सेंसर बोर्ड पर एक और गंभीर आरोप लगा है!
रमेश व्यास की फिल्म 'लव ऑल' हाल ही में रिलीज़ हुई है. केके मेनन स्टारर ये एक स्पोर्ट्स फिल्म है. रमेश व्यास ने आरोप लगाया है कि उन्हें भी फिल्म को सर्टिफाई करवाने के लिए सीबीएससी को पैसा देना पड़ा था.

पिछले दिनों तमिल एक्टर और प्रड्यूसर विशाल ने सेंसर बोर्ड पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. कहा था कि उन्होंने पैसे देकर अपनी तमिल फिल्म 'मार्क एंटनी' के हिंदी वर्जन को पास करवाया था. ये मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि सीबीएफसी पर एक और गंभीर आरोप लगा है. बॉलीवुड के प्रड्यूसर रमेश व्यास ने भी अब सेंसर बोर्ड पर ऐसा ही आरोप लगाया है. क्या है पूरा मामला आइए समझते हैं.
रमेश व्यास की फिल्म 'लव ऑल' हाल ही में रिलीज़ हुई है. केके मेनन स्टारर ये एक स्पोर्ट्स फिल्म है. रमेश व्यास ने आरोप लगाया है कि उन्हें भी फिल्म को सर्टिफाई करवाने के लिए सीबीएससी को पैसा देना पड़ा था. बॉलीवुड हंगामा से बात करते हुए रमेश ने बताया,
''मुझे अपनी फिल्म को पांच भाषा में सर्टिफाई करवाने के लिए सेंसर बोर्ड को पांच लाख रुपए देना पड़ा. उसके बाद भी फिल्म की रिलीज़ के दो दिन बाद मुझे सिर्फ दो रीजनल भाषा में इसका सर्टिफिकेट मिला.''
रमेश ने आगे बोला,
''मैंने पहले भी अपनी कई फिल्मों को सर्टिफाई करवाया है. मगर ऐसा मेरे साथ पहली बार हुआ है. मैंने आठ भाषाओं के लिए सेंसर सर्टिफिकेट लेने के लिए अप्लाई किया था. पांच भाषाओं में सर्टिफिकेट मिलने के बाद मुझे फिर से पैसे देने के लिए कहा गया. कहां से दूंगा मैं पैसे? मैंने पैसे देने को मना कर दिया और उसके बाद मुझे सर्टिफिकेट नहीं दिया गया.''
रमेश व्यास ने आगे जोड़ा,
''मेरी दूसरी फिल्म रॉनी कन्नड़ा भाषा में बनी थी. उसे भी अभी तक सर्टिफिकेट नहीं मिला है. मुझे तीन तारीख मिली थी तीनों ही तारीखों को कैंसल कर दिया गया. मेरे से कैश की डिमांड की थी. मैंने बोला कि मैं नहीं दूंगा.''
''उन्होंने मुझसे 3.50 लाख रुपए मांगे थे. मैंने देने से इंकार कर दिया. ऑनलाइन पोर्टल पर एप्लीकेशन अंडर प्रोसेस बता रहा है. मैंने उन्हें मेल भी किया, भेजा भी, उन्हें रिलीज़ डेट भी बताई पिक्चर की. मगर अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया. अब मैं तभी फिल्म की दूसरी रिलीज़ डेट अनाउंस कर पाऊंगा जब मेरे हाथ में सर्टिफिकेट होगा.''
वहीं 'लव ऑल' के को-प्रड्यूसर संजय सिंह ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है. बॉलीवुड हंगामा से बात करते हुए संजय ने कहा,
''मैं सेंसर का एजेंट नहीं हूं. हम मेकर्स को सेंसर प्रॉसेस में मदद करते हैं. ये सारे आरोप गलत और बेसलेस हैं. हम सभी रूल्स एंड रेग्युलेशन्स फॉलो करते हैं. ऐसे चक्करों से 10 कदम दूर ही रहते हैं. विशाल जी ने जो कुछ भी कहा वो उनका पर्सनल एक्सपीरिएंस था. लव ऑल के लिए हम सही रूट पर गए थे. सारी चीजें अंडर रिकॉर्ड ही हैं.''
इन सभी आरोपों के बाद इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. एसोसिएशन के प्रेसिडेंट ने CBFC के चेयरपर्सन प्रसून जोशी को एक लेटर लिखा है. और उनसे भ्रष्टाचार के आरोपियों पर एक्शन लेने को कहा है.

