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रिव्यू: हाउस ऑफ द ड्रैगन एपिसोड 2

पहले की तरह दूसरे एपिसोड में भी कहानी बिल्ड हो रही है. इसमें भी भरपूर ग्रैंडनेस है. ड्रैगन फैंस के लिए ट्रीट है. बादलों के बीच से निकलते हुए तेजतर्रार ड्रैगन हैं.

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29 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 29 अगस्त 2022, 02:20 PM IST)
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दहाड़ते ड्रैगन की दास्तान
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'गेम ऑफ थ्रोन्स' ने पूरी दुनिया में लाखों फैन्स कमाए. अब उसके फैन्स 'हाउस ऑफ द ड्रैगन' के भी फैन हैं. क्योंकि इसका पहला एपिसोड पिछले सप्ताह रिलीज़ हो चुका था. हालांकि एक एपिसोड के बाद फैन्स वाली बात कहना जल्दबाजी है, लेकिन माहौल ऐसा ही बनाया गया है. HOTD  पूरी दुनिया में एक साथ रिलीज़ होता है. अमेरिका में हर सप्ताह रविवार रात 9 बजे और साढ़े नौ घण्टे के टाइम डिफरेंस की वज़ह से भारत में सोमवार सुबह 6:30 बजे. आज है सोमवार इसलिए इसका दूसरा एपिसोड भी हॉटस्टार पर स्ट्रीम होने लगा है. देखते हैं कैसा है दूसरा एपिसोड ? कोशिश करेंगे कि जिसने पहला एपिसोड न देखा हो उसके लिए स्पॉइलर्स न हों. पर एकाध हों तो माफ़ कर दीजिएगा.

'द रोग प्रिंस'

दूसरे एपिसोड 'द रोग प्रिंस' के नाम से ही स्पष्ट है कि ये एक दुष्ट राजकुमार का एपिसोड है. डेमॉन टार्गेरियन की दुष्टता और नाफ़रमानी इस एपिसोड की धुरी हैं. इसमें कोई नया कैरेक्टर इंट्रोड्यूज नहीं हुआ है. सभी पुराने किरदार हैं. एक-दो नए हैं, तो ऐसे नहीं हैं जो कहानी को प्रभावित करें. पहले की तरह दूसरे एपिसोड में भी स्टोरी को आकार दिया जा रहा है. कहानी बिल्ड हो रही है. इसमें भी भरपूर ग्रैंडनेस है. ड्रैगन फैंस के लिए ट्रीट है. बादलों के बीच से निकलते हुए तेजतर्रार ड्रैगन हैं.

पहचानिए ये किसका ड्रैगन है? 
वीभत्स-घिनौनी ओपनिंग

पहले एपिसोड में कई सारे ऐसे सीन थे, जिनको देखते हुए बदन में एक तरह की झुरझुरी छूटती है. उस स्पेसिफिक पार्ट को स्किप कर देने का मन करता है. ऐसे एक चाइल्ड बर्थ सीन की पिछले एपिसोड में बहुत आलोचना हुई थी. इस सीन को वॉयलेंट बताया गया था. पर रेयान कॉन्डल समेत मेकर्स का मानना था कि वो एक महत्वपूर्ण सीन था. स्टोरी के एसेंस को बचाए रखने के लिए उसे वैसे ही दिखाया जाना ज़रूरी था. क्यों ज़रूरी था इसकी चर्चा फिर कभी विस्तार से. इस एपिसोड में ओपनिंग शॉट के अलावा कुछ ऐसा वीभत्स या हिंसक नहीं है. न सेक्स है, न हिंसा है. पर ओपनिंग सीक्वेंस इतना घिनौना है कि आप एक समय को स्क्रीन से आंखें हटा लेते हैं. ये पूरी सीरीज़ का मूड है. जहां सच्चाई बारिश के बाद के आसमान सरीखी साफ़ दिखाई देती है.

युद्ध का भय

अल्फ्रेड हिचकॉक कहते हैं: there is no terror in bang, only in the anticipation of it. यानी डर धमाके में नहीं बल्कि उसके पूर्वाभास में होता है. HOTD का दूसरा एपिसोड हिचकॉक के इसी कोट को फॉलो करता है. किसी तरह का कोई युद्ध नहीं. कोई हिंसा नहीं. पर हर अगले क्षण युद्ध का भय हमेशा बना रहता है. एक सीन है, जिसमें ओटो और डेमॉन आमने-सामने हैं. तलवारें खिंचती हैं. तनाव अपने चरम पर जाता है. आग उगलने को तैयार दहाड़ता हुआ ड्रैगन. पूरा एपिसोड युद्ध की आशंका के तले दबा हुआ है. यही इसकी यूएसपी है. इवन काउन्सिल मीटिंग्स भी इसी तनाव की चाशनी में डूबी हुई हैं.

वेस्टरॉस की रानी बनेगी अपुन
रेनेयरा की ग्रोथ

पिछले एपिसोड में हमने देखा था कि विसेरियस ने अपनी बेटी रेनेयरा टार्गेरियन को अपना उत्तराधिकारी चुना है. उसका क्या कारण है? जिसने पहला एपिसोड देखा, उसे पता है, जिसने नहीं देखा उसे देखकर पता चलेगा. दूसरे एपिसोड में रेनेयरा की ग्रोथ दिखाई गई है. उसका कैरेक्टर और सोच अपने पिता से किस तरह से अलग और आक्रामक है, ये दिखाया गया है. उसका डिसीजन मेकिंग में दख़ल नज़र आता है. जबकि उसके पिता इसके लिए तैयार नहीं हैं. उसके पिता उसे इसलिए प्रेम नहीं करते कि वो उनकी बेटी है, बल्कि इसलिए कि वो उनकी वारिस है. वो उसे अब भी बच्ची समझते हैं. रेनेयरा को जल्दी से बड़ी होना है. वो एक जगह ईश्वर से मांगती भी है: I want him to see me more than a little girl.

बाहरी और भीतरी राजनीति

जैसे 'गेम ऑफ थ्रोन्स' राज्य की बाहरी और भीतरी पॉलिटिक्स के इर्दगिर्द रचा-बुना गया था. ठीक वैसा ही 'हाउस ऑफ द ड्रैगन' के साथ भी है. एपिसोड दर एपिसोड इस पॉलिटिक्स की परतें खुलेंगी. जैसे कुछ परतें इस एपिसोड में खुलती हैं. एक टार्गेरियन फैमिली के अंदर की राजनीति है. दूसरी, हाउसेज और लॉर्ड्स के बीच की तनातनी है. तीसरी वेस्टरॉस और फ्री सिटीज़ की बीच की. पर इन सबका मक़सद एक ही है, शक्तिशाली आयरन थ्रोन पर कब्ज़ा. इसके लिए तमाम हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. एक समय राजाओं में जो मैरिज डिप्लोमेसी और पॉलिटिक्स हुआ करती थी, HOTD के इस एपिसोड में भी दिखती है.

डेमॉन टार्गेरियन द रोग प्रिंस
पितृसत्ता और स्त्रीसत्ता के बीच जंग

एक तरफ़ पुरुषवादी मानसिकता है और दूसरी तरफ़ स्त्रीवादी सोच. दोनों एक-दूसरे से टकरा रही हैं. हर दूसरे क्षण पुरूष स्त्री को नीचा दिखाना चाहते हैं. इवन पुरुषवादी सोच वाली औरतें भी औरतों के विरोध में खड़ी हैं. पर महिलाएं लड़ रही हैं. एक डायलॉग इस लड़ाई को समझने के लिए काफ़ी है, जो कि ट्रेलर में भी था. जब रेनेयरा को उत्तराधिकार के ऑर्डर के बारे में समझाया जाता है, तो वो कहती है: When I am queen, I will change the order. इस एक संवाद में पितृसत्ता के खिलाफ जंग का ऐलान है. अपने हक़ के लिए लड़ने का साहस है. इस एपिसोड में पैट्रियार्की और मैट्रियार्की एक साथ चलते हैं. दोनों एक-दूसरे के ऊपर ख़ुद को स्थापित करना चाहते हैं. कमोबेश पूरे सीज़न या यूं कहें आगे आने वाले सीजन्स में भी यही देखने को मिलेगा.

तो चलते हैं फिर मिलेंगे अगले सप्ताह तीसरे एपिडसोड के रिव्यू के साथ. इजाज़त, योर ग्रेस…

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