फ्लाइंग जट कसम, बड़े खंखोर थे हमारे हारे सुपरहीरोज
फ्लाइंग जट में नया क्या होगा ये चैलेंज है. 90s में बड़े हुए लोगों के ये सीरियल्स जरूर याद होंगे. जो एक के बाद एक पिट गए थे.
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फोटो - thelallantop
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फ्लाइंग जट फिल्म आ रही है. टाइगर श्राफ उसमें सुपरहीरो बनेंगे. सुपरहीरोज की फिल्में अपने यहां कम बनी हैं. कृष और तूफान जैसी. उनमें कुछ चलीं, कुछ पिटीं. सीरियल भी आए. जिंदबाज जहाजी जैसे. लेकिन 90s के दूसरे हिस्से में सीरियल्स का बूम आया. सुनो कइसे.
साल 1997, दिन मंगलवार महीना कोई सा भी. रात बहुत हो चली थी गांव के हिसाब से. वहां खा पी कर होमवर्क वगैरह करके 8 बजे सो जाते थे. लेकिन मंगल को नहीं. ब्लैक एंड व्हाइट टीवी था और उसके लिए तीलियों वाला एंटीना. वही घुमाया जा रहा था नेशनल पकड़ाने के लिए काहे कि शक्तिमान आने वाला था. शक्तिमान बच्चों का पहला सुपरहीरो था. वह भी जाते जाते लोगों को बोर कर गया. जंगलों में अपना जीवन खोज कर थका दिया. उसके बाद कुछ और सुपरहीरो सीरीज आईं, चलीं और चली गईं. उनके बारे में ही बात करते हैं आज.
शक्तिमान की सफलता से मुकेश खन्ना के मुंह लग गया था खून. वो सोचे कि इंडियन बच्चे तो हैं उल्लू, उनको कुछ भी आम घास पकड़ा दो झेल लेंगे. लेकिन इंडिया का लौंडा हो गया था इस्मार्ट. उसे कुछ नया चाहिए था. शक्तिमान का प्रमोशन होकर आर्यमान बन गया था. वह मुंबई का योद्धा था ये यूनिवर्स का. इसमें साइंस की ताकत भरी गई थी लेकिन सब फुस्स. दिमाग की नस इतनी खेंच दी ब्रह्मांड के योद्धा ने कि देखने वाले पचा नही पाए और उलट दिए. सिर्फ 52 एपिसोड एयर हुए और आर्यमान लौट गए अपने खोपचे में.
90 के दशक में सीरियल आता था मायावी नगरी. इसमें थे राजकुमार आर्यक. बड़े बहादुर और डेयरिंगबाज. दुश्मनों की छीछालेदर करने वाले. फिर सीरियल के प्रोड्यूसर्स को पता चला कि गुरू पैसा तो लेटेस्ट टाइप के सुपर हीरो बेचने में है. मार दिया राजकुमार को और करा दिया पुनर्जन्म. इस जन्म में साहब दैवीय ताकतों से लैस कर्मा बने थे. कर्मा रोल किया था सिद्धार्थ चौधरी ने. लेकिन गलती से सीरियल भारत में चलना था. यहां का बच्चा होता है डेढ़ सयाना. सिर्फ 26 एपिसोड के बाद कर्मा के करम फूटे और बिस्तर बंध गया.
आंखों में काले कपड़े का चश्मा लगाए 12 साल का बालक दुश्मनों की मार ठां किए हुए था. उसे शुरुआत में बच्चों ने पसंद किया. लेकिन क्रेज कुछ खास नहीं बना. जूनियर जी का किरदार निभाया था अमितेष कोचर ने. घर में आंटी का सताया हुआ मासूम बच्चा और बाहर शेर. कब तक चलता ये इमोशनल ड्रामा. रगड़ घिस करते भी 156 एपिसोड खींच ले गए थे.
1998-99 में दूरदर्शन पर आया था कैप्टन व्योम. मिलिंद सोमन ने इसमें कुछ कुछ एक्शन सा करने की कोशिश की थी. व्योम के पास थी कुछ सुपरपावर्स जिनके दम पर उसे दुश्मनों से निपटना था. दुश्मनों से तो खैर जैसे तैसे निपटे हुजूरे आला लेकिन दर्शकों को पका दिया. 54 एपिसोड में अपनी पारी समेट कर पवेलियन वापस लौट गए. और हां, डिनो मोरिया और मिस इंडिया मधु सप्रे की शुरुआत यहीं से हुई थी.
ये 2004 के आस पास DD पर आता था. संडे के संडे दोपहर 1 बजे. इसमें एक एलियन का बच्चा इंसानों के बच्चों की हेल्प करता था. लेकिन एलियन वाला झक्कड़पना हॉलीवुड वालों ने इतना घिस दिया है कि बोंगो सबसे बेवकूफ एलियन साबित होकर रह गया. हां इसमें जो लड़का था न आशू, उसका रोल किया था रजत टोकस ने, जो बाद में हिस्ट्री से निकले डेलीसोप जोधा अकबर के जिल्लेइलाही जलालुद्दीन अकबर बने.
साल 1997, दिन मंगलवार महीना कोई सा भी. रात बहुत हो चली थी गांव के हिसाब से. वहां खा पी कर होमवर्क वगैरह करके 8 बजे सो जाते थे. लेकिन मंगल को नहीं. ब्लैक एंड व्हाइट टीवी था और उसके लिए तीलियों वाला एंटीना. वही घुमाया जा रहा था नेशनल पकड़ाने के लिए काहे कि शक्तिमान आने वाला था. शक्तिमान बच्चों का पहला सुपरहीरो था. वह भी जाते जाते लोगों को बोर कर गया. जंगलों में अपना जीवन खोज कर थका दिया. उसके बाद कुछ और सुपरहीरो सीरीज आईं, चलीं और चली गईं. उनके बारे में ही बात करते हैं आज.
आर्यमान
शक्तिमान की सफलता से मुकेश खन्ना के मुंह लग गया था खून. वो सोचे कि इंडियन बच्चे तो हैं उल्लू, उनको कुछ भी आम घास पकड़ा दो झेल लेंगे. लेकिन इंडिया का लौंडा हो गया था इस्मार्ट. उसे कुछ नया चाहिए था. शक्तिमान का प्रमोशन होकर आर्यमान बन गया था. वह मुंबई का योद्धा था ये यूनिवर्स का. इसमें साइंस की ताकत भरी गई थी लेकिन सब फुस्स. दिमाग की नस इतनी खेंच दी ब्रह्मांड के योद्धा ने कि देखने वाले पचा नही पाए और उलट दिए. सिर्फ 52 एपिसोड एयर हुए और आर्यमान लौट गए अपने खोपचे में.
कर्मा
90 के दशक में सीरियल आता था मायावी नगरी. इसमें थे राजकुमार आर्यक. बड़े बहादुर और डेयरिंगबाज. दुश्मनों की छीछालेदर करने वाले. फिर सीरियल के प्रोड्यूसर्स को पता चला कि गुरू पैसा तो लेटेस्ट टाइप के सुपर हीरो बेचने में है. मार दिया राजकुमार को और करा दिया पुनर्जन्म. इस जन्म में साहब दैवीय ताकतों से लैस कर्मा बने थे. कर्मा रोल किया था सिद्धार्थ चौधरी ने. लेकिन गलती से सीरियल भारत में चलना था. यहां का बच्चा होता है डेढ़ सयाना. सिर्फ 26 एपिसोड के बाद कर्मा के करम फूटे और बिस्तर बंध गया.
जूनियर जी
आंखों में काले कपड़े का चश्मा लगाए 12 साल का बालक दुश्मनों की मार ठां किए हुए था. उसे शुरुआत में बच्चों ने पसंद किया. लेकिन क्रेज कुछ खास नहीं बना. जूनियर जी का किरदार निभाया था अमितेष कोचर ने. घर में आंटी का सताया हुआ मासूम बच्चा और बाहर शेर. कब तक चलता ये इमोशनल ड्रामा. रगड़ घिस करते भी 156 एपिसोड खींच ले गए थे.
कैप्टन व्योम
1998-99 में दूरदर्शन पर आया था कैप्टन व्योम. मिलिंद सोमन ने इसमें कुछ कुछ एक्शन सा करने की कोशिश की थी. व्योम के पास थी कुछ सुपरपावर्स जिनके दम पर उसे दुश्मनों से निपटना था. दुश्मनों से तो खैर जैसे तैसे निपटे हुजूरे आला लेकिन दर्शकों को पका दिया. 54 एपिसोड में अपनी पारी समेट कर पवेलियन वापस लौट गए. और हां, डिनो मोरिया और मिस इंडिया मधु सप्रे की शुरुआत यहीं से हुई थी.
बोंगो
ये 2004 के आस पास DD पर आता था. संडे के संडे दोपहर 1 बजे. इसमें एक एलियन का बच्चा इंसानों के बच्चों की हेल्प करता था. लेकिन एलियन वाला झक्कड़पना हॉलीवुड वालों ने इतना घिस दिया है कि बोंगो सबसे बेवकूफ एलियन साबित होकर रह गया. हां इसमें जो लड़का था न आशू, उसका रोल किया था रजत टोकस ने, जो बाद में हिस्ट्री से निकले डेलीसोप जोधा अकबर के जिल्लेइलाही जलालुद्दीन अकबर बने.
