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फिल्म रिव्यू- IB 71

असल घटनाओं से प्रेरित ये उस मिशन की कहानी है, जिसने बिना एक भी गोली चलाए, इंडिया की एक बहुत बड़ी मुश्किल आसान कर दी. वो भी 1971 की जंग से ठीक पहले.

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IB 71 के एक सीन में विद्युत जामवाल.
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श्वेतांक
12 मई 2023 (अपडेटेड: 12 मई 2023, 11:45 AM IST)
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IB 71 नाम की फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई है. ये असल घटनाओं से प्रेरित बताई गई है. असल कहानी है 30 जनवरी, 1971 को हुआ 'गंगा प्लेन हाइजैक'. मगर फिल्म में ज़रूरत के मुताबिक रचनात्मक आज़ादी ली गई है. जो दिखाया गया है, उस पर बात करते हैं. इंडिया को पता चला कि पाकिस्तान हमले की तैयारी कर रहा है. पाकिस्तान एयरफोर्स वेस्ट से उड़कर ईस्ट पाकिस्तान में अपने फाइटर प्लेन तैनात करना चाहती है. 10 दिन के बाद कभी भी इंडिया पर हमला हो सकता है. मगर खेला ये है कि पाकिस्तान को अपने जहाज़ वहां पहुंचाने के लिए भारत के ऊपर से उड़कर जाना होगा. अगर इंडिया को युद्ध की तैयारी के लिए वक्त चाहिए, तो उसे इंडियन एयरस्पेस में पाकिस्तानी जहाज़ों को ब्लॉक करना होगा. ये तभी किया जा सकता है, जब पाकिस्तान की ओर से एक्ट ऑफ वॉर हो. ये बैकस्टोरी है. असली कहानी इसके बाद शुरू होती है.  

आज़ाद कश्मीर की मांग के लिए दो लड़कों ने मिलकर गंगा प्लेन हाइजैक किया. उसे पाकिस्तान ले गए. ताकि उनकी कश्मीर को अलग देश बनाने की मांग को विश्व स्तर पर जाना जाए. रेकग्नाइज़ किया जाए. इंडिया ने इस प्लेन हाइजैकिंग को एक्ट ऑफ वॉर माना. और पाकिस्तान के जहाज़ों को इंडिया के ऊपर से उड़ने से बैन कर दिया. बाद में पता चला कि ये सारी इंडिया की ही प्लानिंग थी. बेसिकली ये उस मिशन की कहानी है, जिसने बिना एक भी गोली चलाए, इंडिया की एक बहुत बड़ी मुश्किल आसान कर दी. वो भी 1971 की जंग से ठीक पहले. 

इस रीयल मिशन के बारे में विस्तार से आप इस वीडियो में जान सकते हैं- 

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IB 71 उस टाइप की फिल्म है न, जो सबकुछ सही करती है. ईमानदारी से. फिर भी वो बहुत अच्छी फिल्म नहीं बन पाती. जबकि इसमें वो सारे गुण मौजूद हैं. इस फिल्म की कहानी ही हीरो है. आपको अलग से किसी को हीरो बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती. ये पिक्चर ठीक वैसा ही करती है. मगर ऐसा लगता है कि कुछ कमी है. फिल्म का फर्स्ट हाफ कहानी को सेट करने में खर्च हो जाता है. इसलिए वहां फिल्म के साथ जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते. क्योंकि वो सब ऊपर-ऊपर से होता है. फिल्म अपना सारा बारूद सेकंड हाफ के लिए बचाकर रखती है. मगर वहां भी सबकुछ शांति पूर्ण तरीके से हो जाता है. शायद हमें ऐसा सिनेमा धाएं-धाएं वाले बैकग्राउंड स्कोर के साथ देखने की आदत है. जब हमारा एड्रेनलीन उबाल मारे. हाथ में पसीने आ जाएं. सीट के कोने पर बैठे नाखून चबाते हुए, आंखें स्क्रीन पर गड़ जाएं. मगर इस फिल्म को देखते वक्त ऐसा नहीं लगता. इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि ये खराब फिल्म है.

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फिल्म के एक सीन में विद्युत जामवाल.

आपको इसमें विद्युत के बदन की कटाई नहीं दिखती. न ही उन्हें फिजूल में 20-30 लोगों को एक साथ पीटते दिखाया गया है. ये फिल्म वो खींच ले जाते हैं. उन्होंने IB 71 में देव नाम के एक एजेंट का रोल किया है. जो इस मिशन में सबसे अहम भूमिका निभाता है. मगर उन्हें अलग से हीरो दिखाने की जहमत नहीं ली गई. डायरेक्टर संकल्प रेड्डी हैं. इन्होंने 'ग़ाजी' नाम की फिल्म से अपना करियर शुरू किया था. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि IB 71 का आइडिया खुद विद्युत उनके पास लेकर आए थे. बतौर प्रोड्यूसर भी ये विद्युत की पहली फिल्म है. ये शुभ संकेत हैं कि विद्युत जामवाल सिर्फ उन कहानियों की तरफ नहीं देख रहे, जिसमें उन्हें एक्शन करने और बॉडी दिखाने का मौका मिले.

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फिल्म के सीन में अनुपम खेर.

अनुपम खेर ने फिल्म में IB चीफ अवस्थी का रोल किया है. वो बीच रात में नींद से जाकर भी ये रोल कर सकते थे. या ये वैसा रोल था, जो कोई भी एक्टर कर सकता था. ऐसे में अनुपम ही क्यों? अनुपम खेर एक खास किस्म की विचारधारा के साथ पैबस्त नज़र आते हैं. ढेर सारे लोग हैं, जो उनकी आइडियोलॉजी का समर्थन करते हैं. एक और ऐसी फिल्म, जिसमें इंडिया पाकिस्तान को मात दे रहा है. उस फिल्म में अनुपम का होना, उनके समर्थकों और फैन्स को आकर्षित करेगा. प्लस फिल्म में इकलौता ऐसा डायलॉग है, जिसे क्रिंज की श्रेणी में रखा जा सकता है. वो भी अनुपम खेर के ही हिस्से में आता है. एक सीन में वो कहते हैं-  

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फिल्म के हाइजैक वाले सीन में विशाल जेठवा.

परफॉरमेंस विभाग में इस फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी हैं विशाल जेठवा. विशाल ने दो हाइजैकर्स में से एक, कासिम का रोल किया है. दिलचस्प बात ये है कि ये फिल्म के विलन भी हैं और कॉमिक रिलीफ भी. विशाल ने कश्मीरी लहजा बढ़िया पकड़ा. मगर जो फट पड़ने वाले सीन्स हैं, उसमें वो सबसे ज़्यादा प्रभावित करते हैं. विशाल ने रानी मुखर्जी की 'मर्दानी 2' में विलन के रोल से करियर शुरू किया था. आगे सलमान की 'टाइगर 3' में दिखने वाले हैं.  

IB 71 एक अच्छी कोशिश है. ना ही ये फिल्म राष्ट्रवाद को हथियार की तरह इस्तेमाल करती है, और न ही पाकिस्तान को विलन बनाती है. फिर भी IB 71 औसत और अच्छी फिल्म के बीच झूलती रह जाती है. 

वीडियो: गेस्ट इन द न्यूजरूम: विद्युत जमवाल ने लल्लनटॉप के न्यूजरूम में कौनसा स्टंट कर दिया

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