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दाऊद के दुश्मन हुसैन उस्तरा की कहानी, जिस पर शाहिद की 'ओ रोमियो' बनी है!

ऐसा कहा जाता है कि दाऊद का दुश्मन अपने आप हुसैन का दोस्त बन जाता था. यही वजह हुसैन को सपना दीदी के करीब लेकर गई.

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'ओ रोमियो' 13 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है.
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यमन
14 जनवरी 2026 (Published: 08:16 PM IST)
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13 फरवरी 2026 के दिन Vishal Bhardwaj की नई फिल्म O Romeo सिनेमाघरों में उतरेगी. कुछ दिन पहले फिल्म का टीज़र रिलीज़ हुआ. ‘कमीने’ और ‘हैदर’ के बाद Shahid Kapoor ने फिर अपनी कमान विशाल के हाथों में सौंप दी. टीज़र में शाहिद का नाम नहीं सुनाई पड़ता. दिखाई देते हैं उसके टैटू से लिपटे बाजू. सिर पर हमेशा एक टोपी लगाए रखता है. वैसी हैट जिसे देखकर कोई कहे कि अपने आप को रोमियो समझता है क्या. शायद समझता भी हो.

टीज़र में शाहिद खूब खून-खच्चर मचाते हैं. हाथों में पांच इंच के उस्तरा ऐसे थामे  जैसे कोई तलवार हो. उन्हीं उस्तरों से वो कोहराम मचाता है. फ्रेम को लाल रंग देता है. मीडिया में छप रहा है कि शाहिद का किरदार Hussain Ustara पर आधारित है. हुसैन वो आदमी था जिसने Dawood Ibrahim से टक्कर ली. उसके लिए आफत बन गया. लेकिन वो ‘ओ रोमियो’ के शाहिद जैसा नहीं दिखता था. सीनियर क्राइम जर्नलिस्ट एस. हुसैन ज़ैदी, हुसैन उस्तरा से अपनी पहली मुलाकात याद करते हैं. साल 1995 की बात है. जब उन्हें पता चला कि वो हुसैन उस्तरा से मिलने जा रहे हैं तो वो उत्साहित थे. उनके दिमाग में तमाम फिल्मी रीलें चलने लगीं. कि कोई लंबा-चौड़ा आदमी स्लो मोशन में चलता हुआ आएगा. उसके आते ही कमरे की हवा में हल्का तनाव उबलने लगेगा. स्पॉइलर अलर्ट ये है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ.

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‘ओ रोमियो’ के एक सीन में शाहिद कपूर. 

हुसैन ज़ैदी के सामने एक साधारण-सा दिखने वाला आदमी था. सफेद कुर्ता-पायजामा पहने. एकदम दुबला-पतला. हंसमुख किस्म का. अगर ये आदमी आपको भीड़ में दिख जाए तो यकीन नहीं होगा कि ये खूंखार गैंगस्टर हो सकता है. हुसैन उस्तरा चाहता था कि उसके स्वैग से सामने वाला प्रभावित हो जाए. इसलिए ज़ैदी के सामने नई बंदूकें रख दीं. और अपनी ज़ेब से तीन मोबाईल फोन निकाले. एक फोन काम के लिए, दूसरा फोन परिवार वालों के लिए, और तीसरा फोन अपनी प्रेमिकाओं के लिए. ये सफाई खुद उस्तरा ने दी. हुसैन उस्तरा उस समय तीन फोन लेकर घूम रहा था जब आउटगोइंग और इनकमिंग कॉल पर 36 रुपये प्रति मिनट की दर लगती थी.

हुसैन का बचपन कैसा था, वो कहां पला-बढ़ा, इसे लेकर ज़्यादा जानकारी पढ़ने को नहीं मिलती. हुसैन उस्तरा का पहला परिचय उस पॉइंट से आता है जब वो 16 साल का था. उस उम्र में हुसैन की संगत कुछ गलत लोगों के साथ थी. तब तक वो हुसैन उस्तरा नहीं बल्कि हुसैन शेख था. हुसैन हमेशा अपने साथ एक उस्तरा रखता था. किसी दिन एक लड़के से झड़प हो गई. गुस्से में आकर हुसैन ने अपना उस्तरा निकाला और सामने वाले पर हमला कर दिया. हुसैन ने उस्तरे के एक वार से सामने वाले का कंधे से लेकर नीचे तक का हिस्सा चीर दिया. उस लड़के को फौरन डॉक्टर के पास ले जाया गया. डॉक्टर चीरे का निशान देखकर हैरान थे. उनका मानना था कि कोई सर्जन ही अपने स्कैल्पल से इतना साफ कट मार सकता था. इस घटना ने हुसैन शेख को आसपास के इलाके में मशहूर कर दिया. अब उसे लोग हुसैन उस्तरा या उस्तरा भाई के नाम से पहचानने लगे.

हुसैन की कहानी में दूसरी अहम किरदार थी सपना दीदी. उसका असली नाम अशरफ खान था. उसका पति महमूद दुबई में काम किया करता था. किसके साथ काम करता था, पैसा कैसे कमाता था, इसके बारे में न महमूद ने कभी अशरफ को बताया और न ही अशरफ ने कभी पूछा. एक बार दुबई से फोन आया. पता चला कि शाम की फ्लाइट से महमूद मुंबई आ रहा है. अशरफ उससे मिलने के लिए एयरपोर्ट पहुंची. महमूद उसकी आंखों के सामने था. लेकिन अगले ही पल गोलियों की आवाज़ आई. महमूद नज़र से ओझल हो गया. अफरा-तफरी के बीच अशरफ को ढूंढने की कोशिश कर रही थी. फिर एक पुलिसवाले ने उसे JJ हॉस्पिटल जाने को कहा. अशरफ अस्पताल पहुंची. वहां एक कोने में बिस्तर पर महमूद की लाश पड़ी थी. उसे गोलियों से भून डाला गया था. अशरफ को समझ नहीं आया कि पुलिस ने उसके पति को क्यों मार डाला था.

अगले दिन हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से पता चला कि महमूद को अंडरवर्ल्ड में महमूद कालिया के नाम से जाना जाता था. महमूद अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के लिए काम करता था. दाऊद की किसी बात से इंकार करने पर उसके गुर्गों ने पुलिस से मुखबिरी कर दी थी. और वो एनकाउंटर में मारा गया था. अशरफ को जब इस सच्चाई का पता चला, वो दाऊद से बदला लेने के लिए आतुर हो गई. सपना की अंडरवर्ल्ड से पहली मुलाक़ात हुई हुसैन उस्तरा के ज़रिए. हुसैन का अपना गैंग था और उसकी दाऊद से नहीं बनती थी. किसी ने ये बात अशरफ को बताई और वो सीधे हुसैन से मिलने पहुंच गयी. हुसैन पहले तो उसकी बात सुनकर हंसा लेकिन फिर उसके पक्के इरादे सुनकर मदद के लिए तैयार हो गया. उसने अशरफ को मार्शल आर्ट्स और हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी. दोनों पक्के दोस्त बन गए. हुसैन की मदद से अशरफ ने दाऊद के ठिकानों पर जासूसी शुरू कर दी. मुंबई में दाऊद के ड्रग्स के, सट्टेबाज़ी के धंधे चलते थे. अशरफ इन सब के बारे में पुलिस को बताने लग गई. और जल्द ही पुलिस की एक पक्की इनफॉर्मर बन गई.

अशरफ का नाम सपना दीदी कैसे पड़ा, इसके पीछे भी एक अलग कहानी है. एक रोज़ अशरफ को पता चला कि दाऊद का सबसे बड़ा दुश्मन अरुण गवली है. अशरफ ने उससे जाकर मदद मांगी लेकिन गवली ने ये कहकर मदद करने से इंकार कर दिया कि वो "उस जैसे" लोगों का भरोसा नहीं कर सकता. अशरफ को समझ आ गया कि अशरफ बने रहने से काम नहीं चलने वाला. उस दिन से उसने अपना नाम बदलकर सपना कर लिया. सपना ने अपनी गैंग बना ली थी. वो लोग दाऊद के स्मगलिंग वाले माल को लूटते, और उसे बेचकर मुनाफा बनाते. आगे सपना ने एक क्रिकेट मैच के दौरान दाऊद को मरवाने की कोशिश भी की, लेकिन वो प्लान कामयाब नहीं हो पाया. हालांकि तब दाऊद के राइट हैंड रहे छोटा शकील को सपना के प्लान के बारे में पता चल चुका था. एक रोज़ जब सपना अपने घर में लेटी हुई थी. शकील के कुछ लड़के आधी रात घर में दाखिल हुए. और सपना को उठाकर ले गए. उसी के घर के नीचे चाकुओं से गोद कर सपना की हत्या कर दी गई.

सपना की मौत के बाद भी कई सालों तक हुसैन अपना गैंग चलाता रहा. हुसैन ज़ैदी बताते हैं कि उस्तरा की सबसे बड़ी कमज़ोरी महिलाएं थीं. वो कई महिलाओं के साथ संबंध बनाता. अपनी प्रेमिकाओं को लेकर हुसैन उस्तरा का एक नियम था. कि वो जब उनसे मिलने जाएगा तो अपने आसपास बॉडीगार्ड नहीं रखेगा. छोटा शकील को ये बात मालूम पड़ी. उसने एक लड़की को हुसैन उस्तरा के पास भेजा. कुछ ही समय में वो महिला हुसैन की गर्लफ्रेंड बन गई. एक दिन उस महिला ने हुसैन को मिलने के लिए नागपाड़ा बुलाया. हुसैन को कोई खबर नहीं थी कि उसके साथ क्या होने वाला है. वो आराम से अपनी गर्लफ्रेंड के घर पर बैठा था. तभी वहां छोटा शकील आ पहुंचा. हुसैन को समझते देर नहीं लगी कि क्या हो रहा है. इससे पहले कि हुसैन उस्तरा अपनी गन निकाल पाता, छोटा शकील और उसके लड़कों ने उसे गोलियों से भून दिया.

विशाल भारद्वाज लंबे समय से इस कहानी पर काम कर रहे हैं. पहले उन्होंने इरफान और दीपिका पादुकोण को हुसैन उस्तरा और सपना दीदी के किरदारों में एक छत के नीचे लाने की कोशिश की. मगर इरफान की तबियत के चलते तब फिल्म नहीं बन सकी. बाद में इसे कार्तिक आर्यन के साथ भी प्लान किया गया. लेकिन अब ये शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी के साथ बनी है. इन दोनों के अलावा अविनाश तिवारी, नाना पाटेकर, फरीदा जलाल और विक्रांत मैसी भी अहम किरदारों में नज़र आएंगे. 

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