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दिल्ली में 807 लोगों की किडनैपिंग की खबर रानी मुखर्जी स्टारर 'मर्दानी 3' का पीआर कैंपेन है?

दिल्ली पुलिस ने ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी कर इसे पेड पीआर कैम्पेन बताया है. अब 'मर्दानी 3' बनाने वाली यशराज फिल्म्स ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा है.

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'मर्दानी 3' ने वर्ल्डवाइड 39 करोड़ रुपये का कलेक्शन कर लिया है.
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शुभांजल
6 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 6 फ़रवरी 2026, 08:45 PM IST)
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चाहे एक हो या एक सौ, किसी के भी अगवा होने पर समाज और व्यवस्था, दोनों को सचेत हो जाना चाहिए. पर क्या हो, जब आपको कोई ये कहे कि राजधानी दिल्ली में एक के बाद एक 807 लोग किडनैप हो गए. वो भी 15 दिनों के भीतर. पिछले कुछ दिनों में इस तरह की खबरें इंटरनेट पर छाई हुई हैं. ज़ाहिर है कि इससे देशभर के पैरेंट्स अपने बच्चों को लेकर चिंतित हो गए हैं. मगर इस बीच ऐसी रिपोर्ट्स भी सामने आ रही हैं, जिनमें इन आंकड़ों को गलत बताया जा रहा है. लोग दावा कर रहे हैं कि ये खबर एक खास फिल्म का प्रमोशन करने के मक़सद से फैलाई गई है. ये फिल्म है Rani Mukerji की Mardaani 3 है.  

इस पूरे विवाद की शुरुआत 30 जनवरी को PTI की एक रिपोर्ट से हुई है. इसमें दिल्ली पुलिस के ऑफिशियल डेटा के हवाले से एक सनसनीखेज खबर छापी गई. खबर के मुताबिक, 2026 के शुरुआती 15 दिनों में, यानी 1 से 15 जनवरी के बीच, दिल्ली में 807 लोगों की किडनैपिंग हुई है. इस दौरान औसत 54 लोग रोज लापता हुए हैं. इनमें से 509 महिलाएं और 298 पुरुष हैं. 807 में से 616 एडल्ट, जबकि 191 बच्चों के किडनैप होने का दावा किया जा रहा है.

ये काफ़ी डरावना आंकड़ा है. ज़ाहिर है इसने पैरेंट्स और प्रशासन, दोनों के पसीने छुड़ा दिए हैं. हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन आंकड़ों को गलत बताया है. उनके मुताबिक, दिल्ली में लोगों के अपहरण में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. जॉइंट कमिश्नर संजय त्यागी अपने ऑफिशियल वीडियो स्टेटमेंट में कहते हैं,

"दिल्ली में लापता लोगों, खासकर बच्चों को लेकर डरने या घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है. पहले की तुलना में दिल्ली में गुमशुदगी के मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है. जनवरी 2026 में तो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले लापता लोगों की रिपोर्टिंग में कमी दर्ज की गई है. ये भी बताना ज़रूरी है कि दिल्ली पुलिस अपराध के मामलों में निष्पक्ष और ट्रांसपेरेंट रिपोर्टिंग करती है."

इधर दिल्ली पुलिस ने अपना पक्ष रखा, उधर सोशल मीडिया पर एक दूसरी खबर उफ़ान मारने लगी. लोगों ने दावा किया कि किडनैपिंग की ये चर्चा एक सोची-समझी साज़िश है. इसका मक़सद केवल और केवल रानी मुखर्जी की 'मर्दानी 3' को प्रमोट करना है. सवाल उठता है कि यशराज फिल्म्स की ये फिल्म किडनैपिंग केस में कहां से आ धमकी? दरअसल, 'मर्दानी 3' का प्लॉट बच्चों की किडनैपिंग और चाइल्ड ट्रैफिकिंग से जुड़ा है. रानी का किरदार फिल्म में इस अपराध से जुड़े एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करने निकलता है.

'मर्दानी 3' 30 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी. यानी ठीक उसी दिन, जिस दिन PTI ने 807 लोगों की किडनैपिंग वाली खबर छापी थी. अब ये इत्तेफ़ाक है या कुछ और, ये तो केवल खबर छापने वाले ही बता सकते हैं. मगर इस बात के सामने आते ही माहौल पलटने लगा. लोगों ने एक के बाद एक सोशल मीडिया पर YRF की भद्द पीटनी शुरू कर दी. इंफ्लूएंसर्स ने पानी पी-पीकर उस कंपनी को खूब कोसा. लगे हाथ दिल्ली पुलिस ने एक नया स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा,

"कुछ सुरागों की जांच करने के बाद हमें पता चला है कि दिल्ली में लापता लड़कियों की संख्या बढ़ने को लेकर जो माहौल बनाया जा रहा है, वो असल में एक पेड प्रमोशन है. पैसे कमाने के लिए डर और घबराहट फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी."

mardaani 3
दिल्ली पुलिस का ऑफिशियल स्टेटमेंट.

दिल्ली पुलिस ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया है. मगर लोग इसे 'मर्दानी 3' और यशराज फिल्म्स से जोड़कर देखने लगे. हालांकि इससे पहले कि मामला और बिगड़ता, YRF ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा. ANI की रिपोर्ट के मुताबिक यशराज फिल्म्स ने ऐसी किसी भी पीआर कैंपेन से इन्कार करते हुए कहा, 

“यशराज फिल्म्स एक 50 साल पुरानी कंपनी है. इसकी नींव ईमानदारी और ट्रांसपेरेंसी जैसे सिद्धांतों पर रखी गई है. सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे उन आरोपों को हम पूरी तरह से खारिज करते हैं कि मर्दानी 3 के प्रमोशन में किसी संवेदनशील मुद्दे को जानबूझकर सनसनीखेज बनाया गया. हमें संबंधित अथॉरिटी पर पूरा भरोसा है कि वो सही समय पर सभी तथ्यों के साथ सच को सामने ले आएंगे.”

कुल मिलाकर, किडनैपिंग से जुड़े इस मसले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. और जिस तरह का ये मामला है, दिल्ली पुलिस और YRF, दोनों इससे पल्ला झाड़ना चाहती हैं. हालांकि यहां आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की ज़रूरत है. पहली ये कि दिल्ली पुलिस एक तरफ़ ये दावा करती है कि इस बार 807 लोग किडनैप नहीं हुए हैं. वहीं दूसरी तरफ़ 05 फरवरी को टाइम्स ऑफ इंडिया की ऐसी रिपोर्ट रीशेयर कर देती है, जिसके मुताबिक, हर महीने 2 हज़ार लोग किडनैप होते हैं.

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दिल्ली पुलिस का एक ऑफिशियल पोस्ट.

दूसरी बात, यदि 807 लोगों के किडनैप होने की बात YRF ने फैलाई है, तो ये एक बेहद घटिया कैंपेन है. मगर सवाल ये है कि ऐसे में पुलिस अपनी तरफ़ से क्या एक्शन लेने वाली है, जैसा उसने अपने बयान में भी कहा. तीसरी बात ये कि PTI ने दिल्ली पुलिस के किस ऑफिशियल डेटा से 807 लोगों के किडनैप होने की खबर छापी है? पुलिस को या तो उसकी सच्चाई जांचनी चाहिए या फिर खुद ही असली आंकड़े सामने ला देने चाहिए. 

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