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सुपरहिट फ़िल्में देने वाली वो एक्ट्रेस, जिसे प्रॉपर्टी के चक्कर में मार डाला गया

इंडिया की पहली म्यूजिकल कहलाने वाली 'हीर-रांझा' जैसी फिल्म प्रिया राजवंश की फिल्मोग्राफी का हिस्सा रहीं.

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29 मार्च 2023 (अपडेटेड: 29 मार्च 2023, 03:54 PM IST)
प्रिया राजवंश
प्रिया राजवंश का प्यार ही बना उनकी मौत की वजह
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27 मार्च 2000. जगह मुंबई के जुहू के रुइया पार्क में बना एक बंगला. बंगले के अंदर मिलती है एक लाश. बीते समय की जानी मानी अदाकारा प्रिया राजवंश की लाश. इस मौत से पूरा देश स्तब्ध था. पहले खबर आती है कि प्रिया की मौत एक सुसाइड है लेकिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से पूरा सच सामने आ जाता है. रिपोर्ट में पता चलता है कि प्रिया की मौत साधारण मौत नहीं थी. ये एक मर्डर था. प्रिया का गला दबाकर उनकी हत्या की गई थी. मर्डर का आरोप लगा केतन आनंद और विवेक आनंद पर. 

कौन थे केतन और विवेक? ये दोनों मशहूर डायरेक्टर चेतन आनंद और उनकी पत्नी उमा आनंद के बेटे हैं. कहा गया कि प्रॉपर्टी में हिस्सा पाने के लिए इन दोनों ने अपने नौकरों के साथ मिलकर प्रिया की हत्या की थी. वजह थी चेतन आनंद की वसीयत. 1997 में चेतन आनंद की मौत के बाद जब उनकी वसीयत खोली गई, तो बड़ी दिलचस्प बात सामने आई. चेतन ने अपनी वसीयत में प्रॉपर्टी का आधा हिस्सा प्रिया राजवंश के नाम और आधा हिस्सा अपने बेटों के नाम किया था. वसीयत का यही क्लॉज़ प्रिया के मर्डर की वजह बना.

शिमला की वीरा, कैसे बनी प्रिया राजवंश?

प्रिया राजवंश का जन्म 30 दिसंबर 1939 को शिमला में हुआ था. माता- पिता ने नाम रखा वीरा सुन्दर सिंह. वीरा शिमला में ही पली-बढीं. शिमला के ऑकलैंड हाउस से अपनी पढ़ाई की. वो सिर्फ 9 साल की थीं, जब उन्होंने स्टेज पर पहली बार एक्टिंग की थी. अंग्रेजी नाटक 'वर्ल्ड विदआउट मेन' में निभाए उनके किरदार की खूब तारीफ हुई. उन्हें बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड भी मिला. वीरा एक्टिंग ही नहीं, पढ़ाई में भी काफी अच्छी थीं. 1956 में उन्होंने बीए की डिग्री ली और बलराज साहनी के साथ थिएटर करने लगीं. बलराज साहनी कैसे आए उनके जीवन में? बताते हैं.

शिमला से लंदन, लंदन से मुंबई 

दरअसल बलराज साहनी साहब एक यूथ फेस्टिवल देखने के लिए शिमला गए हुए थे. जहां उनकी नज़र वीरा पर पड़ती है और उन्हें वीरा का काम पसंद आ जाता है. वो उन्हें अपने नाटक में ले लेते हैं. वीरा के पिता, जो पेशे से फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट में कन्ज़र्वेटर यानी वन संरक्षक थे, उनका ट्रांसफर हो जाता है. वो यूएन के किसी असाइनमेंट पर थे. लंदन चले जाते हैं. वीरा भी उनके साथ जाती हैं और उसकी आगे की पढ़ाई वहीं होती है. लंदन के रॉयल अकैडमी ऑफ़ ड्रामैटिक आर्ट (RADA ) से वीरा ने ग्रेजुएशन की.

लंदन में रहते हुए उन्होंने कुछ मॉडलिंग असाइनमेंट्स भी किए. वहां एक भारतीय प्रोड्यूसर रणवीर सिंह से वीरा की मुलाक़ात हुई. उन्होंने वीरा को अपनी अंग्रेजी फिल्म 'द लॉन्ग डूएल' के लिए साइन किया. फिल्म को बनने में काफी वक़्त लग रहा था. इसी बीच उन्होंने चेतन आनंद को वीरा के बारे में बताया. चेतन आनंद मशहूर प्रोड्यूसर, राइटर और एक्टर थे. देवानंद के बड़े भाई थे. इत्तफाकन चेतन आनंद भी उस वक़्त एक नई हीरोइन ढूंढ रहे थे.

चेतन आनंद को वीरा की तस्वीर दिखाई गई और उसे देखते ही चेतन आनंद ने कहा- मुझे मेरी हीरोइन मिल गई. वीरा सुंदर सिंह लंदन से मुंबई आ गईं. वीरा सुन्दर सिंह का ये आखिरी दिन था क्योंकि इस के बाद से चेतन आनंद ने उनका नाम बदल दिया. वो बन गईं प्रिया राजवंश. इसी नाम से हम सब उन्हें जानते हैं.

प्रिया की पहली फिल्म थी ‘काफिर’. फिल्म की कहानी पार्टीशन के दुःख को बयां करती थी. ये फिल्म बाद में ठंडे बस्ते में चली गई. 1964 में प्रिया की एक और फिल्म आई, ‘हकीकत’. इसे प्रिया राजवंश की पहली फिल्म कहा जाता है. अपने 20 साल के करियर में प्रिया राजवंश ने मुश्किल से 7-8 फिल्मों में काम किया. वो सारी ही फिल्में चेतन आनंद की थीं. ‘हकीकत’, ‘हीर रांझा’, ‘कुदरत’, ‘हिन्दुस्तान की कसम’, ‘हंसते ज़ख्म’. इनमें से कुछ फ़िल्में बेहद लोकप्रिय रहीं. ‘हीर-रांझा’ को तो इंडिया की पहली म्यूजिकल फिल्म कहा गया. उनकी फिल्मों के गाने भी काफी पॉपुलर रहे. जैसे ‘मिलो ना तुम तो हम घबराए’, ‘बेताब दिल की तमन्ना’, ‘दो दिल टूटे’, ‘तुम जो मिल गए हो’ वगैरह. उन पर फिल्माई गई कव्वाली ‘ये माना मेरी जां’ तो बहुत ही मकबूल हुई. 

प्यार बना परेशानी 

प्रिय राजवंश का प्यार ही उनके लिए परेशानी में बदल गया. फिल्में करते-करते प्रिया राजवंश और चेतन आनंद एक दूसरे को पसंद करने लगे. धीरे-धीरे ये पसंद प्यार में तब्दील हो गई. चेतन आनंद और प्रिया राजवंश के बीच करीब बीस साल का अंतर था, फिर भी प्यार परवान चढ़ा. चेतन आनंद की उमा आनंद के साथ शादी हो चुकी थी. हालांकि प्रिया के मिलने से पहले ही वो अपने बीवी बच्चों से अलग हो गए थे. चेतन आनंद अपनी बीवी से तो अलग हो गए थे लेकिन उनके दोनों बेटे असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर उनके साथ काम कर रहे थे. चेतन आनंद प्रिया राजवंश से जितनी मोहब्बत करते थे उतनी ही नफरत उनके बेटे प्रिया से करते थे. कहा जाता है कि यही नफरत आगे चलकर प्रिया की मौत की वजह बनी. 

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