"सपने में इरफान से बहुत लंबी बात हुई, मैं समझ गई, वो जाने वाला है"
Mita Vashisht ने बताया सपने में Irrfan से 45 मिनट बात की. बहुत हंस रहे थे. जब उनकी आंख खुली, तो वो बहुत शांत महसूस कर रही थीं.

Mita Vashisht. टीवी और सिनेमा का जाना-पहचाना नाम. मीता पिछले दिनों लल्लनटॉप के स्पेशल प्रोग्राम ‘गेस्ट इन द न्यूज़रूम’ में बतौर गेस्ट पहुंची थीं. यहां उन्होंने बताया कि Irrfan के निधन का अंदेशा उन्हें पहले ही हो गया था. मीता और इरफान NSD (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) के बैचमेट हैं. बहुत गहरी दोस्ती थी. इरफान की पत्नी सुतपा भी मीता की NSD में रूममेट रही हैं.
गेस्ट इन द न्यूज़रूम में मीता ने इरफान के अंतिम संस्कार में शामिल होने का वाकया बताया. उन्होंने कहा,
“उस समय लॉकडाउन हुआ ही था. लोग बहुत घबराए हुए थे. अशोक (मीता और इरफान के दोस्त) गोरेगांव से आया. मुझसे बोला, ‘इरफान के फ्यूनरल में जाना है न?’. मैंने कहा, ‘बिल्कुल जाना है, कैसे भी’. हम लोग पूरा चेहरा ढंक कर गए. क्योंकि वो लॉकडाउन का पहला फेज़ था. मीडिया वहां पर खड़ी हुई थी. हमने शक्ल भी नहीं दिखाई. कब्रिस्तान वाले से बोलते रहे कि हमको जाने दो. वो हमारा बैचमेट है. उस वक्त इरफान बड़े स्टार थे. कुछ ऐसे भी लोग आ रहे थे, जिनका इरफान से कोई लेना-देना नहीं था. वो अपनी शक्ल मीडिया को दिखाते. जिससे मीडिया क्रेज़ी हो जाती. हम लोगों ने अपनी शक्ल दिखाया भी नहीं. कौन हैं हम लोग!”
बातचीत में मीता ने आगे बताया कि वो लोग कब्रिस्तान में कैसे घुसे. उन्होंने कहा,
"फाइनली, अशोक जा पाया. हम दो घंटे से खड़े हुए थे. धूप बहुत थी. हम लोग अपना मुंह भी खोल नहीं रहे. अंदर मौजूद लोगों को हम फोन कर रहे हैं कि हमको अंदर लो. जब फाइनली बैरिकेड हटा, उन्होंने कहा आप जाइए. एक्चुअली कब्रिस्तान में महिलाओं नहीं जा सकती हैं. वहां पर एक ग्रिल थी मुझे दिखा इरफान का ताबूत. वो जा रहा था. मैंने कहा, ‘चलो बाय!’ फिर अचानक पता नहीं कुछ हुआ और सब मुड़ गए. ताबूत मेरे पास से गुज़रता हुआ गया. कुछ प्रॉबलम थी. मैं बहुत हंसी...मैने कहा, ‘देख आ गया बाय बोलने’.
मीता ने बताया कि इरफान की मौत का अंदेशा उन्हें उनके गुज़रने से कुछ हफ्तों पहले ही हो गया था. इस बाबत वो कहती हैं,
"इरफान के निधन के हफ्ते-दस दिन पहले सपने में हमारी बहुत लंबी बात हुई थी. ऐसे आया और बोला बहुत दिन हो गए यार. हम मिले नहीं. मुझे याद है कि हमने ड्रीम टाइम में 45 मिनट बात की. बहुत हंस रहे थे. और जब मेरी आंख खुली, तो मैं बहुत शांत महसूस कर रही थी. बहुत खुश. मैंने कहा ये तो जाने वाला है. ये नहीं रहने वाला. शायद 1-2 दिन में इरफान जाएगा. मैंने हमारे एक दोस्त को फोन किया. जो उनका नज़दीकी है. न्यूमरोलॉजिस्ट, जिससे वो कंसल्ट करते थे कई साल से. मैंने उनको कॉल किया, ‘किधर है इरफान?’ तो उसने कहा इगतपुरी में अपने फार्म हाउस पर है. मैंने पूछा, ‘कैसा है इरफान?’ उसने कहा ठीक है. क्योंकि वो लंदन में भी थे ट्रीटमेंट के लिए.
अनूप से ही पता चलता रहता था, कि वो कहां हैं. तब वो बहुत ज़्यादा बात नहीं करते थे. मैंने पूछा, ‘कैसे हैं इरफान?’ उसने कहा ठीक हैं. मैंने कहा, ‘नहीं वो बहुत ज़्यादा रहने वाला नहीं है. वो निकल जाएगा. शायद इस वीकेंड'. मैंने कहा, ‘मैं उससे मिलना चाहती हूं’. तब उसने कहा कि वो किसी से मिल नहीं रहा है. सिर्फ सुतपा और दोनों बच्चे हैं. आइसोलेट कर लिया है उसने अपने आपको. वो वीकेंड था. लेकिन अगले वीकेंड तक वो चले गए. ऐसे कनेक्शन कितने अज़ीब होते हैं."
इरफान लंबे समय से कैंसर से लड़ रहे थे. 28 अप्रैल, 2020 को कोलोन इन्फेक्शन के बाद उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती करवाया गया. 29 अप्रैल को उसी अस्पताल में उनका निधन हो गया. इरफान 53 साल के थे. वो अपनी पत्नी सुतपा और दो बच्चों बाबिल और अयान के साथ रहते थे.
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