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नरेंद्र मोदी के सपोर्ट में सनी लियोन ने जारी किया वीडियो

स्वच्छ भारत के लिए कार सेवा कर रही हैं सनी लियोन. उनका नोबेल कनेक्शन भी आया सामने

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Source: Youtube
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प्रतीक्षा पीपी
28 दिसंबर 2015 (अपडेटेड: 29 दिसंबर 2015, 11:21 AM IST)
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वीडियो जारी हो चुका है. सनी का नए गाने रोम-रोम-रोमैंटिक का. जिमसें वो पब्लिक में साफ सफाई कर के नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छ भारत अभियान के लिए अपना सपोर्ट जता रही हैं. https://www.youtube.com/watch?v=CwOXzsDx7Vo देखा आपने? कार धो रही हैं सनी जी. पूरे पैशन के साथ. कोई पब्लिक में कार क्यों धोएगा? पब्लिक स्टेटमेंट देने के लिए. सनी आपको बता रही हैं कि स्वच्छ भारत अभियान कितना जरूरी है. ये अहिंसक कारसेवा है. डरने की जरूरत नहीं. साथ साथ खुद को भी धोए ले रही हैं सनी. शायद दिन सनी और ब्लू पानी का कनेक्शन याद आ गया. और हां, कुछ समय पहने इन्होंने पहनी हुई थी एक स्कर्ट. वो उतार दी है. बताएंगे क्यों. पर पहले कुछ और बताना चाहते हैं.
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सनी लियोन न होतीं तो न टैगोर, न सीवी रमन, न मदर टेरेसा न दुनिया में किसी और को मिलता नोबेल पुरस्कार.
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कवि मनोज मुंतशीर ने अभी-अभी तुषार कपूर जी के माध्यम से दुनिया को ये बताया है कि सनी जी की स्कर्ट उठाने से बनता है डायनामाइट. वही डायनामाइट जिसकी खोज की अल्फ्रेड नोबेल ने. फिर मशहूर हुए. फिर उनके नाम से प्राइज दिया जाने लगा. सब सनी लियोन की स्कर्ट की वजह से. इसीलिए कार धोते समय सनी स्कर्ट उतार देती हैं.
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और भैया कौन कह रहा था MNREGA फ्लॉप हो गया? देखिये तुषार कपूर को बार-बार काम मिल जाता है. बार-बार करियर की शम्आ बुझने के बावजूद. इस बार काम सनी के साथ मिल गया है. कार धोने का.
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खैर, कविता पर आते हैं. गौर फरमाइयेगा: स्कर्ट उठा के तूने कर दिया दिल को डायनामाइट फक फक फकीराना इश्क हुआ है ओवरनाइट 'फक फक' का अर्थ समझ नहीं आया कविराज. या तो आप दिल्ली के वो युवा हैं जिसको 'फक फक' बोलकर 'कूल'त्व की फीलिंग आती है. या फिर शक्तिमान के फैन हैं आप जो 'फक फक फक फक' का साउंड पसंद हो. या गाने में जबरन गाली ठूसना चाहते हैं. तिग्मांशु धूलिया ने कहा है. गाली तब दी जाती है जब शब्दों की कमी हो. शायद कंटेंट की कमी हो गई फिल्म में. https://www.youtube.com/watch?v=CwOXzsDx7Vo 'मेरा रोम रोम रोमांटिक है.' रोम के लोग सुन लें तो पेल देंगे. हालांकि इनकी बीमारी हाइपरसेक्शुअल डिसऑर्डर की लगती है. कविता 'रोम रोम' को पढ़ने का एक और दिलचस्प एंगल भी है. जो 'चवन्नी चैप' नाम का कंटाप फिल्म ब्लॉग चलाने वाले पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज ने फेसबुक पर दिखाया है. [facebook_embedded_post href="https://www.facebook.com/permalink.php?story_fbid=1078750982155887&id=253853834645610"] और ये रहा वो गीत. जब रोम रोम रोमैंटिक नहीं, धार्मिक था. https://www.youtube.com/watch?v=HLPm8OJIAUw    

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