाल में आयुर्वेद, योग, नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी को मिलाकर आयुष (AYUSH) मंत्रालय बनाया गया था, जो कि पहले एक विभाग था. आयुष मंत्रालय का कहना है कि मंत्रालय COVID-19 को लेकर काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के साथ मिलकर पब्लिक हेल्थ को लेकर कई रिसर्च कर रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कार्यकाल से लेकर अब तक स्वच्छ भारत पर काफी जोर दिया है. उन्होंने कहा कि स्वच्छता का स्वास्थ्य से संबंध है. इसके अलावा उन्होंने योग को भी बढ़ावा दिया. फाइल फोटो: India Today
बड़ी नाकामी 1. कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते केस
कहा गया कि सरकार ने समय पर लॉकडाउन लगाया, लेकिन इसके बावजूद कोरोना के केस बढ़ते ही चले गए. 25 मार्च, 2020 को देश में पहला लॉकडाउन लगा था. लॉकडाउन के पहले कोरोना वायरस के 657 मामले थे, लेकिन 31 मई तक ये बढ़कर 1.90 लाख हो गए. अब तक पांच हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. टेस्टिंग कम हुई. टेस्टिंग किट में गड़बड़ियां पाई गईं. पीपीई किट, वेंटिलेटर की कमी है. कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जैसी चीजों में चूक हुई.
कोरोना से लड़ने के लिए सुविधाओं की कमी की ख़बरें भरी पड़ी हैं. डॉक्टर-नर्स समेत तमाम कोरोना वॉरियर संक्रमित हुए हैं. डेक्कन क्रॉनिकल
के मुताबिक, 30 मई को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अस्थायी तौर पर बताया कि अब तक करीब 31 डॉक्टर और तीन नर्स की COVID-19 से मौत हो चुकी है. प्राइवेट अस्पतालों को COVID स्पेशल बेड रिज़र्व करने के निर्देशों के बावजूद वो इलाज करने से इनकार कर रहे हैं. इलाज हो रहा है, तो पैसे बहुत लग रहे हैं. सरकार प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लगाने में नाकाम रही है. कई सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का भारी अभाव है.

एक जून को एक दिन में कोरोना संक्रमितों की संख्या 8 हज़ार को पार कर गई. लॉकडाउन के दौरान ये कर्व लगातार बढ़ा है. फोटो: गूगल स्टैटिस्टिक्स
2. 'आयुष्मान भारत' में कई खामियां
सरकार के दावे से उलट 'आयुष्मान भारत' योजना में ज़मीनी स्तर पर बहुत-सी खामियां हैं. इकॉनमिक टाइम्स
की एक ख़बर के मुताबिक, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी इस योजना के कई 'लूप होल्स' की तरफ इशारा किया. कहा गया कि इतने कम हेल्थ बजट में इतनी बड़ी योजना को सफल बनाना संभव नहीं है.
हेल्थ राज्यों का विषय है, लेकिन इसके लिए सभी राज्यों को भरोसे में नहीं लिया गया. दिल्ली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना जैसे राज्यों ने इसका विरोध किया. इंश्योरेंस कार्ड में घपलेबाजी को लेकर शिकायतें आईं. जो लाभार्थी की कैटेगरी में नहीं आते, उन्होंने भी कार्ड बनवाए. नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) जिसके ऊपर ये योजना लागू कराने का जिम्मा है, उसका कहना है कि अब तक 10 करोड़ ई-कार्ड दिए जा चुके हैं, लेकिन सरकार के पास ऐसा कोई ज़रिया नहीं है कि पता लगाया जा सके कि सही लोग ही कार्ड बनवा रहे हैं. बिजनेस लाइन
की एक रिपोर्ट बताती है कि बड़े प्राइवेट अस्पतालों ने योजना से दूरी बना रखी है, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी लागत पूरी नहीं होगी. बहुत से रिमोट इलाकों में ये योजना ठीक से पहुंच नहीं पा रही है.

ऐसी ख़बरें आ चुकी हैं कि बहुत से लोग आयुष्मान भारत का लाभ उठाने के लिए ग़लत आवेदन कर रहे हैं. फोटो: pmjay.gov.in
3. हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत अभी भी खराब है. मेडिकल कॉलेज और डॉक्टरों की कमी है. रिसर्च पर ज्यादा ज़ोर नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हमारा लक्ष्य हर ज़िले में मेडिकल कॉलेज खोलना है. स्क्रॉल
की एक रिपोर्ट बताती है कि पहले कार्यकाल में अलग-अलग फेज में 16 एम्स की घोषणा की गई, जिनमें ज़्यादातर ज़मीन के पचड़े और दूसरी वजहों से लटके हुए हैं. सरकार का कहना है कि इनमें छह पूरी तरह चल रहे हैं. जून, 2019 में दूसरे कार्यकाल में 22 नए एम्स
को अप्रूवल दे दिया गया. एम्स की घोषणाएं खूब हो रही हैं, लेकिन उन पर काम बहुत सुस्त तरीके से हो रहा है.

लोकसभा चुनाव से पहले 22 नए एम्स का ऐलान किया गया था, जिसे मोदी सरकार 2.0 में अप्रूवल दिया गया. फोटो: PIB
हमारे यहां कुल जीडीपी में नाममात्र का खर्च हेल्थ पर होता है, जो कि कई देशों की तुलना में बहुत कम है. लाइव मिंट
की रिपोर्ट कहती है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में केंद्र और राज्यों का स्वास्थ्य पर खर्च कुल जीडीपी का 1.29 फीसदी रहा.

सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी से लेकर बच्चों की मौत की ख़बरें आती हैं. सांकेतिक फोटो: India Today
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
सरकार की एक साल की उपलब्धियों और नाकामियों पर हमने हेल्थ सेक्टर से जुड़े कुछ एक्सपर्ट्स से बात की.
मोदी सरकार की आयुष्मान, शौचालय, आवास और बिजली योजना की ऐसी पड़ताल न देखी होगी
अगला दिन 1 जून. बेंगलुरु की राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज का 25वां फाउंडेशन डे. पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रिवेंटिव हेल्थकेयर की बात कही, जिसमें उन्होंने योग, आयुर्वेद, जनरल फिटनेस, स्वच्छ भारत का ज़िक्र किया. आयुष्मान योजना वाली बात फिर दोहराई.
कोरोना वायरस के दौर में भारत का हेल्थ सेक्टर सबसे ज़्यादा चर्चा में आया है, तो पीएम मोदी भी इस पर खूब बोल रहे हैं. लेकिन इस दौर में देश के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमियां उधड़कर दिख गई हैं. 30 मई, 2020 को मोदी सरकार 2.0 का एक साल पूरा हुआ. सरकार की तरफ से रिपोर्ट कार्ड पेश किए जा रहे हैं. हम भी देख लेते हैं कि हेल्थ सेक्टर को लेकर बीते एक साल में कौन-से तीन बड़े काम हुए और कौन-सी तीन नाकामियां रहीं. बड़े फैसले 1. आयुष्मान भारत
वैसे तो आयुष्मान भारत या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) 2019 लोकसभा चुनाव से पहले की है, लेकिन पिछले एक साल में अब तक सरकार का सबसे ज़्यादा फोकस इसी योजना पर है. हेल्थ सेक्टर में सरकार की तमाम योजनाओं में ये 'चेरी ऑन द टॉप' बन चुकी है. पीएम मोदी ने झारखंड के रांची से 23 सितंबर, 2018 को ये योजना लॉन्च की थी. इससे पहले स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2018) को लालकिले से पीएम मोदी ने इसका ऐलान किया था.
ये एक हेल्थकेयर इंश्योरेंस स्कीम है. 10 करोड़ परिवारों और 50 करोड़ नागरिकों को इलाज के लिए पांच लाख रुपए सालाना हेल्थ कवर देने की बात कही गई. इसके लिए इंश्योरेंस कार्ड दिए जाते हैं. इसे दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर इंश्योरेंस योजना बताया गया. अब एक साल के रिपोर्ट कार्ड में सरकार कह रही है कि एक करोड़ से ज़्यादा लोगों को इस योजना का फायदा मिल चुका है.

हेल्थ सेक्टर में मोदी सरकार के काम-काज की चर्चा हो तो आयुष्मान भारत का नाम सबसे पहले आता है. झारखंड के रांची में योजना की शुरुआत करते पीएम मोदी. फोटो: PTI
2. हेल्थ बजट में लगातार बढ़ोतरी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट फरवरी, 2020 में पेश किया. वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए हेल्थ सेक्टर को 69,000 करोड़ रुपए की घोषणा हुई. इसमें से 6,400 करोड़ रुपए आयुष्मान योजना को मिले. योजना को विस्तार देने की बात कही गई. इसके लिए टियर 2 और टियर 3 शहरों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अस्पताल बनाने की बात हुई. मिशन इंद्रधनुष के तहत टीकाकरण का विस्तार करने की घोषणा हुई. 'टीबी हारेगा-देश जीतेगा' अभियान के बारे में बताया गया.
द प्रिंट
की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में पीएम मोदी के पहली बार सत्ता में आने के बाद लगातार 21.83 फीसदी की औसत से हेल्थ बजट में बढ़ोतरी हुई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को COVID-19 के लिए 15 हज़ार करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान किया था. पिछले दिनों प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से PM CARES फंड से 3,100 करोड़ रुपए आवंटित करने की बात कही गई, जिसका इस्तेमाल वेंटिलेटर, पीपीई किट खरीदने में किया जाएगा.

1 फरवरी, 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार 2.0 का पहला पूर्ण बजट पेश किया था. फोटो: LSTV
3. स्वच्छ भारत, योग, आयुष
सरकार की तरफ से स्वास्थ्य को लेकर स्वच्छता, योग पर काफी ज़ोर दिया गया है. वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए स्वच्छ भारत अभियान के लिए 12,294 करोड़ रुपए की घोषणा हुई. जल शक्ति मंत्रालय
के मुताबिक, अब तक 706 ज़िलों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है. 2 अक्टूबर, 2014 में स्वच्छ भारत अभियान शुरू होने से लेकर अब तक 1028 लाख टॉयलेट बने हैं.
योग को लेकर पीएम मोदी काफी सक्रिय दिखे हैं. 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है. पिछले कार्यकाल में आयुर्वेद, योग, नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी को मिलाकर आयुष (AYUSH) मंत्रालय बनाया गया था, जो कि पहले एक विभाग था. आयुष मंत्रालय का कहना है कि मंत्रालय COVID-19 को लेकर काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के साथ मिलकर पब्लिक हेल्थ को लेकर कई रिसर्च कर रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कार्यकाल से लेकर अब तक स्वच्छ भारत पर काफी जोर दिया है. उन्होंने कहा कि स्वच्छता का स्वास्थ्य से संबंध है. इसके अलावा उन्होंने योग को भी बढ़ावा दिया. फाइल फोटो: India Today
बड़ी नाकामी 1. कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते केस
कहा गया कि सरकार ने समय पर लॉकडाउन लगाया, लेकिन इसके बावजूद कोरोना के केस बढ़ते ही चले गए. 25 मार्च, 2020 को देश में पहला लॉकडाउन लगा था. लॉकडाउन के पहले कोरोना वायरस के 657 मामले थे, लेकिन 31 मई तक ये बढ़कर 1.90 लाख हो गए. अब तक पांच हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. टेस्टिंग कम हुई. टेस्टिंग किट में गड़बड़ियां पाई गईं. पीपीई किट, वेंटिलेटर की कमी है. कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जैसी चीजों में चूक हुई.
कोरोना से लड़ने के लिए सुविधाओं की कमी की ख़बरें भरी पड़ी हैं. डॉक्टर-नर्स समेत तमाम कोरोना वॉरियर संक्रमित हुए हैं. डेक्कन क्रॉनिकल
के मुताबिक, 30 मई को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने अस्थायी तौर पर बताया कि अब तक करीब 31 डॉक्टर और तीन नर्स की COVID-19 से मौत हो चुकी है. प्राइवेट अस्पतालों को COVID स्पेशल बेड रिज़र्व करने के निर्देशों के बावजूद वो इलाज करने से इनकार कर रहे हैं. इलाज हो रहा है, तो पैसे बहुत लग रहे हैं. सरकार प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर लगाम लगाने में नाकाम रही है. कई सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का भारी अभाव है.

एक जून को एक दिन में कोरोना संक्रमितों की संख्या 8 हज़ार को पार कर गई. लॉकडाउन के दौरान ये कर्व लगातार बढ़ा है. फोटो: गूगल स्टैटिस्टिक्स
2. 'आयुष्मान भारत' में कई खामियां
सरकार के दावे से उलट 'आयुष्मान भारत' योजना में ज़मीनी स्तर पर बहुत-सी खामियां हैं. इकॉनमिक टाइम्स
की एक ख़बर के मुताबिक, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी इस योजना के कई 'लूप होल्स' की तरफ इशारा किया. कहा गया कि इतने कम हेल्थ बजट में इतनी बड़ी योजना को सफल बनाना संभव नहीं है.
हेल्थ राज्यों का विषय है, लेकिन इसके लिए सभी राज्यों को भरोसे में नहीं लिया गया. दिल्ली, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना जैसे राज्यों ने इसका विरोध किया. इंश्योरेंस कार्ड में घपलेबाजी को लेकर शिकायतें आईं. जो लाभार्थी की कैटेगरी में नहीं आते, उन्होंने भी कार्ड बनवाए. नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) जिसके ऊपर ये योजना लागू कराने का जिम्मा है, उसका कहना है कि अब तक 10 करोड़ ई-कार्ड दिए जा चुके हैं, लेकिन सरकार के पास ऐसा कोई ज़रिया नहीं है कि पता लगाया जा सके कि सही लोग ही कार्ड बनवा रहे हैं. बिजनेस लाइन
की एक रिपोर्ट बताती है कि बड़े प्राइवेट अस्पतालों ने योजना से दूरी बना रखी है, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी लागत पूरी नहीं होगी. बहुत से रिमोट इलाकों में ये योजना ठीक से पहुंच नहीं पा रही है.

ऐसी ख़बरें आ चुकी हैं कि बहुत से लोग आयुष्मान भारत का लाभ उठाने के लिए ग़लत आवेदन कर रहे हैं. फोटो: pmjay.gov.in
3. हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ज़ोर नहीं
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत अभी भी खराब है. मेडिकल कॉलेज और डॉक्टरों की कमी है. रिसर्च पर ज्यादा ज़ोर नहीं है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हमारा लक्ष्य हर ज़िले में मेडिकल कॉलेज खोलना है. स्क्रॉल
की एक रिपोर्ट बताती है कि पहले कार्यकाल में अलग-अलग फेज में 16 एम्स की घोषणा की गई, जिनमें ज़्यादातर ज़मीन के पचड़े और दूसरी वजहों से लटके हुए हैं. सरकार का कहना है कि इनमें छह पूरी तरह चल रहे हैं. जून, 2019 में दूसरे कार्यकाल में 22 नए एम्स
को अप्रूवल दे दिया गया. एम्स की घोषणाएं खूब हो रही हैं, लेकिन उन पर काम बहुत सुस्त तरीके से हो रहा है.

लोकसभा चुनाव से पहले 22 नए एम्स का ऐलान किया गया था, जिसे मोदी सरकार 2.0 में अप्रूवल दिया गया. फोटो: PIB
हमारे यहां कुल जीडीपी में नाममात्र का खर्च हेल्थ पर होता है, जो कि कई देशों की तुलना में बहुत कम है. लाइव मिंट
की रिपोर्ट कहती है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में केंद्र और राज्यों का स्वास्थ्य पर खर्च कुल जीडीपी का 1.29 फीसदी रहा.

सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं की कमी से लेकर बच्चों की मौत की ख़बरें आती हैं. सांकेतिक फोटो: India Today
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
सरकार की एक साल की उपलब्धियों और नाकामियों पर हमने हेल्थ सेक्टर से जुड़े कुछ एक्सपर्ट्स से बात की.
(1)इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व प्रेसिडेंट केके अग्रवाल सरकार की उपलब्धियों को लेकर कहते हैं,
उपलब्धि तो यही है कि कोरोना वायरस की वजह से हेल्थ पर सबका ध्यान गया. अब हेल्थ बजट और हेल्थ का महत्व ज़्यादा होगा. हेल्थ मिनिस्टर का महत्व नंबर तीन पर हो जाएगा. हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ेगा. MSME में हेल्थ सेक्टर को लेने से छोटी-छोटी जगहों पर अस्पताल बनेंगे.कमियों के बारे में केके अग्रवाल कहते हैं,
कमियां तो सामने नज़र आ रही हैं कि हम कोरोना को कंट्रोल नहीं कर पा रहे. इन्हीं कमियों से हम सीख रहे हैं. हम दूरदर्शी नहीं थे. आयुष्मान योजना अच्छी है, लेकिन इसे सही से लागू करने की अभी ज़रूरत है.पब्लिक हेल्थ को लेकर काम करने वाले ऐक्टिविस्ट अमूल्य निधि सरकार पर हेल्थ सेक्टर के प्राइवेटाइजेशन का आरोप लगाते हैं. उन्होंने कहा,
(2)
मोदी सरकार ने प्राइमरी हेल्थकेयर को पूरी तरह कमजोर किया है. 'आयुष्मान भारत' एक बीमा आधारित स्कीम है, जो प्राइवेट सेक्टर को फायदा पहुंचाने के लिए लाई गई है. इससे प्राइवेट सेक्टर मजबूत होगा और सरकारी सिस्टम कमजोर हो रहा है. बजट में सरकार ने ज़िला अस्पताल, जो कि प्राइमरी हेल्थकेयर का बैकबोन होता है, उसे पीपीपी मॉडल पर चलाने की बात की. अमेरिका में ये मॉडल फेल हो चुके हैं.कोरोना वायरस को लेकर सरकार की सक्रियता पर वो कहते हैं,
COVID की बात करें, तो 30 जनवरी से 10 मार्च तक सरकार पॉलिटिकल कार्यक्रम में लगी हुई थी. आपने प्लानिंग नहीं की. केरल में आपकी सरकार नहीं है, फिर भी अगर वहां की सरकार ने अच्छे काम किएस तो आपको सीखना चाहिए. आप मुफ्त इलाज नहीं दे पा रहे हैं. प्राइवेट में पैसा लग रहा है.अमूल्य निधि कहते हैं कि कितने अस्पताल ऐसे हैं, जहां बिल्डिंग प्रॉपर नहीं है. आयुष्मान भारत से कितने COVID-19 मरीजों का इलाज हुआ है? कितने अस्पताल बनाए? सरकार ये डेटा बताए.
मोदी सरकार की आयुष्मान, शौचालय, आवास और बिजली योजना की ऐसी पड़ताल न देखी होगी

