फिल्म रिव्यू: कपूर एंड संस डायरेक्टर: शकुन बतरा कास्ट: ऋषि कपूर, फवाद खान, रत्नापाठक, रजत कपूर, सिद्धार्थ मल्होत्रा, आलिया भट्ट रन टाइम: इंटरवल मिला के लगभग सवा2 घंटे--------------------------------------------------------------------------------एक फैमिली है. फैमिली में क्यूट से दादाजी हैं. रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर. पांव कबर मेंहैं. बची हुई जिंदगी का एक ही मकसद है. न बहू चाहिए, न पोता खिलाना है. न जाना हैतीरथ पर. बस पूरी फैमिली के साथ फोटो खिंचानी है. और उसमें नीचे लिखना है, 'कपूरएंड संस.' दादू आदमी कूल है. और बेशरम. मानो ऋषि कपूर का ट्विटर हैंडल. ठरकी बातेंकरता है. पोतों के साथ जॉइंट पीता है. मतलब ऐसा कि बागबान वाले अमिताभ दादू काअपोजिट. अच्छा लगा देख कर रेगुलर नैतिकबाजी और चाट दादाओं से निकलकर इस बार एकचग्घड़ दादाजी का कैरेक्टर बनाया गया. ये नहीं कह रहे कि दादाओं को पोतों के साथजॉइंट फूंकना चाहिए. लेकिन एक 90 साल का एक जिंदादिल कैरेक्टर जिसके साथ उसके पोतेजेनरेशन गैप न महसूस कर सकें, देख कर फ्रेश लगा. दादा फनी है और फिल्म में आपको बारबार हंसाएंगे. जैसे एक बच्चे के होने से परिवार वालों के बीच कड़वाहट मिट जाती है,उसी तरह दादा की बचकानी हरकतें परिवार को करीब लाती रहती हैं. दादा जिस तस्वीर कीकल्पना करते हैं, असल में टूटी हुई है. क्योंकि घर के सभी लोग किसी न किसी तरह एकदूसरे को धोखा देते हैं. परिवार वैसे नहीं होते जैसे फिल्मों में दिखते हैं. हरइंसान अच्छा और बुरा होता है. हर इंसान कई गलतियां करता है, कई झूठ बोलता है. घर केसदस्यों में कड़वाहट होती है, मार पीट होती है. एक 'आदर्श' परिवार के मिथक को तोड़तीहुई नजर आई फिल्म. लेकिन फिल्म के आखिरी आधे घंटे में ऐसा लगा, जैसे प्लॉट कोकंट्रोल नहीं कर पा रहे है. जैसे एक बिखरे हुए परिवार को जबरन करीब लाने की कोशिशकी गई जिससे एंडिंग 'हैप्पी' हो सके. जिस 'आदर्श' परिवार के मिथक को फिल्म अब तकतोड़ रही थी, उसी को पाने की कोशिश करती दिखाई देती है. ऑडियंस को खुशी-खुशी घरभेजने और अंत में सबकुछ ठीक कर देने का बीड़ा जो बॉलीवुड ने उठाया है, वही काम येफिल्म भी करती है. कई मुद्दे हैं जो फिल्म उठाती है. और उनका अच्छा ट्रीटमेंट करतीहै. युवा जेनरेशन, मॉडर्न औरत, दो भाइयों के बीच में कॉम्पटीशन और जलन, रिश्तों में'चीटिंग' और समलैंगिकता. बस अगर लास्ट में चाट न हुई होती तो अच्छा लगता. फिल्मदेखनी चाहिए, एक बार ही सही. ऋषि कपूर के लिए. और सभी एक्टर्स की परफॉरमेंस के लिए.और फिल्म देख के बताना जरूर कि कैसी लगी.--------------------------------------------------------------------------------देखिए 'कपूर एंड संस' का वीडियो रिव्यू By सौरभ द्विवेदी [facebook_embedded_posthref="https://www.facebook.com/thelallantop/videos/1517757585197746/"]