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लोग मार्केटिंग वालों से पूछते हैं, सेल्समैन बनने के लिए लाखों खर्च क्यों किए?

इस फील्ड में घुस चुके हैं या घुसने वाले हैं, पहले नवीन चौधरी से सर्वाइवल टिप ले लीजिए.

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Source- mspdesigngroup
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20 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 20 अप्रैल 2016, 09:13 AM IST)
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12036521_10153631431018523_4354196580965143912_n_270316-043556-e1459053397636नवीन चौधरी की दो खासियतें हैं. पहली ये कि वो आर्यादित्य के पापा हैं, दूसरी ये कि वो हैंडसम हैं. 12 साल से मार्केटिंग के पेशे में है, इस बार जो लिखा है वो भी मार्केटिंग से ही जुड़ा है. और भी लिखते हैं, ट्विटर हैंडल @naveen1003 पर चौड़ में एक्टिव रहते हैं. इनके पास एक DSLR भी है. दोस्ती बढ़ाने की एक वजह ये भी हो सकती है. पढ़िए क्या पोल खोली है मार्केटिंग वालों की.
आप किसी भी प्रोफाइल या प्रोफेशन में हों, उसमें कुछ न कुछ ऐसी बातें जरूर होती है जो आपकी दुखती रग तो होती है पर यही बातें आपके काम को मजेदार भी बनाती है. सोशल मीडिया के इस दौर में आपने बहुत से इस तरह के किस्से सुने होंगे इंजीनियर्स के बारे में, एडिटर्स के बारे में, रेडियो वालों के बारे में. पर एक सेगमेंट है मार्केटिंग वालों का. इसके बारे में सुनते हम रोज हैं पर किस्से सामने कम आते हैं क्योंकि हम अल्पसंख्यक हैं. यकीन मानिए, मैं अल्पसंख्यक बोल के आरक्षण मांगने नहीं आया. हमारी सबसे बड़ी समस्या या सबसे बड़ा सवाल हमसे किया जाता है कि भाई करते क्या हो? ऐसा इसलिए होता है कि एक आम आदमी के लिए मार्केटिंग का मतलब सेल्स है, पर हम वो करते नहीं. जो हम करते हैं वो उन्हें समझ आता नहीं. ये दोनों डिपार्टमेंट अलग अलग होते हैं. सिंपल सी भाषा में हम प्रमोट करते हैं, सेल्स वाले बेचते हैं. मार्केटिंग के बारे में entrepreneur.com की परिभाषा कुछ यूं है - Marketing is a form of communication between you and your customers with the goal of selling your product or service to them. Communicating the value of your product or service is a key aspect of marketing. And a marketeer is a person who is specialist in promoting the product or service. ऊपर लिखी परिभाषा बहुत फैंसी है और यही फैंसी काम हम करते हैं, पर ये दुनिया जो हमें देखती है वो अलग अंदाज से देखती है और आए दिन हमारी मदद करने को भी तैयार रहती है जो हमारे लिए मुसीबत बन जाती है. मैं 12 साल से कोर मार्केटिंग में रहा हूं और बताना चाहता हूं कि एक मार्केटिंग वाला होना कैसा होता है? अगर आप मार्केटिंग वाले हैं तो समझेंगे और अगर इस फील्ड में आना चाहते है तो आपके लिए सर्वाइवल टिप भी है.

करते क्या हो?

ये सवाल आपके ऑफिस के कलीग्स का होता है. वो ये तो जानते हैं कि आप मार्केटिंग में है पर करते क्या हैं? ये सवाल यूनिवर्सल है, हर इंडस्ट्री में. सलाह: अगर आप समझायेंगे कि आप स्ट्रेटेजी बनाते हैं, advertisement बनवाते हैं तो उन्हें समझ नहीं आएगा कि इसमें आपका क्या काम? स्ट्रेटेजी 5 मिनट में बनती है, ad डिज़ाइनर डिजाईन करता है, पर आप क्या करते हैं? यकीन मानिए, आप कुछ नहीं कर सकते. इसलिए मुस्कुरा के इग्नोर कर दीजिए. साल भर में उन्हें समझ में आ जाएगा.

सेल्समैन बनने के लिए लाखों खर्च?

ये सवाल आपके रिश्तेदारों का होता है और अक्सर शुरुआती सालों में बहुत होता है. उन्हें ये समझ नहीं कि लाखों रुपये आपने MBA में सिर्फ इसलिए खर्च कर दिए कि आप मार्केटिंग वाले / सेल्समैन बने? उन्हें लगता है कि इससे शर्मा जी बेटा ही ठीक था, 10000 रुपये में गुप्ता कोचिंग से रीजनिंग की क्लास ली और 200 रुपये के फॉर्म से परीक्षा देकर बैंक में क्लर्क बन गया. सलाह: मान लीजिये कि शर्मा जी का बेटा हीरा है हीरा और आप कोयला. शांति से रह पाएंगे. ये तो था कि लोग आपके काम के बारे में क्या सोचते हैं. अब ये देखिये कि काम करते वक़्त आपको क्या क्या झेलना होगा.

सेल्स v/s मार्केटिंग

जैसा कि ऊपर मैंने कहा हम एक नहीं पर आपस में जुड़े हुए हैं. सेल्स मार्केटिंग वालों का रिश्ता सौतेले भाइयों जैसा होता है. हमेशा ये मानते हैं की मैनेजमेंट दूसरे वाले को ज्यादा मानता है. अक्सर दोनों अपने को दूसरे से सुपीरियर दिखाने की कोशिश करते हैं पर साथ में मानते ये हैं कि दूसरे की थाली में घी ज्यादा है. सलाह: आप अपने यकीन पर कायम रहिए कि आप सेल्स वालों से बेहतर हैं क्योंकि आप हैं.

बजट

मार्केटिंग मैनेजर की हालत एक भारतीय गृहिणी सी होती है जहां सबको उससे रोज नयी डिश की अपेक्षा रहती है पर किचन में सामान उतना होता नहीं और अगर होता है तो बनाने को टाइम नहीं. मार्केटिंग करने के लिए बजट चाहिए होता है और कंपनी के ऑब्जेक्टिव की तुलना में बजट आपकी जरूरत से हमेशा कम रहता है. एक मार्केटिंग मेनेजर की कुशलता यही होती है कि वो एक गृहिणी की तरह मार्केटिंग के खर्चों को बेटर मैनेज करे और बचा हुए पैसे को नए इनिशिएटिव में लगाए. सलाह: एन्जॉय करिए. आप पैसे का बेहतर मैनेजमेंट सीख जायेंगे.

आईडिया ले लो, मुफ्त मुफ्त मुफ्त

हिंदुस्तान में बस आईडिया ही एक ऐसी चीज है जो मुफ्त मिलती है और सब देने को तैयार होते हैं. हम अब बाकियों से अलग तो हैं नहीं, तो जनाब हमें भी दिन के 5 पलंगतोड़ मार्केटिंग आईडिया मुफ्त के मिलते हैं. सिक्यूरिटी गार्ड से लेकर हाउसकीपिंग स्टाफ, एग्जीक्यूटिव से लेकर सीनियर लेवल (नॉन मार्केटिंग), एडमिन से लेकर फाइनेंस तक सबके पास मार्केटिंग आईडिया है. अगर आपको गलती से उनका कोई आईडिया पसंद आ गया तो अगले ही पल वो आपके बताएंगे कि हैं तो वो आदमी मार्केटिंग के ही बस भागादौड़ी नहीं होती. जिनका आईडिया आप इग्नोर करेंगे वो पूरे ऑफिस को बताएगा कि मार्केटिंग वाले कितने घमंडी और बेवकूफ हैं. सलाह: इग्नोर

घूमता फिरता विकिपीडिया

ऊपर बताए जंतुओं से मिलते जुलते होते हैं ये लोग और थोड़े से sophisticated होते हैं. इन्हें दुनिया की हर चीज पता हैं और मार्केटिंग के बारे में तो आपसे ज्यादा पता होता है. ये आप से सीधे मुंह कभी कभार ही बात करेंगे. जब करेंगे तो आपको 10-12 केस स्टडीज के हवाला दे देंगे जिनका आपके प्रोडक्ट और मार्केट से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं होता. इन लोगों के साथ २ मूल समस्या होती है. पहली कि ये मुंह बॉस के सामने उस समय खोलेंगे जब आप डिबेट के लिए डाटा के साथ तैयार नहीं होते. दूसरी इनको दिए नाम में शामिल है. इनको मैं विकिपीडिया इसलिए कहता हूं क्योंकि इनकी इनफार्मेशन अक्सर गलत होती है क्योंकि इनका तर्क सिर्फ सुनी सुनाई बातों या केस स्टडीज पर निर्भर होता है, न कि प्रैक्टिकल मुद्दे पर.इनके knowldege base को कोई भी अच्छी अंग्रेजी बोल के एडिट कर सकता है. सलाह: सुनते रहिए. कभी कभार काम की बात भी निकल आती है.

एजेंसी

मार्केटिंग वालों की लाइफ में क्रिएटिव एजेंसी का बहुत रोल होता हैं. पर हमारा रिश्ता बाप बेटे जैसा है. मार्केटिंग वाले (क्लाइंट) बाप होते हैं और बेटा एजेंसी वाले. बेटे को हमेशा लगता हैं कि बाप को कुछ नहीं पता और बाप सोचता रहता है कि ये कब मेरी बात समझेगा. खैर इस नोक झोंक में बेटे को बाप माननी ही पड़ती है क्योंकि बेटे को पैसे बाप ही देगा. सलाह: ये नोक झोंक अच्छी है क्योंकि बेहतरीन आईडिया इन्हीं से निकलता है. और हां  इस नोक झोंक को अंग्रेजी में brainstorming कहते हैं.
ये लेखक के निजी विचार हैं, दी लल्लनटॉप इनसे सहमत हो, जरुरी नहीं.

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