सटायर आज के टाइम का सबसे बढ़िया औजार है. किसी की टांग खींचनी हो, बिना बहस किए करसकते हैं. कोई बढ़िया सा जोक मार दीजिए. वीडियो या कार्टून बना दीजिए. अगला तिलमिलाजाएगा. जान से मारना उतना नहीं चुभता, भिगो के मारा ज्यादा कल्लाता है. आप गोलादागिए. बाकी का काम सोशल मीडिया कर देगी. लोगों को पसंद आ गया तो ट्रेंड भी करनेलगेगा. लाइक और शेयर ऐसे मिलेंगे, जैसे बहुत बड़ा तीर मार दिया हो आपने. मगर जरा थमजाइए. ज्यादा सटायर भी लोग हजम नहीं कर पाते हैं. लेने के देने भी पड़ जाते हैं. औरऐसा तब होता है जब ये सेंटीमेंट हर्ट कर दे. कई बार तो कोर्ट-कचहरी के चक्कर भीकाटने पड़ जाते हैं.सटायर वाले कार्टून्स कंट्रोवर्सी में बहुत रहे हैं. ऐसेकार्टून से बड़ा बवाल होता रहा है. कार्टूनिस्ट जेल भी गए और कहीं तो कार्टून छापनेवाले ऑफिस पर अटैक भी हो गया. रीजन चाहे जो भी हो. कभी कार्टून तो कभी उससे हुआहंगामा हेडलाइंस बनते रहे हैं. कुछ ऐसे ही कार्टून्स हैं जो बहुत हंगामा मचाए.1. असीम त्रिवेदी का भ्रष्टमेव जयतेकनपुरिया हैं. सोशल मीडिया पर तो नाम के आगे ही कंट्रोवर्शियल कार्टूनिस्ट लिखा है.2011 में एंटी-करप्शन कैंपेन चला रहे थे. 'कार्टून अगेंस्ट करप्शन'. वही में एक ठोकार्टून बना दिए. उसके बाद फंस गए बवाल में. ये जो हैं, बिग बॉस में भी जा चुकेहैं. बिग बॉस तो भइया आज के टाइम की गंगा नदी हो गई है. जाए के बस डुबकी लगा आओ. औरजो कुछ कहना चाहते हो, कैमरे पर फूंक आओ. सेडिशन का चार्ज भी लग गया. जेल भी गए थे.2. चार्ली हेब्दो, डोंट मेक फन ऑफ मोहम्मद7 जनवरी 2015. फ्रांस की सटायरिकल वीकली मैगज़ीन, चार्ली हेब्दो. ऑफिस में घुसकर दोभाइयों ने अटैक कर दिया. हर जगह लोग अफसोस कर रहे थे. रीजन था प्रॉफेट मोहम्मद कासटायर वाला कार्टून. वैसे तो ये मैगज़ीन हमेशा से ऐसे कार्टून बनाती रही है. कभीजीसस का तो कभी पॉलिटीशियंस का. मगर इस बार सटायर महंगा पड़ गया. ऐक्चुअली लेवलनहीं डिफाइंड है न सटायर करने का. किस हद तक कर सकते हैं, ऐसा लिखा नहीं है कहीं.3. आई रिपीट, डोंट मेक फन ऑफ मोहम्मदडेनमार्क का एक न्यूज़पेपर है. जाय्लैंस पोस्टन. 2005 में अपने एडिटोरियल में 12 ठोकार्टून पब्लिश किए थे. उनमे से ज्यादातर कार्टून प्रॉफेट मोहम्मद के थे. थे तो येभी सटायर वाले ही, मगर फिर से किसी के सेंटीमेंट को हर्ट कर गए. 2010 में अटैकहोते-होते रह गया. अटैक को रोकने का क्रेडिट जाता है डेनमार्क और स्वीडन कीसिक्योरिटी सर्विस को.4. किंग के साथ मजाक नहींबार्सिलोना पता है? स्पेन में है. अब ये मत पूछना कि स्पेन कहां है. वहीं की एकमैगज़ीन है अल ज्यूवीस. 2007 में एक कार्टून छपा था उसमें और फोटू था वहां के किंगका. अब पूछोगे कि कॉन्ट्रोवर्सी क्यों हुई, तो उसका जवाब ये कार्टून देखकर पता चलजाएगा और बाकी का जो स्पेनिश में लिखा है, उसका मतलब हम बता दे रहे हैं. लिखा है किजितने बच्चे जन्म लेंगे, उतने के हिसाब से 2500 यूरो दिया जाएगा. एक तो जुमला, वोभी किंग के उपर. नॉट एक्सेप्टेड.5. कैपिटलिस्ट सटायर, एडिटर बाहरयूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान. कनाडा में है. वहां का स्टूडेंट न्यूज़पेपर है दि शेफ.2006 में कार्टून पब्लिश हुआ, जिसमें जीसस पिग के साथ सेक्स कर रहे हैं. टाइटल हैकैपिटलिस्ट पिगलेट. पिगलेट होता है सुअर का बच्चा. मतलब तो समझ ही गए होंगे. बादमें बहुत कहा-सुनी हुई. एडिटर साहब को रिजाइन करना पड़ गया. अब आप समझ जाइए कि टांगखींचने वाले कहां-कहां बैठे हैं.6. कार्टून वार: ऑस्ट्रेलिया बनाम इंडोनेशियाकभी-कभी ईंट का जवाब पत्थर से देने में भलाई है. यहां भी ऐसा ही हुआ. पहलेइंडोनेशिया ने कार्टून बनाया. ऑस्ट्रेलियन ऑफेंड हो गए. बाद में ये भी कार्टून बनादिए और ऑफेंड कर दिया. बदला पूरा. और ये वाला कांड भी 2006 में ही हुआ. जमाना खराबचल रहा था तब शायद.7. यूके वर्सेस इज़राइलदि इंडिपेंडेंट. ब्रिटिश न्यूज़पेपर है. 2003 में, ठीक इज़राइल में इलेक्शन से पहलेएक कार्टून पब्लिश किया. वहां के प्राइम मिनिस्टर का. इनडायरेक्ट्ली कार्टून मेंगाज़ा के उपर अटैक्स को लेकर था. जानते ही हैं कितना सेंटीमेंटल हो जाते हैंइज़राइली गाजा को लेकर. ये बिल्कुल वैसे ही है जैसे कोई अपने बच्चे को कितना भीहौंक ले, लेकिन दूसरा कोई कुछ न कहे.8. मार्स ऑर्बिटर मिशन, नो कमेंट्स2014 में इंडिया में जश्न हो रहा था. हम मार्स पर जो पहुंच गए थे, लेकिन ठीक एकहफ्ते बाद एक कार्टून आया न्यूयॉर्क टाइम्स में. देखकर गुस्सा आ जाएगा. मगर ये तोअमेरिकन न्यूज़पेपर है. इसे तो बैन कर नहीं पाएंगे. तो कार्टून देखिए और बस खूनखौलाकर रह जाइए.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी अमितेश ने की है. अमितेश प्रोडक्शन टीम का तेंजिंग नोर्गे है.