प्रोड्यूसर्स पैसे से भरा बैग लेकर आते, मनोज बाजपेयी उनसे दुश्मनी मोल ले लेते
मनोज ने कहा: "घर चलाने के लिए घटिया फिल्में करना उनकी मजबूरी थी"

मनोज बाजपेयी ऑफबीट फिल्में करने के लिए जाने जाते हैं. उनकी पहली बड़ी फिल्म 'सत्या' ही इसका सबसे बड़ा उदाहरण थी. इसी ने उन्हें स्टार बनाया. वो अपनी स्क्रिप्ट को लेकर बहुत चूजी रहे हैं. पर इससे उन्हें कई नुकसान भी हुए. 'सत्या' की सफलता के बाद अपनी इसी चूजीनेस के कारण मनोज को काम मिलने में काफ़ी समस्या हुई. उन्होंने हाल ही बताया है कि इसके चलते उन्होंने कई दुश्मन बना लिए. कई बड़े प्रोड्यूसर्स उनके पास पैसे से भरा सूटकेस लेकर आते थे, मनोज ने उनको न बोलकर उनसे अपने रिश्ते बिगाड़ लिये. सुचित्रा त्यागी को दिए इन्टरव्यू में उन्होंने कहा:
1971 और 'पिंजर' फिल्म करने के बाद वो बहुत थका हुआ महसूस कर रहे थे. उन्होंने ये भी कहा कि अपना घर चलाने के लिए कुछ घटिया फिल्में करना उनकी मजबूरी थी. जब उन्हें काम मिलना शुरू हुआ, तो पता चला कि मनोज बाजपेयी और इरफ़ान खान जैसे ऐक्टर आ गए हैं. अब ये लोग फिल्ममेकर्स की पहली चॉइस हैं. मनोज कहते हैं:
मनोज बाजपेयी ने राम गोपाल वर्मा पर भी बात की:
अगर वर्कफ्रंट पर देखें तो हाल ही में मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘जोरम’ को रोटर्डम फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर किया गया था. फिल्म को बनाया है देवाशीष मखीजा ने. ‘जोरम’ में मनोज बाजपेयी के साथ मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब भी नज़र आएंगे. इसके अलावा ‘द फैमिली मैन’ का तीसरा सीज़न भी उनके आने वाले प्रोजेक्ट्स में शामिल है. हालिया रिलीज़ ‘फर्ज़ी’ से राज और डीके ने अपने स्पाई यूनिवर्स की शुरुआत कर दी है. मनोज बाजपेयी के कैरेक्टर श्रीकांत तिवारी को भी टीज़ किया गया था. हाल ही में उनकी एक और फिल्म 'गुलमोहर' भी रिलीज हुई है.
वीडियो: फ़िल्म रिव्यू: कैसी है शर्मिला टैगोर और मनोज बाजपेयी की 'गुलमोहर'?

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