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जब अनिल कपूर को मां और बेटी दोनों से प्यार हो गया

आज अनिल कपूर अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं.

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24 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 24 दिसंबर 2018, 05:49 AM IST)
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अनिल कपूर और मूंछों स्ट्रॉन्ग कनेक्शन है. इस फिल्म में वो पहली दफा बिना मूंछों के नज़र आए थे.
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22 नवंबर, 1991 की तारीख थी. गुलाबी ठंड पड़नी शुरू हो गई थी. लेकिन रंग सिनेमा का चढ़ रहा था. इस दिन दो फिल्में रिलीज़ होनी थीं. पहली थी यशराज बैनर की यश चोपड़ा डायरेक्टेड 'लम्हे' और दूसरी आज के सुपरस्टार अजय देवगन की डेब्यू फिल्म 'फूल और कांटे'. दोनों फिल्मों में बड़ा अंतर था. पहली वाली जहां एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म थी, तो दूसरी एक स्टार किड को प्रॉपर तरीके से लॉन्च करने के लिए मसाला फिल्म. इन फिल्मों का एक ही दिन रिलीज़ होना महज़ संयोगभर नहीं बल्कि एक सोची-समझी साज़िश थी.
यश चोपड़ा ने 'फूल और कांटे' को समझा था बी-ग्रेड सिनेमा
यश चोपड़ा 'चांदनी' जैसी बड़ी हिट फिल्म देने के बाद कुछ नया ट्राय करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने 'लम्हे' के रूप में एक दांव खेला. वो जीवनभर इसे अपनी पसंदीदा फिल्म बताते रहे थे. हुआ ये कि जब 'लम्हे' बनकर तैयार हुई, तो यश इसे दीवाली के मुबारक और कमाऊ मौके पर रिलीज़ करना चाहते थे. लेकिन उस दौरान अमिताभ बच्चन और रमेश सिप्पी की जोड़ी फिल्म 'अकेला' के साथ सिनेमाघरों में दस्तक दे रही थी. 'शोले' में इस कोलैबरेशन से सब वाकिफ थे. ऐसे में अपनी फिल्म इस जोड़ी के सामने रिलीज़ करना एक बेवकूफाना कदम होता. सो यश ने अपनी फिल्म की रिलीज़ आगे बढ़ा दी.
अगला मौका उनके हाथ लगा 22 नवंबर का. इसी दिन 'फूल और कांटे' लग रही थी. यश को लगा कि ये कोई बी-ग्रेड फिल्म, उनकी फिल्म की वजन के तले ये कहीं दब जाएगी. लेकिन यहां ठीक उल्टा हो गया. फिल्म 'लम्हे' में अनिल कपूर पहले मां और फिर उसके ही जैसी दिखने वाली उसकी बेटी के प्रेम में पड़ जाते हैं. इसलिए 'लम्हे' को समय से आगे की फिल्म बताकर रिजेक्ट कर दी गई, वहीं 'फूल और कांटे' सुपरहिट हो गई. इसके लिए अजय देवगन को फिल्मफेयर बेस्ट मेल डेब्यू एक्टर का अवॉर्ड भी मिला.

फरहान अख्तर की मां ने कपड़ों पर एंब्रॉयडरी का काम छोड़कर ये फिल्म लिखी थी
साल 1978 में जावेद अख्तर और हनी ईरानी का तलाक हो गया. क्योंकि तब तक जावेद शबाना के साथ जावेदा मोहब्बत में पड़ चुके थे. हनी का काम भी कुछ ठीक नहीं चल रहा था. वो खुद को व्यस्त रखने और दो बच्चों को पालने के लिए साड़ियों में एंब्रॉयडरी करने का काम करने लगी थीं. इस दौरान हालांकि उनका लेखन ज़ारी था. वो शॉर्ट स्टोरीज़ वगैरह लिखती रहती थीं. 1993 में आई फिल्म 'आईना' का आइडिया उन्होंने यश चोपड़ा की पत्नी पामेला चोपड़ा को दिया था. 1980-81 के आसपास पामेला चोपड़ा ने जीन वेबस्टर की 'डैडी लॉन्ग लेग्स' नाम की एक नॉवल पढ़ी. इसका ज़िक्र उन्होंने यश और हनी दोनों से किया.
इसके बाद तय हुआ कि इस आइडिया पर एक फिल्म बनाई जाएगी, जिसे हनी ईरानी लिखेंगी. लेकिन तब यश के पास संसाधनों की कमी थी. वो किसी ऐसी फिल्म का इंतज़ार कर रहे थे, जिससे उनके पास पैसे आ जाएं और वो ये फिल्म बना पाएं. यश चोपड़ा के लिए 'चांदनी' वो फिल्म बनकर आई. इसके बाद हनी ने इस फिल्म की कहानी लिखी और यश चोपड़ा ने अपने करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म 'लम्हे' डायरेक्ट की.
ये श्रीदेवी और यश चोपड़ा की एक साथ लगातार दूसरी फिल्म थी. इस फिल्म को भारत में तो पसंद नहीं किया गया लेकिन विदेशों मे ये बड़ी हिट रही थी.
ये श्रीदेवी और यश चोपड़ा की एक साथ लगातार दूसरी फिल्म थी. इस फिल्म को भारत में तो पसंद नहीं किया गया लेकिन विदेशों मे ये बड़ी हिट रही थी.

पहली फिल्म थी, जिसमें अनिल कपूर बिना मूंछों के नज़र आए
कहानी वगैरह तैयार कर लेने के बाद कास्टिंग की तैयारी शुरू हुई. यश ये फिल्म विनोद खन्ना के साथ बनाना चाहते थे. लेकिन कहानी में उस किरदार को जवान से लेकर अधेड़ उम्र तक का सफर तय करना था. ऐसे में यश को लगा कि जवानी वाले हिस्से में विनोद खन्ना प्रॉमिसिंग नहीं लगेंगे. इसके बाद जैकी श्रॉफ को लेने की सोची गई लेकिन वो भी नहीं हो पाया.
इस सब के दौरान अनिल कपूर यश से लगातार उन्हें फिल्म में काम देने के लिए कह रहे थे. यश को उनकी मूंछें पसंद नहीं थी. जबकि अनिल ये कुर्बानी देने को तैयार नहीं थे. इतने में अनिल को लग गई चोट और उन्हें अगला एक महीना अपने घर में गुज़ारना पड़ा. इस दौरान उन्होंने अपने चेहरे के सारे बाल साफ कर दिए. यश ने उन्हें इस रूप में देखा और 'लम्हे' के लिए साइन कर लिया. फिल्म की हीरोइन के लिए उनके जहन में सिर्फ दो नाम थे. जूही चावला और श्रीदेवी. श्रीदेवी के साथ उन्होंने 'चांदनी' जैसी हिट फिल्म दी थी, इसलिए उनका कांटा श्रीदेवी की ओर झुक गया.
'लम्हे' में श्रीदेवी ने डबल रोल किया था. फिल्म में उन्होंने मां और बेटी दोनों का ही किरदार निभाया था.
'लम्हे' में श्रीदेवी ने डबल रोल किया था. फिल्म में उन्होंने मां और बेटी दोनों का ही किरदार निभाया था.

श्रीदेवी के प्रोफेशनलिज़्म के कायल हो गए थे यश
फिल्म की शूटिंग राजस्थान और लंदन में होनी थी. जैसे ही फिल्म का लंदन वाला शेड्यूल पूरा होने को आया श्रीदेवी के परिवार के साथ एक हादसा हो गया. उनके पापा गुज़र गए. इसके बाद श्री इंडिया लौटी और 16 दिन वापस अपनी फिल्म की टीम के पास लंदन पहुंची. यहां पहुंचने के साथ ही उन्हें अनुपम खेर के साथ एक कॉमेडी सीन करना था, जिसे करने की हालत वो में तब वो बिलकुल नहीं थी. इससे पहले कि कोई कुछ कहता श्रीदेवी ने उस सीन को करने के लिए हामी भर दी. शूटिंग शुरू हुई और वो सीन जबरदस्त बन पड़ा. इसके बाद यश चोपड़ा श्रीदेवी के पक्के वाले फैन बन गए.
ये एक अनयूज़ूअल फिल्म थी, जिसमें एक व्यक्ति जिस लड़की की मां से प्यार करता था, उसी की बेटी से प्यार हो जाता है.
ये एक अनयूज़ूअल फिल्म थी, जिसमें एक व्यक्ति पहले एक महिला से और फिर बाद में उसी की बेटी से प्यार कर बैठता है.

फिल्म की हीरोइन ने यश चोपड़ा और अनिल कपूर पर #MeToo का आरोप लगाया था
फिल्म में लीड रोल तो श्रीदेवी कर रही थीं लेकिन साथ में एक और हीरोइन थीं. उनका नाम था डिप्पी सागू. डिप्पी फिल्म में एक ऐसी लड़की का किरदार निभा रही थीं, जिन्हें अनिल के किरदार से प्यार था. फिल्म की रिलीज़ के बाद उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर और लीड एक्टर पर कई आरोप लगाए. उनका पहला इल्जाम ये था कि उन्हें उस रोल के बारे में पहले नहीं बताया गया था. ऊपर से फिल्म के पब्लिसिटी वाले इवेंट्स का भी उन्हें हिस्सा नहीं बनाया गया. उनके मुताबिक ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अनिल कपूर और यश चोपड़ा उनसे कुछ चाहते थे, जो उन्होंने नहीं किया. डिप्पी ने मीडिया में कहा था कि वो दोनों उनसे 'फेवर' मांग रहे थे.
'लम्हे' के डिप्पी के किरदार को अनिल के कैरेक्टर से प्यार हो जाता है.
'लम्हे' के डिप्पी के किरदार को अनिल के कैरेक्टर से प्यार हो जाता है. फिल्म में डिप्पी के किरदार की आवाज़ किरण खेर ने डब की थी.



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